Dainik Bhaskar

ईसा मसीह के शब्दों को जीवन में उतारा यासिन नेSaturday, March 20, 2010 00:21 [IST]

यासिन मुहम्मद एक छोटे-से गांव में चाय की दुकान चलाता था। वह महत्वाकांक्षी व कर्मठ व्यक्ति था। रात-दिन दुकान पर लगा रहता। जल्दी ही उसने कुछ पैसे जमा कर लिए। एक दिन उसकी दुकान पर ग्राम विकास के निदेशक अख्तर हमीद खां आए। उन्होंने यासिन को सलाह दी कि गांव में रिक्शा चालकों की एक सहकारी समिति बनाओ। यासिन ने कहा- पहले भी दो बार समितियां बनी हैं, लेकिन चंदे की रकम में गड़बड़ होने से दोनों...
 
 
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साईंबाबा ने दिया प्राणियों में समभाव का संदेशFriday, March 19, 2010 01:36 [IST]

आधी सदी से अधिक समय हुआ, भारत में प्रसिद्ध संत साईंबाबा हुए थे। वे शिर्डी में निवास करते थे। लोक कल्याण करते रहना और भगवान का भजन-पूजन करना ही उनका नित्य कर्म था। वहां एक मंदिर की स्थापना की गई थी जिसे साईंबाबा के शिष्य उपासनी बाबा संभालते थे। एक दिन साईंबाबा ने अपने शिष्य से पूछा- मंदिर में भक्तगण आते हैं या नहीं? उपासनी बाबा ने उत्तर दिया- नहीं। तब साईंबाबा ने कहा- अच्छा, कभी-कभी मैं...
 
 
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अंतत: उसे अपने दुष्कर्मो का फल भुगतना ही पड़ाThursday, March 18, 2010 02:13 [IST]

जहांगीर के राज्य में चंदूशाह नाम का एक सेठ था। उसने सिख गुरु अजरुनदेव के समक्ष प्रस्ताव रखा कि वे अपने पुत्र हरगोविंद का विवाह उसकी पुत्री के साथ कर दें। अजरुनदेव ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इस पर वह नाराज हो गया और बदले का अवसर खोजने लगा। चंदूशाह ने जहांगीर का नैकटच्य प्राप्त कर उनके कान भरे कि गुरुग्रंथ साहिब में बहुत-सी बातें इस्लाम के विरुद्ध हैं। जहांगीर ने गुरु...
 
 
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जापानी सैनिकों ने पेश की वीरता की मिसालWednesday, March 17, 2010 01:49 [IST]

चार जून 1944 को ब्रिटेन और अमेरिका की संयुक्त फौज ने रोम पर कब्जा कर लिया। 3 मई 1945 को ब्रिटिश फौजों ने रंगून पर अधिकार जमा लिया। उसके चार दिन बाद जर्मनी ने मित्र राष्ट्रों के समक्ष हथियार डाल दिए, किंतु वीर जापानी अब भी कब्जे में नहीं आ रहे थे। यह देख अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रूमेन के आदेश पर 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराकर उसे तबाह कर दिया गया। इससे जापानी टूट-से गए किंतु कुछ...
 
 
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तूफान की त्रासदी में भी धर्य नहीं खोया उर्मिला नेTuesday, March 16, 2010 01:09 [IST]

यह सच्ची घटना ओडीसा की है। उर्मिला दास अपने छोटे से परिवार पति और दो बच्चों में प्रसन्न थी। वे निर्धन थे किंतु गुजारे लायक कमा लेते थे। कम साधनों में भी पर्याप्त संतुष्टि का भाव उस परिवार में था और इसीलिए वे आनंद से जीवन व्यतीत कर रहे थे। किंतु एक दिन ऐसा आया कि इस परिवार की खुशियों पर ग्रहण लग गया। ओडीसा में उन दिनों भयंकर तूफान आया, जिसने चारों ओर तबाही मचा दी। उर्मिला का गांव भी...
 
 
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माउंटबेटन के जवाब से निरुत्तर हुआ अधिकारीMonday, March 15, 2010 01:46 [IST]

इंग्लैंड में नौसेना के अधिकारियों के चयन के लिए साक्षात्कार चल रहा था। सभी प्रतिभागियों के हृदय में धुकधुकी थी। न जाने क्या प्रश्न पूछे जाएंगे। सभी के चेहरों पर तनाव स्पष्ट रूप से पढ़ा जा सकता था किंतु एक प्रतिभागी अत्यंत शांत भाव से बैठा था। उसके मुख पर आत्मविश्वास की दृढ़ता झलक रही थी। जब उस प्रतिभागी का नाम पुकारा गया तो वह सधे कदमों से साक्षात्कार कक्ष में दाखिल हुआ और...
 
 
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साक्षात मृत्यु भी नसरुद्दीन को डरा नहीं सकीSaturday, March 13, 2010 01:02 [IST]

ईरान के सुल्तान एक बार किसी कारणवश ईरान के एक कबीले कबूदजामा के सरदार नसरुद्दीन से नाराज हो गए। उन्होंने अपने एक अन्य सरदार को हुक्म दिया कि जाओ और उसका सिर काटकर ले आओ। अपने एक संबंधी से नसरुद्दीन को यह समाचार मालूम हुआ। उसके रिश्तेदारों ने उसे तुरंत भाग जाने के लिए कहा तो वह बोला- अगर मेरी मौत मेरे पास आ रही है तो यहां से जाने के बाद वह वहां भी मेरा पीछा करेगी। इसलिए मेरे यहां से...
 
 
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धर्य और साहस ने अंतत: लिंकन को दिलाई जीतThursday, March 11, 2010 01:19 [IST]

एक आदमी लगभग 30 वर्षो तक निराशा से जूझता रहा, असफल होता रहा। बचपन में वह लकड़ी काटता और बाजार में बेचकर अपनी आजीविका चलाता। घर से पंद्रह मील दूर पैदल चलकर पुस्तकें लाता, आग की रोशनी में पढ़ता और समय से लौट आता। घंटों अपनी दुकान पर बैठकर भाषण कला का अभ्यास करता। घोर निर्धनता के बीच उसने वकालत पास की। वह अत्यंत सामान्य वस्त्र पहनकर कोर्ट में बहस करने जाता। सहकर्मियों के व्यंग्य-बाणों...
 
 
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प्राण संकट में डाल उसने लोगों की बचाई जानWednesday, March 10, 2010 07:04 [IST]

जीवन दर्शन एक वर्ष भीषण बारिश हुई। मध्यप्रदेश की एक नदी में बाढ़ आ गई। वहां के सारे गांव और बस्ती खाली हो गए, लेकिन एक स्थान ऐसा था जहां कुछ लोग बाढ़ से तो बच गए, किंतु पानी से घिर गए। उनके चारों ओर पानी ही पानी था। खाने-पीने का कोई सामान नहीं और सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं थी। अब करें तो क्या करें? नदी के किनारे एक झोपड़ी थी जिसमें एक मल्लाह रहता था। उसकी तेरह वर्षीय बालिका थी...
 
 
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एक पुस्तक ने संतरी को बनाया नोबेल विजेताTuesday, March 09, 2010 00:13 [IST]

वर्नर हाइजनबर्ग जब 19 वर्ष के थे, तब वे एक पाठशाला में संतरी की डच्यूटी करते थे। उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी किंतु वे पढ़ने के शौकीन थे। इसलिए इधर-उधर से पुस्तकों की व्यवस्था कर अपना ज्ञानवर्धन किया करते थे। एक दिन पाठशाला में काम के दौरान उन्हें मशहूर दार्शनिक प्लेटो की थिमेथस नामक पुस्तक मिली, जिसमें प्राचीन यूनान के परमाणु संबंधी सिद्धांत दिए हुए थे। इस पुस्तक को...
 
 
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जीवन की छोटी मामूली चीजेंMonday, March 08, 2010 00:16 [IST]

सिस्टर्स के साथ हम ऑस्ट्रेलिया में काम कर रहे थे। वहां पर एक अकेला और उम्रदराज आदमी था। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकती हूं कि किसी ने इतनी मुश्किल और दुखद स्थितियों में रहने वाला व्यक्ति नहीं देखा होगा, जिन स्थितियों में वह रहता था। वह एक गरीब बूढ़ा आदमी था। इतनी बड़ी दुनिया में उस दुखी बूढ़े इंसान को अपना कहने वाला कोई भी सगा नहीं था। मैंने उससे कहा कि मुझे अपना घर साफ करने और अपने...
 
 
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डिकंस ने इच्छाशक्ति की प्रबलता साबित कीSaturday, March 06, 2010 00:19 [IST]

चार्ल्स डिकंस को बचपन से ही लेखक बनने का शौक था। लेकिन पढ़ने के लिए वह स्कूल नहीं जा सके। माता-पिता अत्यंत निर्धन थे। पिता को कर्ज न चुकाने पर जेल की हवा खानी पड़ी। चाल्र्स के सिर पर तो मुसीबत का पहाड़ ही टूट पड़ा। एक दिन उदास बैठे चाल्र्स के पास एक सज्जन आए। वे चाल्र्स के लिखने के शौक से परिचित थे। उन्होंने पूछा क्या सोच रहे हो? क्या किसी लेख की भूमिका तैयार कर रहे हो? चाल्र्स टूटे...
 
 
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जान कुर्बान नहीं करने पर सताता रहा गमFriday, March 05, 2010 01:10 [IST]

डच साम्राज्य ने इंडोनेशिया पर हमला करके उसे अपने साम्राज्य में मिलाने की सोची। वहीं दूसरी ओर इंडोनेशिया के नवयुवकों ने भी तय कर लिया था कि मर मिटेंगे, लेकिन डचों को देश में नहीं आने देंगे। सेना में युवकों की भर्ती होने लगी। एक गुरिल्ला दल बना। दल की पहली टुकड़ी के लिए युवकों का चयन होने लगा। इस पहली टुकड़ी में सुवर्ण मार्तदिनाथ नाम का युवक भी जाना चाहता था। राष्ट्र के लिए बलिदान...
 
