Home >> Abhivyakti >> Jeevan Darshan
  • वन में बंदरों का समूह सभा कर रहा था। बातचीत का विषय था भोजन। हर बंदर भोजन के लिए होने वाली जद्दोजहद के विषय में बता रहा था। किसी बंदर ने बताया कि कैसे जब वह बाग में फल तोड़ने गया तो मालिक ने उस पर डंडे बरसाए। कोई बंदर कह रहा था कि जब उसने किसी घर से सब्जी का एक टुकड़ा उठाया तो उसे भी मार खानी पड़ी। मतलब यह कि बंदरों को भोजन जुटाने में कभी न कभी मार खानी पड़ी। अंत में यह तय हुआ कि वे मिलकर अपना ही बगीचा लगा लेंगे ताकि किसी मनुष्य के घर या बाग में न जाना पड़े। उन्होंने जंगल में जगह चुन ली। फिर बीज, कलम, बेल आदि...
    07:37 AM
  • एक धार्मिक प्रवृत्ति के राजा के दरबार में ऋषि का आगमन हुआ। उनके साथ पिंजरा था, जिसमें कौआ था। राजा ने ऋषि को आदरपूर्वक आसन पर बैठाया और पूछा, मुनिवर! आप यह कौआ लेकर क्यों चल रहे हैं? ऋषि बोले, राजन! सभी पशु-पक्षियों के अपने-अपने गुण होते हैं। कौए में विशेष गुण है सतर्कता। यह किसी व्यक्ति को देखकर ही उसके मन के भावों को ताड़ जाता है। आपके दरबार के अंदर आते हुए इसने आपके हर अधिकारी व कर्मचारी के गुण-दोष बता दिए। मुझे यह जानकर विस्मय हुआ कि आपके अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी भ्रष्ट हैं। आप कैसे उनके साथ...
    July 31, 07:33 AM
  • एक मंदिर में प्रतिदिन भक्तों का तांता लगा रहता था। मन की इच्छाओं की पूर्णता के लिए सभी प्रार्थना करते थे। जल्दी प्रार्थना करने के लिए धक्का-मुक्की होती। एक दीन-हीन निर्धन व्यक्ति भी प्रतिदिन प्रार्थना करने आता था, किंतु वह कभी आगे निकलने की कोशिश नहीं करता। चुपचाप सबसे पीछे एक कोने में बैठ जाता और मन में कहता, हे प्रभु! मैं अनपढ़ हूं। मुझे तुम्हारी प्रार्थना याद नहीं है। मैं तो सिर्फ अ, आ, इ, ई, क, ख, ग ही जानता हूं। तो मैं इन्हीं अक्षरों को जोड़कर मंत्र के रूप में तुम्हारी प्रार्थना करता हूं। मुझे...
    July 30, 07:30 AM
  • अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का नैतिक व्यक्तित्व अत्यंत संपन्न था। ईमानदारी और सत्य वाणी उनकी मूल प्रकृति में थे। अपने संघर्ष के दिनों में भी लिंकन ने इन चीजों पर कभी समझौता नहीं किया। वे चाहते तो ऐसा कर बहुत जल्दी सफलता प्राप्त कर सकते थे, किंतु उन्होंने ऐसा कभी नहीं किया। लिंकन जिन दिनों वकालत किया करते थे, बात तभी की है। लिंकन उन वकीलों में से नहीं थे, जो मुकदमा जीतने के लिए झूठ का सहारा लेने में जरा भी संकोच नहीं करते। वे अपने पास आने वाले मुवक्किलों से पहले उनका पक्ष ध्यान से...
    July 29, 07:53 AM
  • किसी राजा को अपने राज्य के लिए योग्य मंत्री नियुक्त करना था। वह चाहता था कि ईमानदार और कर्मठ व्यक्ति को मंत्री पद दें। चयन कठिन था, क्योंकि राज दरबार से जुड़ा हर व्यक्ति पद हथियाना चाहता था और इसके लिए प्राय: प्रतिदिन राजा के पास सिफारिशें आ रही थीं। बहुत सोच-विचार के बाद राजा ने मन ही मन एक बात तय की। उसने राजमार्ग पर एक विशाल पत्थर रखवा दिया। फिर वह सामान्य वेशभूषा धारण कर वहीं पास में बैठ गया। वह देखना चाहता था कि कोई उस पत्थर को हटाता है या नहीं। चूंकि राजमार्ग था, इसलिए आने-जाने वाले भी बहुत थे।...
    July 28, 06:53 AM
  • एक राजमहल के द्वार पर एक वृद्ध भिखारी आया। द्वारपाल से उसने कहा, भीतर जाकर राजा से कहो कि तुम्हारा भाई मिलने आया है। द्वारपाल ने समझा कि शायद कोई दूर के रिश्ते में राजा का भाई हो। सूचना मिलने पर राजा ने भिखारी को भीतर बुलाकर अपने पास बैठा लिया। उसने राजा से पूछा, कहिए बड़े भाई! आपके क्या हालचाल हैं? राजा ने मुस्कराकर कहा, मैं तो आनंद में हूं। आप कैसे हैं? भिखारी बोला, मैं जरा संकट में हूं। जिस महल में रहता हूं, वह पुराना और जर्जर हो गया है। कभी भी टूटकर गिर सकता है। मेरे बत्तीस नौकर थे, वे भी एक एक कर चले...
