जीवन दर्शन
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  • ब्रह्मपुर के पास गांव में मुन्नासिंह बादशाह रहते थे। वे गृहस्थ थे, किंतु आचरण संत जैसा था। सभी से प्रेम करते और अपने में मग्न रहते। परिवार का पेट पालने के लिए खेत में पसीना बहाते और जो रुखी-सूखी मिलती वह खा लेते। उनके घर यदि अतिथि आ जाता तो अपने हिस्से का भोजन भी उसे खिला देते। संगीत में गहरी रुचि के चलते उनके घर में प्राय: भजनों का आयोजन होता था। संगीत रसिक उनके घर पर जुट जाते थे। एक बार रानीसागर की वेश्या ने उन्हें भजन सुनाने के लिए आमंत्रित किया। मुन्नासिंह इतने पवित्र हृदय सहज इंसान थे कि...
    October 25, 06:49 AM
  • युक्तेश्वर गिरि के शिष्य थे योगानंद। अपने गुरु से आशीर्वाद लेकर वे अमेरिका में आयोजित धर्म सम्मेलन में भाग लेने के लिए द सिटी ऑफ स्पार्टा जहाज में बैठे। सहयाित्रयों को उनकी यात्रा का उद्देश्य पता लगा तो उन्होंने उनसे व्याख्यान देने का आग्रह किया, ताकि उनके ज्ञानयुक्त विचारों से वे लाभान्वित हो सकें। योगानंद ने अपने विचारों को अंग्रेजी में व्याख्यान देने के लिए एक कड़ी में पिरोने का प्रयास किया, क्योंकि सभी श्रोता अंग्रेजी ही जानते थे, लेकिन न जाने क्यों वे विचारों को अंग्रेजी में सुसंगत...
    October 23, 06:16 AM
  • पंडित जवाहरलाल नेहरू पर्यावरण के प्रति अत्यंत जागरूक थे। उनकी दृष्टि में पेड़-पौधे संवेदनशीलता में मानव से कम नहीं होते। उन्हें भी हर्ष और विषाद होता है। फिर सबसे ऊपर तो यह कि वे हमें प्राणवायु देते हैं। हमारा जीवन उन्हीं पर निर्भर होता है, इसलिए उनकी रक्षा करना हमारा परम दाियत्व है। नेहरू ने अपने घर के उद्यान के लिए माली रखा था, किंतु वे स्वयं भी व्यक्तिगत रुचि लेकर उद्यान व्यवस्थित रखते थे। एक दिन नेहरू उद्यान में टहल रहे थे। तभी उन्हें कुल्हाड़ी चलने की आवाज सुनाई दी। उन्होंने पाया कि माली...
    October 22, 06:52 AM
  • मकर संक्रांति का अवसर था। सनातन धर्म महासभा का सम्मेलन होने वाला था। पंडित मदनमोहन मालवीय को व्याख्यान हेतु आमंत्रित किया गया था। हजारों लोग सम्मेलन स्थल पर इकट्ठा हो गए थे। महामना मालवीयजी की ओजभरी वाणी का आकर्षण सभी को था और व्याख्यान देने की उनकी शैली भी बहुत आकर्षक थी। जनता उन्हें हार्दिक श्रद्धा के साथ सुनती थी। पंडितजी िनयत समय पर सम्मेलन में आए और अपना व्याख्यान देना आरंभ किया। इस सम्मेलन के आयोजन में बाधाएं खड़ी कर इसे असफल करने की इच्छा रखने वाले कुछ शरारती तत्व भी वहां मौजूद थे।...
    October 21, 06:06 AM
  • बरसों पहले की बात है। लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों की कुछ मांगें थीं, जो लंबे समय से विश्वविद्यालय प्रशासन के पास लंबित थीं। धीरे-धीरे छात्रों में असंतोष पनपने लगा। वे चाहते थे कि उनकी मांगों पर शीघ्रातिशीघ्र विचार कर फैसला लिया जाए। एक दिन विश्वविद्यालय के भीतर कांग्रेस के मंत्रियों एवं अन्य प्रतििष्ठत हस्तियों की बैठक चल रही थी। जब छात्रों को यह मालूम पड़ा तो वे एकमत होकर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर धरना देकर बैठ गए। उन्होंने जोर-जोर से सरकार के विरुद्ध नारे लगाने शुरू कर दिए। छात्र...
    October 20, 06:43 AM
  • वीर सावरकर को राजद्रोह के आरोप में दो आजन्म कारावासों की सजा सुनाई गई थी। अंडमान जेल में उन्हें सवेरे उठते ही कोल्हू चलाना पड़ता। कोल्हू में नारियल की गरी पड़ते ही वह इतना भारी चलता कि बलिष्ठ शरीर के बंदी भी उसकी 20 फेरियां करके रोने लगते थे। कोल्हू के डंडे को हाथ से उठाकर आधे रास्ते तक चला जाता और उसके बाद का आधा गोला पूरा करने के लिए डंडे पर लटकना पड़ता, क्योंकि तब तक हाथों की शक्ति समाप्त हो चुकी होती थी। जब कोल्हू में काम करते हुए सावरकर प्यास के मारे बेहाल हो जाते, तो उन्हें पानी नहीं दिया जाता और...