 
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बदला लेने की इच्छा जब भलाई में बदल गईThursday, March 04, 2010 00:18 [IST]

एक सेवक अपने स्वामी की हत्या करके दूसरे नगर में भाग गया। स्वयं को छिपाने के लिए उसने कई वेश बदले। अब तक वह भिखारी हो चुका था। इधर उसके स्वामी का पुत्र अब तक युवा हो चुका था। अपने पिता के हत्यारे से बदला लेने की उसकी भावना प्रबल हो उठी। वह हत्यारे को खोजने चल पड़ा। दूसरी ओर हत्यारा भिखारी चलते-चलते एक दिन ऐसी पहाड़ी सड़क पर पहुंचा, जहां से अक्सर लोग गिरकर मर जाते थे। भिखारी ने सोचा...
 
 
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रोगियों की सेवा में उन्होंने जीवन बिता दियाWednesday, March 03, 2010 09:55 [IST]

श्रीधर राव बचपन से ही अत्यंत संवेदनशील थे। कुष्ठ रोगियों की सेवा करने में उन्हें संतुष्टि मिलती थी। वे अल्प आयु में ही ऋषिकेश आ गए और स्वामी शिवानंद के साथ कुष्ठ रोगियों की सेवा करने लगे। क र्नाटक के एक जमींदार परिवार में जन्मे श्रीधर राव बचपन से ही अत्यंत संवेदनशील व्यक्ति थे। कुष्ठ रोगियों को देख उनकी आत्मा कराह उठती। एक दिन उनके मन में विचार आया कि कुष्ठ रोगियों के लिए कुछ...
 
 
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वेश धारण करने से ही कोई साधु नहीं होताWednesday, March 03, 2010 09:48 [IST]

व्यक्ति देह में रहे पर देह का होकर न रहे, बात साधारण है पर गहरे उतरने में सहायक है। इसके लिए सात्विक वृत्ति ही काम आएगी। इसीलिए भारतीय संस्कृति में सोलह संस्कारों की व्यवस्था है। व्यावसायिक लक्ष्यों की पूर्ति में जितना महत्व हमारी शिक्षा और योग्यता का होता है, एक समय बाद उतना ही संस्कारों का भी हो जाता है। आज की पीढ़ी के अधिकांश लोग या तो संस्कारों को जानते ही नहीं या महत्व ही नहीं...
 
 
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दूसरे को ज्यादा पैसे मिलते देख नाराज हुआ मजदूरMonday, March 01, 2010 01:06 [IST]

एक बहुत बड़े ठेकेदार के यहां हजारों मजदूर काम करते थे। एक बार उस क्षेत्र के मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर दी। महीनों हड़ताल चलती रही। नतीजतन मजदूर भूखे मरने लगे और रोजी-रोटी कमाने के लिए दूसरी बस्तियों में चले गए, लेकिन दूसरी बस्तियों के गरीब मजदूर इस बस्ती में आ पहुंचे। ठेकेदार नित्य ही ऐसे लोगों की तलाश में रहता था, जो उसके ठेके का काम पूरा कर सकें। अत: एक दिन वह बस्ती...
 
 
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पेड़ लगाए नाना ने और फल खाए नाती-पोतों नेSaturday, February 27, 2010 01:18 [IST]

बाबू प्रेमनाथ रेलवे के बड़े अधिकारी थे। रेलवे की ओर से उन्हें एक आलीशान बंगला भी मिला हुआ था। बाबू प्रेमनाथ ने वहां कुछ पौधे लगाए। उन्हें बागवानी का शौक था, इसलिए जब भी समय मिलता वे पेड़-पौधों की देखरेख में लग जाते। इस तरह उन्होंने वहां एक छोटा-सा बगीचा बना लिया, जिसमें आम, अनार, पपीता आदि के पेड़ लगे थे। कुछ समय बाद बाबू प्रेमनाथ का अन्यत्र स्थानांतरण हो गया। उन्हें जाने में अभी दो...
 
 
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महावीर की बात सुनकर चरणों में लोट गया दुष्टFriday, February 26, 2010 01:00 [IST]

महावीर स्वामी तपस्या में लीन थे। एक दुष्ट उनके पीछे लग गया। कई बार उसने महावीर स्वामी का अपमान किया, लेकिन वे सदैव शांत ही रहते। उन्होंने तो संसार को प्रेम का पाठ पढ़ाया था। वे कहते थे सदा प्रेम करो, प्रेम में ही परमतत्व छिपा है। जो तुम्हारा अहित करे उसे भी प्रेम करो। उनके इन उपदेशों को सुनकर वह दुष्ट यह देखना चाहता था कि कष्ट देने वालों से कौन और कैसे प्रेम कर सकता है? अत: वह प्राय:...
 
 
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अपंग को देखकर कम हुआ जूते न होने का दुखThursday, February 25, 2010 01:18 [IST]

एक मजदूर था अवतार। बिल्कुल अकेला, न पत्नी, न बच्चे। कभी आवश्यकता होती तो मजदूरी कर लेता। एक बार जेठ की भरी दोपहर में जब उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं था, वह मजदूरी ढूंढ़ने सड़कों पर निकल पड़ा। तभी एक तांगा आकर रुका और उसमें से एक व्यक्ति बाहर आया। अवतार भागकर उधर गया और उस व्यक्ति से पूछा- साहब! मजदूर चाहिए? वे बोले- मुझे महावीर टेकरी तक जाना है, चलोगे? अवतार ने हामी भर दी। महाशय का...
 
 
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जब विदेशी के अपशब्दों को मंत्री ने दुआ कहाWednesday, February 24, 2010 02:14 [IST]

एक विदेशी को अपराधी समझ जब राजा ने फांसी का हुक्म सुनाया तो उसने अपशब्द कहते हुए राजा के विनाश की कामना की। राजा ने अपने मंत्री से, जो कई भाषाओं का जानकार था, पूछा- यह क्या कह रहा है? मंत्री ने विदेशी की गालियां सुन ली थीं, किंतु उसने कहा - महाराज! यह आपको दुआएं देते हुए कह रहा है- आप हजार साल तक जिएं। राजा यह सुनकर बहुत खुश हुआ, लेकिन एक अन्य मंत्री ने जो पहले मंत्री से ईष्र्या रखता था,...
 
 
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रानी की दृढ़ता व साहस से सेना की जीत हुईTuesday, February 23, 2010 00:22 [IST]

मेवाड़ के राजा समरसिंह की मृत्यु का समाचार जब मोहम्मद गौरी को मिला तो वह बहुत प्रसन्न हुआ। समरसिंह का कोई पुत्र नहीं था। अत: उस पर आक्रमण कर उसे अपने अधीन करना अत्यंत सरल था। गोरी ने अपने सेनापति को बुलाकर कहा- सेनापति कुतुबुद्दीन! इस समय मेवाड़ पर रानी राज्य कर रही हैं। तुम फौरन मेवाड़ पर चढ़ाई कर उसे अपने कब्जे में ले लो। कुतुबुद्दीन भी गोरी के इस विचार से पूर्णत: सहमत था। उसने...
 
 
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किनारे बैठकर स्वीकारी उसने लहरों की चुनौतीMonday, February 22, 2010 00:54 [IST]

एक व्यक्ति नित्य ही समुद्र तट पर जाता और वहां घंटों बैठा रहता। आती-जाती लहरों को निरंतर देखता रहता। बीच-बीच में वह कुछ उठाकर समुद्र में फेंकता, फिर आकर अपने स्थान पर बैठ जाता। तट पर आने वाले लोग उसे विक्षिप्त समझते और प्राय: उसका उपहास किया करते थे। कोई उसे ताने कसता तो कोई अपशब्द कहता, किंतु वह मौन रहता और अपना यह प्रतिदिन का क्रम नहीं छोड़ता। एक दिन वह समुद्र तट पर खड़ा तरंगों को...
 
 
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संत की बातें सुनकर क्रूर राजा सुधर गयाSaturday, February 20, 2010 00:32 [IST]

एक अत्यंत निर्दयी और क्रूर राजा था। दूसरों को पीड़ा देने में उसे आनंद आता था। उसका आदेश था कि उसके राज्य में एक अथवा दो आदमियों को फांसी लगनी ही चाहिए। उसके इस व्यवहार से प्रजा बहुत दुखी हो गई थी। एक दिन उस राजा के राज्य के कुछ वरिष्ठजन इस समस्या को लेकर एक प्रसिद्ध संत के पास पहुंचे और बोले- महाराज! हमारी रक्षा कीजिए। यदि राजा का यह क्रम जारी रहा तो नगर खाली हो जाएगा। संत भी काफी...
 
 
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जब शिव और नारायण के भक्त झगड़ पड़ेFriday, February 19, 2010 01:10 [IST]

एक गांव में लक्ष्मीनारायण का मंदिर था। उसके दूसरी ओर ही शिवालय था। इन मंदिरों के बाहर एक वृद्धा फूल बेचती थी। एक दिन वृद्धा के पास फूल कम पड़ गए। तभी वहां एक शिवभक्त आया और फूल मांगने लगा। उसी समय एक नारायण भक्त ने भी फूलों की मांग की। वह वृद्धा बोली- मैं फूल किसे दूं। मेरे पास दोनों को देने लायक फूल तो हैं नहीं। इस पर शिवभक्त बोला- तू मुझे फूल दे। भगवान महादेव को फूलों की अधिक जरूरत...
 