    July 25, 04:21 AM
  • जातक कथा के मुताबिक किसी वन में नदी किनारे मीठे और रसीले आमों का वृक्ष था। आमों का लुत्फ उस वृक्ष पर रहने वाले बंदर उठाते थे। बंदरों के समूह का चतुर मुखिया गर्मी की शुरुआत में नदी के ऊपर फैली टहनियों पर लगे बौर नष्ट करवा देता। वह कहता, यदि इन टहनियों पर आम लगकर नदी में गिरे तो मानवों तक पहुंच जाएंगे। फिर वे इस वृक्ष के सारे फल ले जाएंगे। हालांकि, एक साल कुछ बौर रह गए। उनमें आम लगे और वे पानी में गिरे। वे जिन मछुआरों को मिले उनके मुखिया ने कुछ आम राजा को भेंट किए। राजा ने भी इतने रसीले आम पहले कभी नहीं...
    July 24, 05:06 AM
  • ख्यात क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म मध्यप्रदेश के भाभरा (अलीराजपुर जिला) में 23 जुलाई, 1906 को सीताराम तिवारी और जगरानी देवी के यहां हुआ था। हालांकि, स्वतंत्रता संग्राम की एक घटना से उन्हें नया नाम मिला चंद्रशेखर आज़ाद। बचपन में ही उनमें देशप्रेम की भावना जग गई थी। गांधीजी ने जब असहयोग अांदोलन छेड़ा तो आज़ाद और उनके साथियों ने किसी भी तरीके से देश को स्वतंत्र कराने का संकल्प ले लिया। हनुमानजी के परम भक्त आज़ाद के मन में हर वक्त एक ही ख्याल रहता कि देश को कैसे आजाद कराएं। गांधीजी के असहयोग...
    July 23, 04:01 AM
  • संत ज्ञानेश्वर लोकोपकारी कार्यों में अग्रणी रहते थे। उनसे किसी का कष्ट देखा नहीं जाता था और वे तत्काल यथाशक्ति सहायता हेतु तत्पर हो जाते थे। ज्ञानेश्वर अपने शिष्यों को भी सदैव जनहितार्थ कार्य करने के लिए प्रेरित करते रहते थे। वस्तुत: वे सेवा को ईश्वरीय पूजा का सच्चा विधान मानते थे। संत ज्ञानेश्वर प्रतिदिन प्रात: नदी तट पर टहलने जाते थे। एक दिन जब वे वहां टहल रहे थे तो देखा कि एक बालक नदी में डूब रहा है। वह बचाओ, बचाओ, चिल्लाता और फिर नदी में गोता खा जाता। संत ज्ञानेश्वर को तैरना आता था, अत: बिना...
    July 22, 07:11 AM
  • एक छोटे से तालाब में वाटर बीटल नामक जलकीटों का समूह रहता था। वहां लिली के कई पौधे थे। जिनके लंबे से तने का आधा हिस्सा पानी में डूबा रहता। वे सारे बीटल पानी के नीचे आरामदेह जिंदगी बीता रहे थे। बीच-बीच में जरूर उनमें उदासी छा जाती जब उनमें से कोई लिली के तने पर चढ़कर पानी की सतह के ऊपर चला जाता और फिर कभी नजर नहीं आता। वे समझते उनका साथी मर गया है। एक बार एक छोटे-से बीटल के मन में लिली के तने पर चढ़ने की तीव्र इच्छा उठी। हालांकि, उसने दृढ़निश्चय किया कि वह अपने साथियों को कभी नहीं छोड़ेगा और लौटकर बताएगा कि...
    July 21, 06:23 AM
  • एक बार गुरु नानक शिष्यों के साथ पटना में गंगा किनारे विश्राम कर रहे थे। मरदाना आते समय राह में मिला एक पत्थर हाथ में उछाल रहा था। अचानक उसने कहा, गुरुजी आप हर व्यक्ति को मुक्ति की राह बताते हैं। बड़ी भीड़ आपके दर्शन के लिए आती है, लेकिन उसके बावजूद लोग झगड़ों-विवादों, आमोद-प्रमोद और अन्य फालतू कामों में लगे रहते हैं। वे इस तरह अपनी जिंदगी बर्बाद क्यों करते हैं? गुरु नानक ने कहा कि वे जीवन का मोल नहीं समझते जबकि धरती पर यह सबसे मूल्यवान चीज है। मरदाना ने कहा, जीवन की कीमत तो कोई भी समझ सकता है। उन्होंने...
    July 19, 07:45 AM
  • भारत की लोककथाओं में उड़िया बाबा का उल्लेख आता है। वे संत थे और संसार की मोह-माया से ऊपर उठ चुके थे। संपूर्ण विश्व को वे अपना परिवार मानते थे और इसी नाते दीन-दु:खियों की यथाशक्ति सहायता करते थे। उनके पास से कोई खाली नहीं जाता था। उनके पास आने वाले अनुयायियों में से कई संपन्न थे, जिन्हें प्रवचन के दौरान उड़िया बाबा असहायों की मदद करने के लिए प्रेरित करते थे। लोग श्रद्धापूर्वक उनकी बात मानते भी थे। उनके आश्रम में एक कहार रहता था। वह उनके छोटे-मोटे काम करता था। बाजार से सब्जी लाना, खाना बनाना, पानी भरना...
    July 18, 07:44 AM
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