Home >> Abhivyakti >> Jeevan Darshan
  • संत ज्ञानेश्वर लोकोपकारी कार्यों में अग्रणी रहते थे। उनसे किसी का कष्ट देखा नहीं जाता था और वे तत्काल यथाशक्ति सहायता हेतु तत्पर हो जाते थे। ज्ञानेश्वर अपने शिष्यों को भी सदैव जनहितार्थ कार्य करने के लिए प्रेरित करते रहते थे। वस्तुत: वे सेवा को ईश्वरीय पूजा का सच्चा विधान मानते थे। संत ज्ञानेश्वर प्रतिदिन प्रात: नदी तट पर टहलने जाते थे। एक दिन जब वे वहां टहल रहे थे तो देखा कि एक बालक नदी में डूब रहा है। वह बचाओ, बचाओ, चिल्लाता और फिर नदी में गोता खा जाता। संत ज्ञानेश्वर को तैरना आता था, अत: बिना...
    07:11 AM
  • एक छोटे से तालाब में वाटर बीटल नामक जलकीटों का समूह रहता था। वहां लिली के कई पौधे थे। जिनके लंबे से तने का आधा हिस्सा पानी में डूबा रहता। वे सारे बीटल पानी के नीचे आरामदेह जिंदगी बीता रहे थे। बीच-बीच में जरूर उनमें उदासी छा जाती जब उनमें से कोई लिली के तने पर चढ़कर पानी की सतह के ऊपर चला जाता और फिर कभी नजर नहीं आता। वे समझते उनका साथी मर गया है। एक बार एक छोटे-से बीटल के मन में लिली के तने पर चढ़ने की तीव्र इच्छा उठी। हालांकि, उसने दृढ़निश्चय किया कि वह अपने साथियों को कभी नहीं छोड़ेगा और लौटकर बताएगा कि...
    July 21, 06:23 AM
  • एक बार गुरु नानक शिष्यों के साथ पटना में गंगा किनारे विश्राम कर रहे थे। मरदाना आते समय राह में मिला एक पत्थर हाथ में उछाल रहा था। अचानक उसने कहा, गुरुजी आप हर व्यक्ति को मुक्ति की राह बताते हैं। बड़ी भीड़ आपके दर्शन के लिए आती है, लेकिन उसके बावजूद लोग झगड़ों-विवादों, आमोद-प्रमोद और अन्य फालतू कामों में लगे रहते हैं। वे इस तरह अपनी जिंदगी बर्बाद क्यों करते हैं? गुरु नानक ने कहा कि वे जीवन का मोल नहीं समझते जबकि धरती पर यह सबसे मूल्यवान चीज है। मरदाना ने कहा, जीवन की कीमत तो कोई भी समझ सकता है। उन्होंने...
    July 19, 07:45 AM
  • भारत की लोककथाओं में उड़िया बाबा का उल्लेख आता है। वे संत थे और संसार की मोह-माया से ऊपर उठ चुके थे। संपूर्ण विश्व को वे अपना परिवार मानते थे और इसी नाते दीन-दु:खियों की यथाशक्ति सहायता करते थे। उनके पास से कोई खाली नहीं जाता था। उनके पास आने वाले अनुयायियों में से कई संपन्न थे, जिन्हें प्रवचन के दौरान उड़िया बाबा असहायों की मदद करने के लिए प्रेरित करते थे। लोग श्रद्धापूर्वक उनकी बात मानते भी थे। उनके आश्रम में एक कहार रहता था। वह उनके छोटे-मोटे काम करता था। बाजार से सब्जी लाना, खाना बनाना, पानी भरना...
    July 18, 07:44 AM
  • बौद्ध साहित्य में आम्रपाली का उल्लेख मिलता है। आम्रपाली वैशाली में आम के पेड़ के नीचे एक माली को मिली थी। उस समय वह नन्ही बालिका थी और उसे माता-पिता ने त्याग दिया था। माली उसे उठाकर अपने घर ले गया और उसका पालन-पोषण किया। आम्रपाली अनिंद्य सुंदरी थी। समय के साथ-साथ उसका सौंदर्य और निखरता गया। उसने नृत्य और संगीत सीखा। बाद में परिस्थितिवश वह वैशाली की नगरवधू बन गई। उसके पास वैशाली का श्रेष्ठि वर्ग मनोरंजन हेतु आता था। धीरे-धीरे आम्रपाली अत्यधिक संपन्न बन गई। वैभव और विलास में उसका जीवन बीत रहा था।...
    July 17, 07:26 AM
  • अबू उसमान बहुत महान संत थे। वे खुरासान में रहते थे। लोग दूर-दूर से उनके पास आते थे। अबू उसमान के प्रति लोगों में बहुत श्रद्धा भाव था। इसलिए उनकी कही गई बातों का प्रभाव भी होता था। लोग मात्र उन्हें सुनते ही नहीं थे, बल्कि वैसा करने का प्रयास भी करते थे। अबू उसमान अपने अनुयायियों को सदैव व्यावहारिक शिक्षा देते थे। वे बाह्य आडंबरों के घोर विरोधी थे। एक बार उनके पास एक व्यक्ति आया। उसने बताया कि वह हज करने मक्का जा रहा था। चूंकि रास्ते में खुरासान आता था अत: वह संत के दर्शन करने चला आया। अबू ने उसकी...
    July 16, 07:10 AM