 
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झोपड़ी में रह जनसेवा का संदेश दिया चाणक्य नेThursday, February 18, 2010 00:11 [IST]

एक बार यूनान का राजदूत भारत आया। उसने मौर्य साम्राज्य के महामंत्री चाणक्य की प्रशंसा प्रत्येक व्यक्ति के मुख से सुनी। वह चाणक्य से मिलने के लिए उत्सुक हो उठा। राजदूत चाणक्य से मिलने उनके निवास स्थान गंगा के किनारे चल दिया। वहां पहुंचकर उसने देखा कि गंगा के तट पर ऊंचा, लंबा, दृढ़ व्यक्तित्व का धनी एक पुरुष नहा रहा था। जब वह नहाकर अपने वस्त्र धोने लगा तो राजदूत ने उसके पास जाकर पूछा-...
 
 
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सकारात्मक सोच वाला खुश होकर नाचने लगाWednesday, February 17, 2010 00:21 [IST]

एक दिन वन में गुजरते हुए नारदजी ने देखा कि एक मनुष्य ध्यान में इतना मग्न है कि उसके शरीर के चारों ओर दीमक का ढेर लग गया है। नारदजी को देखकर उसने उन्हें प्रणाम किया और पूछा -प्रभु! आप कहां जा रहे हैं? नारदजी ने उत्तर दिया- मैं बैकुंठ जा रहा हूं। तब उस व्यक्ति ने नारदजी से निवेदन किया- आप भगवान से पूछकर आएं कि मैं कब मुक्ति प्राप्त करूंगा? नारदजी ने स्वीकृति दे दी। थोड़ा आगे जाने पर नारदजी...
 
 
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जब चीन के सम्राट खुद विद्रोहियों के बीच पहुंचेTuesday, February 16, 2010 00:41 [IST]

चीन के सम्राट के खिलाफ विद्रोहियों ने जंग छेड़ दी। सम्राट स्वयं जाकर विद्रोहियों से मिले। विद्रोह का कारण अफसरों द्वारा उनकी सुविधाओं की अनदेखी थी, सम्राट ने उन्हें समझाकर शांत किया। एक बार चीन के सम्राट के विरुद्ध एक प्रांत में विद्रोह उठ खड़ा हुआ। विद्रोहियों की इस हरकत पर सम्राट को बहुत क्रोध आया। उसके सेनापति और मंत्रियों ने सलाह दी महाराज! इन विद्रोहियों को कड़ा दंड दिया...
 
 
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नेताजी के माफी मांगते ही चुप हो गई जनताMonday, February 15, 2010 00:33 [IST]

उस दिन गांव में जैसे मेला लगा था। राजधानी से एक नेता भाषण देने आ रहे थे। आसपास के गांवों से भी लोग बैलगाड़ियों, तांगों और साइकिलों पर बैठकर आ रहे थे। शाम होते-होते पंडाल खचाखच भर गया। लोग भाषण सुनने के लिए जहां-तहां बैठ गए। नेताजी अभी तक नहीं आए थे, इसलिए सभी अपने सुख-दुख की बातें कर रहे थे। थोड़ी देर बाद ही नेताजी आए। नेताजी के साथ उनके सहायक भी मंच पर आकर बैठ गए। नेताजी ने भाषण देना...
 
 
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दुकानदार पर वह अच्छा प्रभाव नहीं छोड़ पायाSaturday, February 13, 2010 00:30 [IST]

एक दुकानदार को नौकर की सख्त जरूरत थी। उसने अपने मिलने-जुलने वालों से कह रखा था कि कोई पढ़ा-लिखा, ईमानदार आदमी मिल जाए तो बताना, क्योंकि मैं अकेला हूं। जब कभी बाहर सामान लेने जाता हूं या किसी अन्य काम से यहां-वहां जाता हूं तो मुझे दुकान बंद ही करनी पड़ती है। कहते हैं ग्राहक और मौत का क्या ठिकाना? कब आए और लौट जाए। कुछ दिनों बाद ही दुकानदार का एक मित्र एक युवक को साथ लेकर उस दुकान पर...
 
 
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शर्त न मानने पर श्रुतायुध को भुगतना पड़ा नतीजाFriday, February 12, 2010 00:10 [IST]

श्रुतायुध के पास भगवान शंकर के वरदान से प्राप्त एक अमोघ गदा थी। इसके पीछे एक कथा यह थी कि श्रुतायुध के तप से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने उपहार स्वरूप यह वरदान उसे इस शर्त पर दिया था कि वह कभी भी उस गदा का अनीतिपूर्वक उपयोग न करे। यदि वह नीति के विरुद्ध आचरण करेगा तो लौटकर वह उसका ही विनाश कर देगी। महाभारत युद्ध में श्रुतायुध को अजरुन से लड़ना पड़ा। युद्ध प्रबल वेग से होने लगा और दोनों...
 
 
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जब पैरिक्लीज ने गुरु से सीखा पुरुषार्थ का पाठThursday, February 11, 2010 00:23 [IST]

यूनान में एक सम्राट हुआ था पैरिक्लीज। सुकरात और प्लेटो जैसे दार्शनिक, सोफोक्लीज और यूरिपडीज जैसे नाटककार, हिरोडोटस जैसे इतिहासकार पैरिक्लीज के शासनकाल में हुए थे। इस सम्राट ने यूनान को ही नहीं, बल्कि आसपास के कई राष्ट्रों को सशक्त बनाया। वह बचपन से ही पुरुषार्थी था। जब वह सिंहासन पर बैठा तो अपने गुरु अनाक्ज गोरस के पास आशीर्वाद लेने गया। गुरु ने आशीर्वाद देते हुए पूछा- तुम्हें...
 
 
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सम्राट अकबर ने श्रीपति को ढेरों पुरस्कार दिएWednesday, February 10, 2010 00:42 [IST]

अकबर के दरबार में श्रीपति नाम का कवि था। दूसरे दरबारी अकबर की प्रशंसा करते थे, जबकि वह श्रीराम का ही गुणगान करता था। फिर भी अकबर उसे पुरस्कार देते थे। इससे दरबारी उससे जलने लगे थे। सम्राट अकबर के दरबार में कई कवि, संगीतज्ञ और विद्वान थे लेकिन ब्रज के कवि श्रीपति का उनमें विशेष स्थान था। अन्य सभी कवि सदा अकबर का ही गुणगान करते थे किंतु श्रीपति राम और कृष्ण के अतिरिक्त और किसी का...
 
 
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सैनिक ने पत्नी के गले पर रख दिया खंजरTuesday, February 09, 2010 00:38 [IST]

एक युवा सैनिक का विवाह हुआ तो वह अपनी पत्नी को लेकर समुद्र यात्रा पर निकल पड़ा। चूंकि नौसैनिक अफसर अपनी कार्य प्रकृति के कारण निर्भय और साहसी था, इसलिए उसे इस यात्रा में आनंद आ रहा था, किंतु उसकी पत्नी के लिए यह पहली जल यात्रा थी, इसलिए वह भयभीत थी। वह अपने पति से देश लौट चलने का आग्रह करती तो सैनिक अधिकारी कह देता- तुम इतनी चिंतित क्यों होती हो? पत्नी भयभीत होकर बोली- कभी तूफान आ गया...
 
 
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बालक की दूरदर्शिता से चकित रह गए गांव वालेMonday, February 08, 2010 00:29 [IST]

एक बार एक गांव में सूखा पड़ा। सारे तालाब और कुएं सूख गए। तब लोगों ने एक सभा की। उस सभा में सभी ने एक स्वर में तय किया कि गांव के बाहर जो शिवजी का मंदिर है, वहां चलकर भगवान से वर्षा करने के लिए सामूहिक प्रार्थना करें। अगले दिन सुबह होते ही गांव के सभी लोग शिवालय की ओर चल दिए। बच्चे, बूढ़े, स्त्री, पुरुष सभी जोश से भरे हुए जा रहे थे। इन सभी में एक बालक ऐसा था, जो हाथ में छाता लेकर चल रहा था। सभी...
 
 
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जल प्रवाहों ने आपस में बांटे अपने दुख व सुखSaturday, February 06, 2010 00:18 [IST]

कदीशा की घाटी में, जिसमें होकर एक वेगवती नदी बहती थी, दो छोटे-छोटे जल प्रवाह आ मिले और परस्पर बातचीत करने लगे। एक जल प्रवाह ने पूछा- मेरे मित्र! तुम्हारा कैसे आना हुआ, रास्ता ठीक था न? दूसरे ने उत्तर दिया- रास्ते की न पूछो बड़ा ही बीहड़ था। पनचक्की का चक्र टूट गया था और उसका संचालक, जो मेरी धारा को अपने पौधों व वृक्षों की ओर ले जाता था, चल बसा। उसके जाने से मैं तो अकेला ही रह गया। बड़ी...
 
 
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संत तुकोजी की बातों से शिष्य का मन शांत हुआFriday, February 05, 2010 01:32 [IST]

संत तुकोजी महाराज अपने प्रिय शिष्यों के साथ भजन-कीर्तन में मग्न रहा करते थे। सभी के प्रति सद्भावना और शुभ चिंतन ही उनका धर्म था। एक बार उनके प्रति आस्था रखने वाले एक व्यक्ति ने अपनी दुकान का नाम गुरुदेव सैलून रख दिया। संतजी के एक अन्य शिष्य रामचंद्र ने जब यह सुना तो वह क्रोधित हो उठा। संतजी के सामने ही वह बड़बड़ाते हुए बोला- यह तो आपका अपमान है। मैं उसके सैलून में आग लगा दूंगा।...
 
 
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जब बुराई का साथ देने पर शिक्षक ने पिटाई कीThursday, February 04, 2010 00:59 [IST]

परीक्षा भवन में परीक्षा चल रही थी। सभी विद्यार्थी प्रश्नपत्र हल करने में लगे हुए थे। ईश्वर पढ़ने में सदा से ही अव्वल रहा था, इसलिए वह लगन व शांति से अपना प्रश्नपत्र हल कर रहा था। उसके पीछे बैठा उसका मित्र मनीष, जो पढ़ने में बेहद आलसी था, बहुत देर से ईश्वर का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहा था। उस दिन गणित की परीक्षा थी। सभी प्रश्न हल करने के बाद ईश्वर ने संतोष की सांस ली। मनीष ने...
 
