June 12, 06:55
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एक लोककथा है। कहा जाता है कि एक समय बोधिसत्व बटेर की योनि में पैदा हुए। यह बटेर जंगल में घास के तिनके व अन्न-कण खाकर अपना पेट भरता था। अधिक अच्छे भोजन की कामना उसके मन में नहीं थी, इसलिए अपने घोंसले के आसपास के वृक्षों व पौधों से जो मिल जाए, उसी में संतुष्ट रहता था। कुछ...