Home >> Abhivyakti >> Jeevan Darshan
  • एक जंगल में एक धूर्त लोमड़ी रहती थी। वह प्राय: अपनी धूर्तता से भोले-भाले छोटे जानवरों को अपने वाग्जाल में फंसाकर उनका शिकार कर लेती थी। वह इतना मीठा बोलती कि जानवर उस पर सहज ही विश्वास कर लेते थे। एक बार लोमड़ी शिकार की तलाश में निकली। उसने रास्ते में एक मुर्गे को पेड़ की ऊंची डाल पर बैठे देखा। लोमड़ी के मुंह में पानी भर आया। अब इतनी ऊंची डाल तक तो लोमड़ी पहुंच नहीं सकती थी। सोचा कि मुर्गे को किसी तरह अपने विश्वास में लेकर नीचे उतारा जाए। वह पेड़ के नीचे गई और मुर्गे से दुआ-सलाम कर अपनी आवाज में...
    04:10 AM
  • प्राचीन काल में किसी राजा का एक ही पुत्र था। राजा ने उसे अच्छे संस्कार दिए थे, इसलिए वह सर्वथा सही राह पर था। दुर्भाग्यवश राजकुमार की मित्रता सेनापति के पुत्र से हो गई, जो अत्यंत अविवेकी और चरित्रहीन था। राजा ने बेटे को समझाने का प्रयास किया, किंतु उसे सेनापति के पुत्र का साथ सुहाता था इसलिए उसने मित्रता नहीं छोड़ी। कुसंगति में लड़का बिगड़ न जाए, अपने मन का यह भय राजा ने अपने बुद्धिमान मंत्री से साझा किया। मंत्री ने समस्या के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। अगले दिन मंत्री शाही बगीचे में पहुंचा।...
    April 17, 02:32 AM
  • प्राचीन लोककथा है। एक बार पशुओं और पक्षियों में विवाद हो गया। दोनों स्वयं को एक-दूसरे से अधिक ताकतवर बता रहे थे। दोनों पक्षों के बीच तर्क-वितर्क हो रहा था, जिसने कुछ समय बाद संघर्ष का रूप ले लिया। निर्णय कराने वाला कोई नहीं था। अत: दोनों पक्ष अपनी पूरी ताकत से लडऩे लगे। चमगादड़ों ने इस लड़ाई में किसी का पक्ष नहीं लिया। उन्होंने सोचा, हम पक्षियों की तरह उड़ते हैं अत: पक्षियों में शामिल हो सकते हैं। दूसरी ओर हमारे पक्षियों जैसे पंख नहीं होते और हम उनकी तरह अंडे भी नहीं देते। हम तो स्तनपायी हैं। अत:...
    April 16, 01:58 AM
  • एक बार ईरान के बादशाह ने अकबर को पत्र लिखकर 15 दिनों के लिए बीरबल को ईरान बुला लिया। वहां बीरबल ने अपनी चतुराई व ज्ञान से जल्दी ही बादशाह को प्रभावित कर लिया। इससे उनके कई दरबारियों को ईष्र्या हुई, क्योंकि बीरबल के आने से उनका महत्व घट गया। एक दिन बादशाह ने बीरबल से कहा, तुम दुनिया के अनेक देशों का भ्रमण कर चुके हो और वहां के राजाओं से मिले हो। क्या तुमने कहीं मेरे जैसा दयालु, सहृदय, उदार और न्यायशील राजा देखा है? बीरबल ने उत्तर दिया, बादशाह! आप तो पूनम के चांद के समान हैं। अन्य किसी राजा की तुलना आपके...
    April 15, 02:24 AM
  • भारत के महान समाज सुधारक और आधुनिक भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर को अपनी बाल्यावस्था से ही सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। तब भारतीय समाज में छुआछूत का बड़ा बोलबाला था। वे इससे बहुत दु:खी हो जाते थे और मन में संकल्प करते थे कि एक दिन वे इस व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाएंगे। उनके इस संकल्प को मजबूत करने वाली एक घटना उनके बचपन में घटी। एक दिन तेज धूप में विद्यालय से घर लौटते समय उन्हें प्यास लगी। रास्ते में कुआं देखकर उसमें से पानी निकाला और हाथ-मुंह धोकर पानी पीने लगे। तभी एक...
    April 14, 03:09 AM
  • प्राचीन जापान में एक सम्राट बहुत सनकी था। वह छोटी-छोटी गलतियों के लिए बड़ा दंड दे देता था। इसलिए प्रजा उससे बहुत भयभीत रहती थी। सम्राट के पास बीस फूलदानियों का एक अति सुंदर संग्रह था, जिस पर उसे बड़ा गर्व था। वह अपने महल में आने वाले अतिथियों को यह संग्रह अवश्य दिखाता था। एक दिन फूलदानियों की नियमित सफाई के दौरान सेवक से एक फूलदानी टूट गई। सम्राट तो आगबबूला हो गया। उसने सेवक को फांसी पर लटकाने का हुक्म दे दिया। राज्य में खलबली मच गई। एक फूलदानी टूटने की इतनी बड़ी सजा पर सभी हैरान रह गए। सम्राट से...