 
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हर्ष और शोक को लेकर शिकारियों में हुआ विवादWednesday, February 03, 2010 00:16 [IST]

बसंत ऋतु में एक दिन एक झील के तट पर हर्ष और शोक मिले। अभिवादन के पश्चात वे दोनों जलाशय के पास बैठकर बातें करने लगे। हर्ष पृथ्वी की सुषमा का, पर्वत और वन्य जीवन के नित्य प्रति चमत्कारों का और प्रभात तथा संध्याकालीन संगीत का वर्णन करने लगा। शोक ने भी उसके साथ सहमति प्रकट की क्योंकि शोक समय के आकर्षण और उसके सौंदर्य से परिचित था। इस प्रकार हर्ष और शोक काफी समय तक परस्पर वार्तालाप करते...
 
 
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उसने बच्चें को चने का एक दाना भी नहीं दियाTuesday, February 02, 2010 00:37 [IST]

एक स्त्री की कोई संतान नहीं थी, इसलिए वह बहुत दुखी रहती थी। जिसने जो उपाय बताया उसने वह किया, पर कोई लाभ नहीं हुआ। किसी ने उसे संत चिदंबर दीक्षित का पता दिया और कहा-वहां जा, जो मांगेगी, मिलेगा। संत चिदंबर पहुंचे हुए संत थे। वह स्त्री संत चिदंबर के पास जा पहुंची। उस समय उनके यहां भक्तों की भीड़ लगी थी। संत ने उस स्त्री को मुट्ठीभर भुने हुए चने दिए और कहा- सामने पेड़ के नीचे बैठकर ये चने...
 
 
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बंद डिबिया में से जीवित निकल आया कीड़ाMonday, February 01, 2010 00:35 [IST]

एक राजा को यह अभिमान था कि वही अपने राज्य के सभी प्राणियों का भरण-पोषण करता है। लोग विष्णु को व्यर्थ ही जगत का पालक कहते हैं। किसने देखा है भगवान को? प्रत्यक्ष सत्य तो यही है कि मैं ही अपनी प्रजा को पालता हूं। एक समय की बात है एक योगी उसके राज्य में आया और नगर के बाहर ही एक पेड़ के नीचे आसन जमाकर बैठ गया। धीरे-धीरे योगी विख्यात हो गया और उसके पास लोगों की भीड़ लगने लगी। राजा ने यह सब सुना...
 
 
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संयम पाने पर यूसुफ को मिली दीक्षाSaturday, January 30, 2010 01:12 [IST]

मिस्र के प्रसिद्ध संत जुन्नून के पास एक शिष्य दीक्षा लेने आया, किंतु चार वर्ष वहां रहकर भी वह जुन्नून से यह नहीं कह सका कि मैं धर्म की दीक्षा लेने आया हूं। एक दिन संत ने उससे पूछा- क्या चाहते हो? तब युवक यूसुफ हुसैन ने कहा- मैं आपका शिष्य बनकर धर्म की दीक्षा लेना चाहता हूं। संत ने कहा- वह तो हो जाएगा, पहले तुम्हें मेरा एक काम करना होगा। मेरा एक बक्सा मेरे मित्र के पास नील नदी के किनारे तक...
 
 
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लालच ने दोनों मित्रों की बरसों की दोस्ती तोड़ दीFriday, January 29, 2010 00:27 [IST]

दो बचपन के मित्र थे। वयस्क होने पर उन दोनों ने मिलकर व्यापार शुरू किया। व्यापार चल निकला। दोनों का प्रेम और आपसदारी देख हर कोई हैरान रह जाता था। दोनों के परिवारों में भी घनिष्ठता थी। किंतु एक दिन एक घटना ऐसी हुई, जो इन दोनों की मित्रता की नींव हिला गई। हुआ यूं कि एक फेरीवाला आमों का एक टोकरा दुकान पर दे गया। दुकान पर बैठे मित्र ने टोकरा लेकर रख लिया। कुछ देर बाद उसे भोजन हेतु घर जाना...
 
 
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भटकते दार्शनिक को साधु ने दी सही दिशाThursday, January 28, 2010 00:59 [IST]

एक दार्शनिक ने पढ़ा- वास्तव में सौंदर्य ही विश्व की सबसे बड़ी विभूति है। भक्ति, ज्ञान, कर्म और उपासना आदि परमात्मा को पाने के तुच्छ मार्ग हैं। सही मार्ग तो सौंदर्य ही है। पर्वतों की रम्य कंदराओं और नदियों के सुहावने संगम पर साधक परम तत्व को प्राप्त कर सकता है। यह पढ़कर वह दार्शनिक सौंदर्य की खोज में निकल पड़ा। उसका अपना घर रेगिस्तान में था। अत: उसे अपने घर के प्रति रुचि नहीं रही।...
 
 
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एकता और विश्वास से मजबूत होता है गणतंत्रTuesday, January 26, 2010 01:50 [IST]

भारत में गणतंत्र की व्यवस्था प्राचीनकाल से प्रचलित रही है। तब देश में कई गणराज्य थे, जो अपनी गणतांत्रिक व्यवस्था के कारण अत्यंत मान्य थे। ऐसी गणतंत्रीय व्यवस्था में वृश्णि संघ अत्यंत सुगठित और सुप्रसिद्ध गणराज्य था। इसके नेता भगवान श्रीकृष्ण थे। इसके अलावा भी अनेक गणराज्यों की चर्चा बौद्ध साहित्य में प्राप्त होती है। महात्मा बुद्ध के समय लिच्छवी गणराज्य काफी प्रतिष्ठित...
 
 
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भिखारी को हुआ अपने अंदर के मनुष्य का बोधMonday, January 25, 2010 00:29 [IST]

खलीफा हारूं अल रशीद बहुत ही परोपकारी व्यक्ति थे। संत प्रवृत्ति के साथ वे लोकहित की भावना से परिपूर्ण थे। दीन की सहायता करना वे अपना कर्तव्य मानते थे। प्राय: दु:खी व निर्धन लोग उनके पास आकर सहायता प्राप्त करते थे। एक बार एक भिखारी आया और बोला, ‘खुदा के नाम पर मुझे कुछ भीख दीजिए।’ खलीफा ने उससे कहा, ‘खुदा के बंदे, खुदा के नाम पर सिर्फ भीख मांग रहा है। खुदा तो बहुत बड़ा दाता है। उससे और...
 
 
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सुंदर सींगों के कारण ही मारा गया बारहसिंगाSaturday, January 23, 2010 00:29 [IST]

एक बारहसिंगा झील में पानी पीने पहुंचा। वह जल में अपनी परछाई को देखकर बहुत प्रसन्न हुआ और कहने लगा- ओह! भगवान ने मेरा शरीर कितना सुंदर बनाया है। सिर तो मानो सांचे में ही ढाल दिया है। उस पर ये लंबे-लंबे फैले हुए सींग कितने मनोहर जान पड़ते हैं। भला ईश्वर ने इतने प्यारे व मजबूत सींग और किस पशु को दिए हैं। यह कहते-कहते बारहसिंगा की दृष्टि अपने पैरों पर पड़ी। वह दुखी हो उठा और कहने लगा-...
 
 
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इतिहास में अमर हो गए डॉ. जानुस कोरजाकFriday, January 22, 2010 00:18 [IST]

वर्ष 1979 को अंतरराष्ट्रीय बाल वर्ष के रूप में मनाया गया और इसी वर्ष बाल शिक्षा और बाल कल्याण के लिए अपना जीवन और प्राण समर्पित कर देने वाले पोलैंड के डॉ. जानुस कोरजाक की जन्म शताब्दी भी मनाई गई। डॉ. कोरजाक पोलैंड की राजधानी वारसा में एक अनाथालय के निदेशक थे। अनाथालय के दो सौ बच्चों को उन्होंने अपनी संतान से अधिक स्नेह दिया और अवसर आने पर उनके साथ ही मृत्यु को भी स्वीकार किया। हुआ यूं...
 
 
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पतंजलि ने शिष्य को पढ़ाया संयम का पाठThursday, January 21, 2010 01:18 [IST]

सम्राट पुष्पमित्र ने अश्वमेघ यज्ञ का आयोजन किया। पूर्णाहुति होने के पश्चात रात्रि में नृत्य का भी आयोजन हुआ। यज्ञ के ब्रrार्षि पतंजलि भी इस नृत्य-उत्सव में शामिल हुए। उनके साथ उनका शिष्य चैत्र भी था। आज तक चैत्र ने गुरु के मुख से योग तथा संयम पर उपदेश ही सुने थे और आज ऐसी सद्शिक्षा देने वाले गुरु स्वयं ही नृत्य के उत्सव में हिस्सा ले रहे हैं। यह देखकर चैत्र के मन में गुरु के प्रति...
 
 
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डाल ने पेड़ की टहनी के संग मनाया बसंतWednesday, January 20, 2010 01:06 [IST]

एक कुसुमित डाल ने अपने पड़ोस की टहनी से कहा- आज का दिन तो बिल्कुल नीरस लग रहा है। क्या तुम्हें भी ऐसा ही महसूस हो रहा है? उस टहनी ने उत्तर दिया- नि:संदेह यही बात मुझे भी लग रही है। उसी समय उस टहनी पर एक चिरौटा आ बैठा और उसके निकट ही एक दूसरा चिरौटा भी आ गया। पहले चिरौटे ने चहचहाते हुए कहा- आज मेरी पत्नी मुझे छोड़कर चली गई। मैं भी उसको मनाने नहीं जाने वाला। दूसरे चिरौटे ने भी जरा जोर से कहा-...
 