    October 18, 07:21 AM
  • विद्यालय में इतिहास की कक्षा चल रही थी। अध्यापक बच्चों को पाठ लिखा रहे थेे, किंतु एक छात्र चुपचाप बैठा हुआ था और लिख नहीं रहा था। थोड़ी देर बाद अध्यापक ने बोलते-बोलते पूरी कक्षा पर निगाह डाली, तो उन्हें उस छात्र पर शंका हुई। उन्होंने पास जाकर देखा तो पाया कि वास्तव में उसने अपनी कॉपी पर कुछ भी नहीं लिखा था। अध्यापक को क्रोध आ गया। उन्होंने उससे न लिखने का कारण पूछा तो वह बोला, गुरुजी! आपने जो कुछ भी लिखाया है, वह मुझे अक्षरश: याद है, इसलिए मैं नहीं लिख रहा हूं। जवाब सुनकर अध्यापक का क्रोध और बढ़ गया।...
    October 17, 07:34 AM
  • घटना उन दिनों की है, जब बगदाद में खलीफा उमर का शासन था। वे अपनी प्रजा के सच्चे अर्थों में संरक्षक थे। उनके राज में कभी प्रजा अत्याचार का शिकार नहीं हुई। खलीफा नेकदिल और इंसाफ पसंद व्यक्ति थे। नियमों का पालन उनकी प्रजा से लेकर हर खास अधिकारी तक होता था। वे स्वयं भी नियमों के पाबंद थे। अनुशासनप्रियता उनके स्वभाव में थी। एक बार उन्हें शिकायत मिली कि राज्य में शराबियों का उत्पात बढ़ रहा है। खलीफा नैतिक मूल्यों को लेकर भी अत्यंत सजग थे। उन्होंने अपने राज्य के शराबियों की शराब की लत छुड़ाने के लिए...
    October 16, 05:46 AM
  • बात उस समय की है, जब फ्रांस की सबसे बड़ी नदी सैन में जबर्दस्त बाढ़ आई हुई थी। शाम का समय था। एक लड़का नदी पर बने बांध से घर जा रहा था। अचानक उसने देखा कि बांध में एक जगह छेद हो गया है और उसमें से पानी रिस रहा है। लड़का समझदार था। वह समझता था कि बांध से पानी रिसने के कितने भयावह परिणाम हो सकते हैं। पानी के दबाव से छेद बढ़ता जाएगा और फिर हो सकता है कि बांध का बड़ा हिस्सा ही ढह जाए। फिर तो पूरा नगर पानी में डूब जाएगा, यह विचार कर उसने छेद वाली जगह पर ढेर सारी मिट्टी डाल दी। पानी का रिसाव कुछ देर रुका भी, किंतु वेग...
    October 15, 05:44 AM
  • अपने भाई के दुर्व्यवहार से तंग आकर बेंजामिन फ्रेंकलिन ने 17 वर्ष की आयु में बोस्टन छोड़ दिया। जब वे यहां से न्यूयाॅर्क पहुंचे तो काफी प्रयासों के बावजूद उन्हें कोई काम नहीं मिला। एक दिन वे किसी छापेखाने से निराश होकर लौट ही रहे थे कि वहां के मालिक- कीमर ने उन्हें पुकारा, मेरा एक हैंड प्रेस खराब पड़ा है। क्या तुम उसे ठीक कर सकते हो? फ्रेंकलिन ने हैंड प्रेस देखने के बाद कीमर से कहा, मैं इसे ठीक तो कर सकता हूं, किंतु इस काम में पूरा दिन लग सकता है। क्या आप मुझे पूरे दिन की मजदूरी देंगे? कीमर ने फ्रेंकलिन को...
    October 14, 06:02 AM
  • जॉन रस्किन प्रसिद्ध ब्रिटिश विचारक थे। उनकी सोच जीवन के प्रति बहुत सकारात्मक थी। वे परेशानियों से न तो कभी घबराते और न ही उसका किसी के सामने अधिक उल्लेख करते। उनके साथ जो भी रहता वह उनसे प्रेरणा ही पाता था। रस्किन अपने सभी मित्रों को कष्टों के बीच सहज रहने की तरकीबें बताया करते थे। एक दिन रस्किन के मित्र उनसे मिलने आए। दोनों की बातचीत के दौरान कहीं जाने के विषय में तय हुआ। घर से रवाना होकर जब दोनों लंदन की गलियों से गुजर रहे थे तो देखा कि रास्ता किसी कारणवश कीचड़ से भरा हुआ था। रस्किन उस अस्वच्छ...
    October 13, 07:34 AM
  • प्रख्यात वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडीसन उन दिनों संघर्षरत थे। उनका सक्रिय दिमाग और जिज्ञासु वृत्ति उन्हें निरंतर प्रयाेगों के प्रति आग्रही बनाकर रखते थे। कुछ अनोखा और महत्वपूर्ण करने की चाह एडीसन के मन में जोर मारती थी। वे दिन-रात काम में जुटे रहते थे। एक दिन रात में एडीसन पेट्रोमैक्स की रोशनी में काम कर रहे थे। उसमें बार-बार तेल खत्म हो जाता तो उन्हें तेल भरने के लिए काम छोड़कर उठना पड़ता। वे परेशान हो गए। फिर सोचा कि क्यों न ऐसा कुछ करें, जिससे यह बार-बार तेल भरने का झंझट ही समाप्त हो जाए। उन्होंने...
    October 10, 07:38 AM
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