    April 12, 04:58 AM
  • एक दिन बादशाह अकबर जब दरबार में आए तो बहुत क्रोध में थे। सभी बादशाह के गर्म मिजाज को भांपकर चुप ही रहे। दरबार समाप्त होने पर बीरबल ने अकबर से गुस्से की वजह जाननी चाही तो वे बोले, मेरा दामाद बहुत दुष्ट है। मुझे अपनी बेटी से मिले एक साल हो गया, किंतु वह उसे भेजता ही नहीं है। बीरबल ने कहा, जहांपनाह! इसमें गुस्से की क्या बात है? मैं आज ही आपकी बेटी को लाने के लिए आदमी भेज देता हूं। अकबर बोले, आदमी तो मैंने भी भेजा था, किंतु दामाद ने उसे खाली हाथ लौटा दिया। वास्तव में दामाद की जात ही बहुत दुष्ट होती है। हम...
    April 11, 04:40 AM
  • एक पहाड़ की ऊंची चोटी पर एक गरुड़ रहता था। उसी पहाड़ की तलहटी में एक विशाल वृक्ष था, जिस पर एक कौआ अपना घोंसला बनाकर रहता था। तलहटी में आस-पास के गांवों में रहने वाले पशु पालकों की भेड़-बकरियां चरने आया करती थीं। जब उनके साथ उनके मेमने भी होते तो गरुड़ प्राय: उन्हें अपना शिकार बना लेता था। चूंकि गरुड़ विशाल पक्षी होता है और उसकी शक्ति अधिक होती है, इसलिए वह ऐसा आसानी से कर लेता था। कौआ प्राय: यह दृश्य देखता था कि जैसे ही कोई मेमना नजर आया कि गरुड़ अपनी चोटी से उड़ान भरता और तलहटी में जाकर मेमने को...
    April 10, 03:19 AM
  • बाजीराव पेशवा मराठा सेना के प्रधान सेनापति थे। एक बार वे किसी युद्ध में विजयी होकर सेना सहित राजधानी लौट रहे थे। मार्ग में उन्होंने मालवा में पड़ाव डाला। भूख-प्यास से सभी बेहाल थे, किंतु खाने के लिए अब उनके पास पर्याप्त सामग्री नहीं थी। यह देखकर बाजीराव ने अपने एक सरदार को बुलाकर किसी खेत से फसल कटवाकर छावनी में लाने का आदेश दिया। सरदार सैनिकों की एक टुकड़ी लेकर पास के गांव में पहुंचा और एक किसान को सबसे बड़े खेत पर ले जाने को कहा। किसान को लगा कि यह कोई अधिकारी है, जो खेतों का निरीक्षण करने आया...
    April 9, 03:34 AM
  • एक गरीब किसान के पास एक छोटा-सा खेत और एक बैल था। बड़े परिश्रम से उसने डेढ़ सौ रुपए इकट्ठे किए और एक और बैल पशु हाट से खरीदा। रास्ते में लौटते समय उसे चार लड़के मिले, जिन्होंने उससे बैल खरीदना चाहा। किसान ने सोचा कि यदि मुझे डेढ़ सौ से अधिक मिल गए तो बेहतर बैल खरीदूंगा। उसने बैल की कीमत लड़कों को दो सौ बताई। वे बोले, कीमत तो ज्यादा है। किसी समझदार व्यक्ति को पंच बनाकर फैसला करा लेते हैं। वास्तव में चारों लड़के एक ठग पिता की संतान थे और उन्होंने अपने पिता को ही पंच बना दिया। पिता ने बैल की कीमत मात्र...
    April 8, 03:43 AM
  • एक बार किसी गांव से तीन भाई धन कमाने के लिए परदेश रवाना हुए। रास्ते में उन्हें उन्हीं की तरह यात्रा पर निकला किसान मिला, जिसके पास कुछ धन था। सभी भाइयों के मन में किसान को ठगने का विचार आया। उन्होंने उसे यात्रा में साथ ले लिया। रात को वे एक मंदिर में रुके तो तीनों भाइयों ने किसान को खाना लेने भेजा। जब वह खाना लेकर आया तो उसे किसी काम में उलझाकर अधिकांश खाना तीनों ने खा लिया। किसान बेचारा अधपेटा ही रह गया। वह आगे के लिए सावधान हो गया। अगले दिन जब किसान को उन्होंने लड्डू लाने के लिए भेजा तो किसान ने...
    April 5, 03:12 AM
  • प्राचीनकाल की बात है। चार विद्वान ब्राह्मण परस्पर मित्र थे। एक दिन चारों ने संपूर्ण देश का भ्रमण कर हर प्रकार का ज्ञान अर्जित करने का निश्चय किया। चारों ब्राह्मणों ने चार दिशाएं पकड़ीं और विविध स्थानों पर रहकर विविध प्रकार की विद्या सीखीं। पांच वर्ष बाद चारों अपने गृहनगर लौटे और एक जंगल में मिलने की बात तय की। चूंकि चारों परस्पर एक-दूसरे को अपनी गूढ़ विद्याओं व सिद्धियों को बताना चाहते थे, अत: इसके लिए जंगल से उपयुक्त अन्य कोई स्थान नहीं हो सकता था।जब चारों जंगल में एक स्थान पर एकत्रित हुए तो...
    April 4, 02:19 AM
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