 
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मुर्गे को खाने के लालच में सियार ने गंवाई जानTuesday, January 19, 2010 00:46 [IST]

एक कुत्ते और मुर्गे में बड़ी दोस्ती थी। एक दिन दोनों घूमते-फिरते जंगल में जा पहुंचे। धीरे-धीरे रात होने लगी। मुर्गे ने घबराकर कहा- अब क्या करें? रात में तो घर पहुंचना मुश्किल है। कुत्ते ने उसे समझाया- घबराने की कोई जरूरत नहीं है। तुम फुर्र से उस डाल पर जा बैठो और मजे से रात बिताओ। मैं भी इसी पेड़ के नीचे डेरा डाल लेता हूं। जब सुबह होगी तो साथ चलेंगे। दोनों सो गए और आराम से रात गुजरी।...
 
 
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जब भिखारी बना दाता और राजा बना याचकMonday, January 18, 2010 00:28 [IST]

एक भिखारी भीख मांगने निकला। उसका सोचना था कि जो कुछ भी मिल जाए, उस पर अधिकार कर लेना चाहिए। एक दिन वह राजपथ पर बढ़ा जा रहा था। एक घर से उसे कुछ अनाज मिला। वह आगे बढ़ा और मुख्य मार्ग पर आ गया। अचानक उसने देखा कि नगर का राजा रथ पर सवार होकर उस ओर आ रहा है। वह सवारी देखने के लिए खड़ा हो गया, लेकिन यह क्या? राजा की सवारी उसके पास आकर रुक गई। राजा रथ से उतरा और भिखारी के सामने हाथ पसारकर बोला-...
 
 
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जब औरंगजेब दुर्गादास के प्रति श्रद्धा से भर गयाSaturday, January 16, 2010 00:31 [IST]

जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह की मृत्यु के बाद बादशाह औरंगजेब जोधपुर को हड़पना चाहता था लेकिन जसवंत सिंह के मंत्री दुर्गादास राठौर ने औरंगजेब की कोई भी चाल कामयाब नहीं होने दी। जसवंत सिंह के पुत्र राजकुमार अजीत सिंह को जोधपुर की गद्दी पर बिठाने के लिए दुर्गादास ने मुगल सेना से डटकर युद्ध किया। दुर्गादास ने भी कभी हार नहीं मानी। युद्ध के दौरान वे घोड़े की पीठ पर बैठकर ही खाना खा...
 
 
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सैनिक ने आखिरकार बचा ही लिया किलाFriday, January 15, 2010 02:50 [IST]

शिवाजी के किले को मुगल सेना ने घेर लिया और उसे बारूद और गोले से उड़ाने की कोशिश करने लगे। लेकिन मराठा सेना के एक सैनिक ने अपनी बहादुरी से मुगल सेना की साजिश को नाकाम कर दिया। शिवाजी के एक किले को मुगल सेना ने घेर लिया। मराठा सैनिक किले के भीतर बंद हो गए। मुगलों ने बहुत प्रयास किए कि मराठा सैनिक आत्मसमर्पण कर दें किंतु सैनिकों ने ऐसा नहीं किया। तंग आकर मुगलों ने किले की एक दीवार को...
 
 
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जब बटोही को भुगतना पड़ा लालच का फलThursday, January 14, 2010 00:21 [IST]

दो बटोही कहीं जा रहे थे। उन्हें रास्ते में सोने की एक कुल्हाड़ी दिखाई दी। एक राहगीर ने लपककर उसे उठा लिया और कहा- अहा! मेरा भाग्य जाग उठा। मुझे यह सोने की कुल्हाड़ी मिल गई। अब चैन की बंसी बजाऊंगा। यह सुनकर दूसरा बटोही बोला- तुम यह क्यों कहते हो भाई कि कुल्हाड़ी ‘मुझे’ मिली है। यह क्यों नहीं कहते कि कुल्हाड़ी ‘हमें’ मिली है? जब हमने एक साथ ही इसे देखा है? पहले बटोही ने कहा- कुल्हाड़ी...
 
 
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गधे ने अपनी समझदारी से बाघ को धूल चटाईWednesday, January 13, 2010 00:34 [IST]

एक गधा मैदान में हरी-हरी कोमल दूब चर रहा था। अचानक उसने सिर उठाया तो एक बाघ को अपनी ओर आते देखा। अपने और बाघ के बीच की कम दूरी के मद्देनजर गधे को समझ आ गया कि अब प्राण बचाकर भागना तो असंभव है क्योंकि बाघ एक ही छलांग में काम तमाम कर देगा।फिर क्या करें? यूं ही प्राण खोने से तो बेहतर है कि बुद्धि से बल को पराजित करें। यह सोचते हुए गधे ने युक्ति से काम लिया। उसने पिछले पैर से लंगड़ा-लंगड़ाकर...
 
 
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वह अपाहिज फिर हवाबाजी करने लगाTuesday, January 12, 2010 00:37 [IST]

ओश्चेव रूस का एक प्रसिद्ध हवाबाज था। उसके मित्र तथा अधिकारी उसके करतब देखकर दांतों तले अंगुली दबा लेते थे। ओश्चेव को स्वयं पर और ईश्वर पर अटूट विश्वास और श्रद्धा थी। वह मानता था कि उस महान सत्ता का एक पूर्ण अंश उसके भीतर विद्यमान है और उसके बल पर वह बहुत कुछ कर सकता है। एक बार दुश्मनों से टक्कर लेते हुए उसके हवाई जहाज का इंजन खराब हो गया और वह एक छोटी-सी पहाड़ी से टकरा गया। ओश्चेव...
 
 
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मुफ्त अनारों की कीमत नहीं समझीMonday, January 11, 2010 02:07 [IST]

एक समय की बात है। एक शहर में एक धनी आदमी रहता था। उसकी लंबी-चौड़ी खेती-बाड़ी थी और वह कई तरह के व्यापार करता था। बड़े विशाल क्षेत्र में उसके बगीचे फैले हुए थे, जहां पर भांति-भांति के फल लगते थे। उसके कई बगीचों में अनार के पेड़ बहुतायत में थे, जो दक्ष मालियों की देख-रेख में दिन दूनी और रात चौगुनी गति से फल-फूल रहे थे। उस व्यक्ति के पास अपार संपदा थी, किंतु उसका हृदय संकुचित न होकर अति...
 
 
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सत्संग ने बना दिया चोर को साधुSaturday, January 09, 2010 00:17 [IST]

एक बार अवंतिपुर में साधु कोटिकर्ण आए। उन दिनों उनके नाम की धूम थी। उनका सत्संग पाने दूर-दूर से लोग आते थे। उस नगर में रहने वाली कलावती भी सत्संग में जाती थी। कलावती के पास अपार संपत्ति थी। उसके रात्रि सत्संग की बात जब नगर के चोरों को मालूम हुई तो उन्होंने उसके घर सेंध लगाने की योजना बनाई। एक रात जब कलावती सत्संग में चली गई, तब चोर उसके घर आए। घर पर दासी अकेली थी। जब दासी को पता चला कि...
 
 
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जब बालक ने जीता बुजुर्ग का दिलFriday, January 08, 2010 00:49 [IST]

नेपल्स में रहने वाले एक तेरह वर्षीय बालक रॉबर्ट हिल ने एक दिन एरिका एंडरसन की पुस्तक अल्बर्ट श्वाइत्जर की दुनिया पढ़ी तो उसे ज्ञात हुआ कि धर्मशास्त्र के प्राध्यापक और महान संगीतकार डॉ. अल्बर्ट श्वाइत्जर ने सब कुछ त्यागकर अफ्रीका के जंगलों में एक अस्पताल खोला और अपना समस्त जीवन अश्वेत अफ्रीकियों की सेवा में बिता दिया। यह पढ़कर उसके मन में भी कुछ मानवोपयोगी कार्य करने की इच्छा...
 
 
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दार्शनिकों को मिली अजनबी से सीखThursday, January 07, 2010 00:20 [IST]

एक हजार वर्ष पूर्व की बात है, लेबनान में दो दार्शनिक आपस में मिले। एक ने दूसरे से पूछा- तुम कहां जा रहे हो? दूसरे ने उत्तर दिया- मैं तो यौवन के निर्झर की तलाश में जा रहा हूं। मेरे ध्यान में इन्हीं में से किन्हीं पहाड़ियों के बीच उसका स्रोत प्रस्फुटित होता है। मुझे कुछ ऐसे लिखित प्रमाण मिले हैं, जो उसका उद्गम पूर्व की ओर बताते हैं, किंतु तुम क्या खोज रहे हो? पहले ने कहा- मैं तो मृत्यु के...
 
 
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सच्चे धर्म की कसौटी है नि:स्वार्थताWednesday, January 06, 2010 06:34 [IST]

जीवन दर्शन. नगर सेठ ने इतना धन कमाया कि उन्हें धन और वैभव से विरक्ति हो गई। उन्होंने सोचा कि अपना शेष जीवन भगवान के ध्यान में लगाऊं और किसी प्रकार से मुक्त हो जाऊं। यह विचार कर उन्होंने नगर के प्रसिद्ध पंडित जयराम को बुलाया और कहा- महाराज मैं भागवत सप्ताह रखकर भागवत कथा सुनना चाहता हूं। पंडितजी बोले- मैं शुभ समय देखकर यह कार्य संपन्न कर देता हूं। पंडितजी नगर सेठ से भारी दक्षिणा पाने...
 
 
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साधिका ने बताया समदृष्टि का महत्वTuesday, January 05, 2010 00:13 [IST]

लल्लेश्वरी कश्मीरी भाषा की प्रथम कवयित्री हुई हैं। वह भगवान शिव की परम भक्त थीं। शिव की भक्ति में सब कुछ भूलकर वे गली-गली दीवानों की तरह घूमा करती थीं। संसारी लोग उनकी भक्ति-भावना की गहराई को समझते नहीं थे और उन्हें पागल समझकर छेड़ा करते थे। कई लोग उनकी निंदा करते। बच्चे उन्हें पत्थर भी मारते, किंतु वे इन सभी बातों से परे भगवान के ध्यान में मस्त रहती थीं। उन्हें संपूर्ण विश्व...
 