  • सीताराम अपने मालिक का अत्यंत स्वामी भक्त सेवक था। वह उनका हर काम बड़ी निष्ठा से करता था। कभी किसी काम के लिए ना नहीं कहता और न ही कभी आलस्य या लापरवाही दर्शाता। मालिक को भी उससे बहुत स्नेह था। उसकी कर्मनिष्ठा ने उसे मालिक का अत्यंत प्रिय और विश्वास-पात्र बना दिया था। एक दिन सीताराम मालिक के कमरे की सफाई कर रहा था। अचानक उसके हाथ से मालिक की कलम छूटकर जमीन पर गिरी और टूट गई। मालिक ने यह देखकर नाराज होते हुए कहा, सीताराम, यह तुमने कैसी लापरवाही कर दी? यह कलम किसी ने मुझे बड़े स्नेह से भेंट की थी। सीताराम...
    July 15, 06:09 AM
  • एक बार देवी पार्वती के मन में इच्छा हुई कि उन्हें एक ऐसा पुत्र हो, जो सभी देवताओं में प्रथम पूजन पाए। शिवजी को इच्छा बताई तो उन्होंने पुष्पक व्रत का अनुष्ठान करने के लिए कहा। पार्वती ने व्रत के अनुष्ठान का संकल्पकर यज्ञ में सम्मिलित होने के लिए समस्त देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया। शिवजी ने सभी देवताओं का सत्कार किया। ब्रह्माजी के पुत्र सनत कुमार के पौरोहित्य में यज्ञ निर्विघ्न संपन्न हुआ। विष्णु भगवान ने आशीर्वाद दिया, देवी! आपके संकल्प के अनुसार अापको एक पुत्र की प्राप्ति होगी। तभी सनत...
    July 14, 12:05 AM
  • भक्तिकाल में दादूदयाल नाम के संत हुए हैं, जिनकी अद् भुत वाणी अनगिनत लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी। जब दादूदयाल संत नहीं थे, तब वे सामान्य गृहस्थ जीवन बिताते थे। उनके पास एक दुकान थी, जिसे चलाकर वे परिवार का पालन-पोषण करते थे। अपने घर-परिवार में दादूदयाल रमे हुए थे। एक दिन वे अपनी दुकान पर बैठे हिसाब कर रहे थे। बाहर बड़े जोरों की वर्षा हो रही थी। तभी दुकान के सामने एक साधु आकर खड़े हो गए। दादूदयाल हिसाब-किताब में इतने डूबे हुए थे कि उन्हें साधु के आगमन का अहसास ही नहीं हुआ। साधु ने भी कुछ नहीं...
    July 12, 04:34 AM
  • प्राचीनकाल में दो राजा थे खांडिक्य और केशिध्वज। दोनों चचेरे भाई थे। खांडिक्य कर्म पथ का अनुयायी था और केशिध्वज अध्यात्म का अन्वेषी। राज्य को लेकर दोनों लड़ते रहते थे। अंतत: केशिध्वज ने युद्ध में खांडिक्य को पराजित कर राज्य से निकाल दिया। खांडिक्य अपने मंत्री, पुरोहित, परिजनों व हितैषियों को साथ लेकर वन में चला गया। उधर केशिध्वज नेे मृत्यु पर विजय पाने का संकल्प लिया। इसके लिए उसने अनेक यज्ञ संपन्न किए। एक बार उसका यज्ञ पशु शेर का शिकार हुआ। केशिध्वज ने यज्ञ भंग के प्रायश्चित का विधान पूछा तो...
    July 10, 07:03 AM
  • बात बहुत पुरानी है। अमेरिका की किसी नदी में बड़े जोरों की बाढ़ आ गई। पानी ने प्रलय का दृश्य उपस्थित कर दिया। तट पर मौजूद लोग जान बचाकर भागे। बाढ़ आने के थोड़ी देर पहले नदी शांत थी। वहीं मौजूद एक महिला अपने छोटे-से बच्चे को लेकर तट पर खड़ी थी। बच्चा पानी में जाने के लिए मचलने लगा तो महिला उसे पानी के पास ले गई और उसका एक हाथ पकड़कर पानी में खड़ा कर दिया। बच्चा पानी में कूदने लगा और मां का हाथ छुड़ाने के लिए जोर लगाने लगा। मां ने कसकर उसका हाथ पकड़ लिया, किंतु तभी नदी में बाढ़ आ गई। संभवत: कहीं से पानी...
    July 9, 07:40 AM
  • महर्षि च्यवन ने एक दिन कठोरतम तपस्या का निश्चय किया। उन्होंने अन्न-जल त्यागकर तप आरंभ किया। निरंतर तपस्यारत रहते च्यवन के चारों ओर बांबियां निकल आईं। फिर बांबियों के आसपास पौधे उग आए। एक दिन राजा शर्याति सपरिवार वन-विहार के लिए वहां आए। राजकुमारी सुकन्या सखियों के साथ घूमते हुए बांबियों के समीप पहुंची और एक लकड़ी तोड़कर बांबी खोदने लगी। किंतु भीतर से आवाज आई, बांबी मत खोदो, यहां से चली जाओ। किंतु कौतूहलवश सुकन्या खोदती चली गई। एक सीमा तक खोदने के बाद उसे दो ज्योतियां चमकती दिखाई दीं। उनका...
    July 8, 06:29 AM
विज्ञापन
 
 

बड़ी खबरें

 
 

रोचक खबरें

 

बॉलीवुड

 
 

जीवन मंत्र

 
 

स्पोर्ट्स

 

बिज़नेस

 

जोक्स

 

पसंदीदा खबरें