 
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जब महंगी पालकी पर सवार हुई वीणाMonday, January 04, 2010 00:17 [IST]

स्वर्गीय श्री शेषण्णा महान वीणा वादक थे। वे मैसूर के सम्मानित कलाकार थे। उनका जीवन यश और धन दोनों ही दृष्टियों से संपन्न था किंतु इसके बावजूद अहंकार उन्हें छू भी न पाया था। स्वयं महाराजा मैसूर उनके बहुत बड़े प्रशंसक थे। जब भी श्री शेषण्णा से पूछा जाता कि वे इतनी मुधर वीणा कैसे बजा लेते हैं तो उनका जवाब होता-मैं कहां बजा पाता हूं वीणा, बस तारों को छेड़ भर लेता हूं। और मैं ही क्या, सभी...
 
 
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मनुष्य का सिर लेने को कोई तैयार नहीं हुआSaturday, January 02, 2010 00:44 [IST]

एक बार सम्राट अशोक अपने रथ पर सवार हो मंत्री के साथ कहीं जा रहे थे। कुछ दूर जाने पर एक भिखारी दिखाई दिया। सम्राट ने रथ रुकवाया और भिखारी के चरणों में अपना शीश झुकाया, फिर आगे बढ़ गए। मंत्री को सम्राट का यह कार्य अच्छा नहीं लगा। उसने कहा- महाराज इतने बड़े सम्राट का साधारण से भिखारी के चरणों में शीश झुकाना क्या शोभा देता है? सम्राट अशोक बोले- इसका उत्तर मैं तुम्हें कल दूंगा। अगले दिन...
 
 
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अर्जुन की भांति अपने लक्ष्य पर टिके रहेंFriday, January 01, 2010 03:46 [IST]

जीवन दर्शन. एक दिन शहर से दो व्यक्ति गांव की ओर रवाना हुए। परस्पर बातचीत करते हुए उनका रास्ता कटने लगा। आगे चलकर वे दोनों एक नदी के तट पर जा पहुंचे, किंतु उसे पार करने के लिए कोई पुल नहीं था। अब उनके पास तैरने के सिवाय कोई और चारा नहीं था। उन्होंने आपस में कहा- चलो तैर चलें, आखिर नदी कोई बहुत चौड़ी तो है नहीं। दोनों पानी में कूद पड़े और तैरने लगे। उनमें से एक आदमी जो तैरना जानता था, साहस...
 
 
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मकड़ी ने राजा को दिया जीतने का सबकThursday, December 31, 2009 00:49 [IST]

इस बार राजा पूरी तैयारी से शत्रु सेना पर टूट पड़ा। घमासान युद्ध हुआ। राजा और उसके सैनिक बहुत ही वीरता से लड़े, किंतु सातवीं बार भी हार गए। राजा को अपने प्राणों के लाले पड़ गए। वह अपनी जान बचाकर भागा। भागते-भागते घने जंगल में पहुंच गया और एक स्थान पर बैठकर सोचने लगा कि सात बार हार चुकने के बाद अब तो शत्रु से अपना राज्य पुन: प्राप्त करने की कोई आशा ही नहीं रह गई है। अब मैं इसी जंगल में...
 
 
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जब महाकवि माघ ने निर्धन को दिए कंगनWednesday, December 30, 2009 00:51 [IST]

संस्कृत के महाकवि माघ पर सरस्वती और लक्ष्मी दोनों की एक समान कृपा थी। शिशुपाल वध जैसी उत्कृष्ट रचना के रचयिता माघ धनी होने के साथ उदार मन भी थे। जो उनके द्वार आता वह खाली नहीं जाता था। दान देते-देते माघ का सारा धन समाप्त हो गया और वे अति निर्धन हो गए। एक दिन वे इसी स्थिति में अपने घर पर बैठे हुए अपने एक काव्य का नवसर्ग लिख रहे थे, तभी एक निर्धन ब्राrाण उनके पास आया और बोला- कविराज! आपका...
 
 
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मदद न करने पर घोड़े को पछताना पड़ाTuesday, December 29, 2009 00:25 [IST]

एक व्यापारी के पास एक घोड़ा और एक गधा था। वह स्वयं घोड़े पर चढ़ता और गधे पर बोझ लादकर गांव-गांव माल बेचता था। घोड़ा चूंकि उसने ऊंचे दाम देकर खरीदा था, इसलिए उस पर वह बोझ नहीं लादता था और उसका अधिक ख्याल रखता था। एक दिन व्यापारी घोड़े पर चढ़कर और गधे पर बोझ लादकर किसी गांव की ओर जा रहा था। गधा बेचारा अत्यंत दुर्बल था, दूसरा उस पर क्षमता से अधिक बोझ लाद दिया गया था। रास्ता भी ऊबड़-खाबड़...
 
 
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सुनो सबकी पर सत्य की परीक्षा स्वयं करोMonday, December 28, 2009 00:20 [IST]

सड़क पर चलते हुए एक पथिक की भेंट पास के गांव में रहने वाले एक आदमी से हुई। पथिक ने विस्तृत क्षेत्र की ओर संकेत करते हुए उससे पूछा- यह वही युद्धक्षेत्र है न, जहां सम्राट आलम अपने शत्रुओं पर विजयी हुआ था? उस आदमी ने उत्तर दिया- नहीं, यह कभी युद्धक्षेत्र नहीं रहा। यहां पर तो जाद नाम का एक बड़ा शहर था, जो जलाकर खाक कर दिया गया। इसीलिए अब यह बड़ी उपजाऊ भूमि है। पथिक आगे बढ़ गया। वह आधा मील भी...
 
 
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प्रजा की खातिर संत ने त्याग दिए अपने प्राणSaturday, December 26, 2009 00:46 [IST]

एक बार श्रावस्ती के राजा विड्डभ ने कपिलवस्तु पर अचानक आक्रमण कर दिया। कपिलवस्तु की सेना को तैयारी का अवसर ही नहीं मिला और राजा को राज्य छोड़कर भागना पड़ा। राजधानी में घुसकर राजा विड्डभ और उसके सैनिकों ने लूटपाट आरंभ कर दी। प्रजा त्राहि-त्राहि कर उठी। उस समय कपिलवस्तु में संत महानाम रहते थे। उनसे प्रजा का दुख देखा नहीं गया। विड्डभ उनका शिष्य रह चुका था। अत: वे राजा विड्डभ के पास...
 
 
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विदेह नरेश पर क्रोधित हो उठे जब गांधार नरेशFriday, December 25, 2009 02:33 [IST]

गांधार व विदेह नरेश भिक्षु बन गए। भिक्षुकों को नमक का सेवन निषेध था। पर विदेह नरेश ने नमक प्राप्त कर लिया, जिससे गांधार नरेश को क्रोध आया, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हो गया कि क्रोधित होना गलत था। संसार को असार जानकर गांधार नरेश और विदेह नरेश दोनों ही भिक्षु बन गए। वर्षो राजपाट भोगने के बाद नए-नए भिक्षु बने तो बार-बार मन विचलित हो उठता था किंतु दोनों ने ही संयम बरतते हुए स्वयं पर...
 
 
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जब भगवान ने प्रसाद लेने से किया इनकारThursday, December 24, 2009 01:41 [IST]

एक गाड़ीवान जंगल से लकड़ियां गाड़ी में भरकर घर की ओर लौट रहा था। मार्ग में उसे एक नाला पार करना था किंतु नाले में कीचड़ होने के कारण गाड़ी का पहिया उसमें फंस गया। गाड़ीवान बैलों को मारने-पीटने लगा, लेकिन पहिया कीचड़ से बाहर नहीं निकला। गाड़ीवान सहायता के लिए इधर-उधर देखने लगा किंतु उस घने जंगल में उसे कोई दिखाई नहीं दिया। आखिर वह अपने देवता को पुकारने लगा- हे भगवान! मेरी सहायता करो,...
 
 
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जब बेटे ने अपने पिता को चोरी के पाप से बचायाTuesday, December 22, 2009 01:24 [IST]

रामदास एक साधारण-सा किसान था और अपनी छोटी-सी जमीन पर खेती करके परिवार का पालन-पोषण करता था। दिनभर काम करने के बाद शाम को वह अपने परिवार के साथ बैठकर प्रभु का भजन करता और अपने बच्चों को सदा प्रेरक व चरित्र उत्थान की कहानियां सुनाया करता था। एक दिन ऐसी ही कोई कहानी सुनाते हुए उसने अपने बच्चों को बताया कि भगवान सर्वज्ञ हैं और सभी कुछ देखते हैं। एक बार रामदास के इलाके में अकाल पड़ा। उस...
 
 
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मुंह की सलाह से अंगों ने खत्म कर दी हड़तालMonday, December 21, 2009 00:22 [IST]

एक बार शरीर के सभी अंगों ने मिलकर पेट से कहा- मियां! कुछ करते-धरते भी हो या बैठे-बैठे माल ही सूतते रहते हो! एक हम हैं कि काम करते-करते मरे जा रहे हैं। यह नहीं चलेगा। तुम्हें कुछ करना ही होगा अन्यथा हमारे रास्ते अलग हो जाएंगे। पेट ने उत्तर दिया, कैसी बातें करते हो भाइयो! काम तो मैं भी करता हूं। पेट का यह उत्तर सुनकर पैरों ने दूसरे अंगों से कहा- ये कुछ तो करेंगे नहीं और बातें बनाकर माल ही...
 
 
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आंतरिक शक्ति से किया सेना का मुकाबलाSaturday, December 19, 2009 00:38 [IST]

द्वितीय महायुद्ध के समय की बात है। जर्मनी ने हॉलैंड पर हमला करने का विचार किया। जर्मनी की सेना के पास सभी आधुनिक हथियार और सामग्री थी, जबकि हॉलैंड के पास नहीं। हॉलैंड में जब जर्मनी के आक्रमण का समाचार पहुंचा तो लोगों में खलबली मच गई। इतने शक्तिशाली राष्ट्र से मुकाबला तो किया ही नहीं जा सकता था, किंतु देश को गुलाम भी नहीं बनने देना था। अत: सभी जिम्मेदार लोगों ने बैठकर विचार-विमर्श...
 
 
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संत के उपदेश से सुखी व प्रसन्न हुए राजा और प्रजाFriday, December 18, 2009 01:02 [IST]

राजा वीरसेन को संत-सत्संग अतिप्रिय था। उनके दरबार में प्राय: दूर-दूर से साधु-संत आते थे और वीरसेन उन्हें यथोचित सम्मान देकर उनसे ज्ञान की बातें ग्रहण करते थे। एक दिन उनके राज्य की सीमा पर एक विख्यात संत ने डेरा डाला। राजा वीरसेन को पता चला तो वे स्वयं उसका सत्कार करने पहुंचे। उस समय संत के सम्मुख हजारों धर्मप्रेमी बैठे थे और उनका उपदेश सुन रहे थे। राजा वीरसेन भी एक ओर चुपचाप बैठकर...
 
 
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हजरत मोहम्मद ने दिखाया वृद्धा को सही रास्ताThursday, December 17, 2009 00:47 [IST]

हजरत मोहम्मद जब भी नमाज पढ़ने मस्जिद जाते तो उन्हें नित्य ही एक वृद्धा के घर के सामने से निकलना पड़ता था। वह वृद्धा अशिष्ट, कर्कश और क्रोधी स्वभाव की थी। जब भी मोहम्मद साहब उधर से निकलते, वह उन पर कूड़ा-करकट फेंक दिया करती थी। मोहम्मद साहब बगैर कुछ कहे अपने कपड़ों से कूड़ा झाड़कर आगे बढ़ जाते। प्रतिदिन की तरह जब वे एक दिन उधर से गुजरे तो उन पर कूड़ा आकर नहीं गिरा। उन्हें कुछ हैरानी...
 
 
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काका ने बताया भूत हैं तो उससे ताकतवर भगवान हैंWednesday, December 16, 2009 00:36 [IST]

गोपाल दस वर्ष का बच्चा था। वह एक छोटे से गांव में अपने पिता के साथ रहता था। मां बहुत पहले ही भगवान को प्यारी हो चुकी थी। पिता ही उसकी देखभाल करते थे। एक दिन पिता को ज्वर हो गया और उन्होंने बिस्तर पकड़ लिया। गोपाल रोने लगा तो आसपास के लोग जमा हो गए। किसी ने गोपाल को पास के गांव के ख्यात वैद्यजी को बुला लाने के लिए कहा। गोपाल तत्काल दौड़ पड़ा। दौड़ते-दौड़ते रात हो गई। चारों ओर अंधकार छा...
 
 
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युवक ने साहित्यकार से बेटी का हाथ मांग लियाTuesday, December 15, 2009 00:27 [IST]

अति संपन्न परिवार का एक युवक सुनार की दुकान पर स्वर्ण हार के कुछ नमूने देख रहा था। उसका विवाह एक समृद्ध परिवार में तय हो चुका था। अभी दुकानदार से बातें हो ही रही थीं कि अचानक दुकानदार ने आवाज लगाई, अरे प्रभाकरजी! आइए ना! वयोवृद्ध प्रभाकरजी शहर के नामचीन साहित्यकार थे और सभी के आदर के पात्र थे। वे भीतर तो आए, किंतु संकोचवश कुछ बोल नहीं पा रहे थे। दुकान के मालिक ने आग्रह किया तो धीरे से...
 
 
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मृत्यु के भय से लालची ने छोड़ दिया पैसों का मोहMonday, December 14, 2009 00:16 [IST]

किसी नगर में एक आदमी रहता था। उसमें धन कमाने की लालसा पैदा हुई। उसके लिए उसने प्रयत्न आरंभ किया। देखते-देखते उसके पास लाखों की संपत्ति हो गई। पर ज्यों-ज्यों पैसा आता गया, उसका लोभ बढ़ता गया। वह बड़ा खुश था। कहां तो उसके पास एक फूटी कौड़ी नहीं थी और कहां अब उसकी तिजौरी भरी पड़ी थी। सब प्रकार की सुविधाएं थीं। धीरे-धीरे समय बीतने लगा। एक दिन रात को बिस्तर पर पड़े-पड़े अचानक उसने देखा कि...
 
 
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अहंकार ने बना दिया एक धनवान को भिखारीSaturday, December 12, 2009 00:57 [IST]

एक भिखारी था। उसका बूढ़ा शरीर सूखकर कांटा हो गया था। उसकी आंखों की ज्योति चली गई थी और उसे कोढ़ भी हो गया था। बेचारा रास्ते के एक ओर बैठकर गिड़गिड़ाते हुए भीख मांगा करता था। एक युवक उस रास्ते से रोज निकलता था। भिखारी को देखकर उसे बहुत बुरा लगता। उसका मन बहुत दुखी होता। वह सोचता, वह बूढ़ा क्यों भीख मांगता है? भगवान उसे उठा क्यों नहीं लेते? एक दिन उससे रहा न गया। वह भिखारी के पास गया और...
 
 
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जब गीदड़ की होशियारी से फंस गया बकरा बेचाराFriday, December 11, 2009 03:14 [IST]

एक गीदड़ जंगल में इधर-उधर चक्कर काट रहा था कि अचानक कुएं में जा गिरा। वह हाथ-पैर मारता रहा, किंतु कुएं से बाहर न निकल सका। अंत में थककर सोचने लगा, अब बाहर कैसे निकला जाए। तभी अचानक वहां एक बकरा आ पहुंचा। वह अपनी प्यास बुझाने के लिए कुएं की मुंडेर पर आया और कुएं में झांकने लगा। कुएं के अंदर उसे गीदड़ दिखाई दिया। वह बोला- कौन? गीदड़ भैया! कुएं में क्या कर रहे हो? क्या पानी बहुत ही ठंडा और...
 
 
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जब क्रोधी आदमी ने बुद्ध के मुंह पर थूक दियाThursday, December 10, 2009 01:04 [IST]

महात्मा बुद्ध उपदेश दे रहे थे- क्रोध एक प्रकार की अग्नि है, जिसमें उसे धारण करने वाला स्वयं ही जलता रहता है। उस अग्नि से वह दूसरे को जलाएगा, इससे पहले खुद बहुत कुछ जल जाता है। उनका उपदेश एक अत्यंत क्रोधी व्यक्ति भी सुन रहा था। उसे क्रोध के विरुद्ध बुद्ध का उपदेश तनिक भी अच्छा नहीं लग रहा था। इसलिए वह खड़ा होकर कहने लगा। अरे पाखंडी! तू बड़ी-बड़ी बातें करता है। इस पर अमल करके भी बता।...
 
 
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अवसर की प्रतीक्षा में ही धरा रह गया मदिरा पात्रWednesday, December 09, 2009 00:49 [IST]

एक धनवान आदमी था। उसे अपना मदिरा भंडार अत्यंत प्रिय था। उसके पास अतिप्राचीन मदिरा से पूर्ण पात्र था, जिसे न जाने किस अवसर के लिए उसने संभालकर रख छोड़ा था। जब भी कोई महत्वपूर्ण मौका होता, उस धनी को लगता कि आज मदिरा निकालूं, किंतु अगले ही क्षण उसे वह मौका बेमानी लगता और वह उस मदिरा पात्र को यथावत रख देता। एक बार जब उसके यहां राज्य के गवर्नर का आगमन हुआ, तब उसने सोचा : महज एक गवर्नर के लिए...
 
 
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जब प्रशंसा के भूखे कौए ने गंवाया मांस का टुकड़ाTuesday, December 08, 2009 00:28 [IST]

एक कौआ कहीं से मांस का टुकड़ा उठा लाया और किसी वृक्ष की डाल पर जा बैठा। उसी वृक्ष के नीचे एक सियार बैठा था, जो भूखा था। उसने कौए के मुंह में मांस का टुकड़ा देखा तो उसके मुंह में पानी भर आया। वह सोचने लगा कि किस तरह कौए की चोंच से मांस का यह टुकड़ा हथियाऊं? सोचते-सोचते उसे एक उपाय सूझ ही गया। उसने कौए से कहा- वाह कितने सुंदर हो तुम! तुम्हारा यह काला चमकीला रंग कितना प्यारा मालूम होता है, जो...
 
 
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टूटे छप्पर के नीचे चैन की नींद सो गया वृद्ध संन्यासीMonday, December 7, 2009 00:48 [IST]

दो संन्यासी थे। एक वृद्ध और एक युवा। दोनों साथ रहते थे। एक दिन महीनों बाद वे अपने मूल स्थान पर पहुंचे। जो एक साधारण-सी झोपड़ी थी। किंतु जब दोनों झोपड़ी में पहुंचे तो देखा कि वह छप्पर भी आंधी और हवा ने उड़ाकर न जाने कहां पटक दिया।



यह देख युवा संन्यासी बड़बड़ाने लगा- अब हम प्रभु पर क्या विश्वास करें? जो लोग सदैव छल-फरेब में लगे रहते हैं, उनके मकान सुरक्षित रहते हैं।एक हम हैं कि...

 
 
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जब एक अर्धविक्षिप्त ने लिखा कड़वा सचSaturday, December 05, 2009 00:38 [IST]

एंटीओक नगर के बीचोंबीच होकर आसी नदी समुद्र की ओर बहती थी। नगर के इस पार के आधे भाग को उस पार के आधे भाग से मिलाने के लिए एक पुल की आवश्यकता महसूस की गई। तत्कालीन सम्राट एंटीओक्स द्वितीय के समक्ष पुल का प्रस्ताव लाया गया, जो उन्होंने तत्काल स्वीकार कर लिया। पुल बनने में लगने वाली धनराशि सम्राट ने उपलब्ध करा दी और पुल बनना आरंभ हो गया। चूंकि पुल निर्माण में उसकी मजबूती एक अनिवार्य...
 
 
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नेहरू ने दी व्यर्थ आडंबर से बचने की सलाहFriday, December 04, 2009 00:22 [IST]

पंडित जवाहरलाल नेहरू जब प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने सर्वप्रथम कृषि विकास पर ध्यान दिया, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ थी। नेहरूजी ने कृषकों के हित में कई योजनाएं बनाईं और कृषि वैज्ञानिकों से निरंतर विचार-विमर्श कर कृषि में आधुनिक तरीकों के उपयोग को बढ़ावा दिया। प्रथम पंचवर्षीय योजना में भी कृषि विकास को सर्वोपरि रखा गया। इसी क्रम में विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं का भी...
 
 
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दुख-दर्द के बाद ही आती है सुख की घड़ीThursday, December 03, 2009 00:59 [IST]

दुख और पीड़ा जीवन के अनिवार्य अंग हैं। मनुष्य का उससे बिल्कुल अछूते रहने की कल्पना असंभव है। जीवन में सुख के साथ दुख भी अपने क्रम से आएगा ही। अच्छी परिस्थितियों के बाद विपरीत परिस्थितियों का यह चक्र जीवनभर यूं ही चलता रहेगा। आज मनुष्य विकास की उस अवस्था तक पहुंच गया है, जहां से उसे निरंतर विकासपथ पर आगे ही आगे बढ़ते जाना है। वर्तमान आधुनिक परिस्थितियों के मद्देनजर यदि विचार करें...
 
 
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गलत सलाह का नतीजा बकरे को भुगतना पड़ाWednesday, December 02, 2009 00:15 [IST]

गधे पर अपने मालिक की विशेष कृपा देखकर बकरा मन ही मन गधे के प्रति ईष्र्या रखने लगा। ईष्र्यावश उसने गधे को ऐसी सलाह दे डाली कि उसका खामियाजा खुद उसे ही भुगतना पड़ा। एक आदमी ने एक गधा और एक बकरा पाल रखा था। गधे पर वह अपना सामान ढोता था, इसलिए उसे घास, दाना, पानी आदि देने का विशेष ध्यान रखता था। उसके खानपान और उपचार में वह कोई कसर नहीं छोड़ता था। गधे पर मालिक की यह विशेष कृपा देखकर बकरा मन...
 
 
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गिन्नियां देखकर रोगी का रोग काफूर हो गयाTuesday, December 1, 2009 18:14 [IST]

गोल्डस्मिथ के पास ऐसा रोगी आया, जिसे वास्तव में कोई रोग नहीं था। गरीबी की वजह से उसे बस चिंता खाए जा रही थी। उन्होंने अगले दिन रोगी की पत्नी को संदूक सौंपा जिसमें सोने की गिन्नियां थीं। इससे उस रोगी की चिंता दूर हो गई।

ऑलिवर गोल्डस्मिथ न केवल ब्रिटेन के एक सुप्रसिद्ध कवि थे बल्कि अच्छे चिकित्साशास्त्री भी थे। कई रोगी गोल्डस्मिथ के पास आते और उनसे बेहतर चिकित्सा व सद्व्यवहार...

 
 
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काम बदलने पर काम का महत्व समझे देवदूतMonday, November 30, 2009 01:23 [IST]

एक शाम दो देवदूतों में यह विवाद होने लगा कि मेरा काम तुम्हारे काम से अधिक कठिन व श्रेष्ठ है। इस पर उनके प्रधान ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों को अपना काम एक-दूसरे से बदल लेने की सलाह दी। जिसे उन्होंने माना। एक शाम नगर के प्रवेश द्वार पर दो देवदूत मिले। परस्पर अभिवादन के पश्चात उनमें वार्तालाप का सिलसिला चल पड़ा। एक देवदूत ने पूछा- आजकल तुम्हारे जिम्मे कौन-सा कार्य है? दूसरे ने उत्तर...
 
 
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शिवाजी को धैर्य से मिली अपने लक्ष्य में सफलताSaturday, November 28, 2009 12:18 [IST]

बीजापुर के शासक आदिल शाह ने शिवाजी के बढ़ते पराक्रम को ध्वस्त करने की गरज से कई सूरमाओं को उन्हें परास्त करने भेजा। अंत में युद्ध करने आए अफजल खां को भी वीर शिवाजी ने मार गिराया।

अनेक लोग काम करते समय बहुत उतावले हो जाते हैं। वे चाहते हैं कि जो भी होना हो, तुरंत हो जाए। लेकिन व्यक्ति के ध्यान में सदा अपना लक्ष्य और सफलता ही रहनी चाहिए। इस संबंध में शिवाजी का एक प्रसंग है- बीजापुर...

 
 
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जब मूर्ख चरवाहे को भेड़ों ने सिखाया तगड़ा सबकFriday, November 27, 2009 00:35 [IST]

भीषण आंधी-पानी देखकर चरवाहा घबरा गया। अपनी बकरियों के साथ उसने एक गुफा में आश्रय लेना चाहा, पर वहां जंगली भेडें अपने बच्चों के साथ बैठी थीं। उन्हें प्रभावित करने के लिए वह रातभर उनकी सेवा में लगा रहा। शाम होते-होते खूब आंधी आई और पानी बरसने लगा। चरवाहा घबरा गया। उसने अपनी बकरियों और उनके बच्चों के साथ एक गुफा में आश्रय लेना चाहा, किंतु देखा कि उसमें पहले से ही कुछ जंगली भेड़ें अपने...
 
 
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सिंहनी ने वन के जीवों को निरुत्तर कर दियाThursday, November 26, 2009 00:40 [IST]

जंगल के राजा सिंह ने वन के पशुओं की एक बैठक बुलाई। बैठक में मादा पशुओं के मध्य एक प्रश्न उठा कि कौन सबसे अधिक बच्चों को जन्म देता है? सिंहनी ने इसका तर्कपूर्ण जवाब देकर सबको निरुत्तर कर दिया। वन के पशुओं की बहुत दिनों से बैठक नहीं हुई थी। कई विषयों पर चर्चा होनी थी। सो जंगल के राजा सिंह ने एक दिन इस हेतु मुनादी करवा दी। सभी पशुओं ने विचार कर लिया कि उन्हें किस-किस विषय पर अपनी बात रखनी...
 
 
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जब कवि और धनिक के गुण-अवगुण बदल गएWednesday, November 25, 2009 00:37 [IST]

एक शहर में एक निर्धन कवि और एक धनी मूर्ख रहते थे। कवि बहुत अच्छी कविता करता था। चारों ओर उसकी ख्याति भी थी, किंतु उसकी कविता उसे संपन्न नहीं बना पाई। जीवन के अभाव उसे बार-बार कचोटते और रह-रहकर अपनी निर्धनता का एहसास कराते। फलत: वह हमेशा दुखी रहता। दूसरी ओर धनी, संपन्नता के बावजूद यश के लिए तरसता। वह सोचता कि पैसा तो बहुत है किंतु समाज के मध्य वह कवि के समान सम्मान का पात्र नहीं है। लोग...
 
 
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धर्यपूर्वक प्रतीक्षा से ही मिलेंगे परमात्माTuesday, November 24, 2009 01:11 [IST]

जीवन में परिश्रम, प्रार्थना और प्रतीक्षा का बड़ा महत्व है। परिश्रम में सक्रियता, प्रार्थना में समर्पण और प्रतीक्षा में धर्य छुपा है। इन तीनों के मेल से आदमी पूर्ण कर्मयोगी बनता है। माना जाता है हनुमानजी महाराज भक्त शिरोमणि हैं, लेकिन उनका कर्मयोगी स्वरूप भी अद्भुत है। श्रीराम से मिलने के पहले हनुमानजी किष्किंधा के राजा सुग्रीव के सचिव मात्र थे। एक दिन श्रीराम उनके जीवन में आ...
 
 
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कष्टों की आंच में तपकर ही बनता है सोना खराMonday, November 23, 2009 01:04 [IST]

उस दिन समुद्र में तूफान आया हुआ था। सभी समुद्री जीव बेचैन थे। कोई इधर भाग रहा था तो कोई उधर। अपने ही प्राणदाता का यह स्वरूप विशेषकर नवजीवन प्राप्त लघु जीवों के लिए अधिक डरावना था। हालांकि बड़े-बुजुर्ग जीवों का धैर्य व सांत्वना उन्हें बल प्रदान कर रहे थे। फिर भी तूफान तो तूफान ही था। ऐसे माहौल में समुद्र में रहने वाली सीपियों में भी काफी हलचल थी। वे अपने अस्तित्व को बचाने के लिए...
 
 
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पशु-पक्षियों को प्रेम का अर्थ समझाया बैरागी नेSaturday, November 21, 2009 00:48 [IST]

एक छोटी व शांत पहाड़ी पर एक बैरागी रहते थे। उनकी आत्मा शुद्ध और हृदय निर्मल था। उस हरे-भरे एकांत में वे अकेले प्रभुभक्ति में रमे रहते। वे न कहीं आते-जाते और न ही उनकी विशेष आवश्यकताएं थीं। अपनी सीमित जरूरतों को वे वहीं पूर्ण कर लेते थे। वन के पशु और आकाश के पक्षी सभी उनके पास आते और वे उनसे खूब बातें करते। जो कुछ ज्ञान उनके पास था, वे उसमें से चुन-चुनकर सारपूर्ण बातें उन्हें बताते।...
 
 

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