जीवन दर्शन
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  • ब्रिटिश राज के दिनों की बात है। बिहार के दियारा गांव में अधिकांश लोग जाना पसंद नहीं करते थे, क्योंकि वहां जाने वालों को अक्सर बुखार जकड़ लेता था। कई बार व्यक्ति काल कवलित हो जाता था। ऐसे समय में रघुनाथ पांडे नामक व्यक्ति आरा से दियारा पहुंचे। उनके साथ घोड़ी के सिवाय कुछ नहीं था। वे झोपड़ी बनाकर मस्ती से रहने लगे। वहीं की थोड़ी-सी जमीन पर खेती करते और स्थानीय लोगों को कुश्ती सिखाते। कुश्ती के बाद वे घोड़ी पर सवार हो जाते और विस्तृत मैदान में उसे दौड़ाते। अपनी फकीरी में मस्त यह बादशाह एक दिन कच्चे...
    November 26, 06:35 AM
  • अवंति के राजा बाहुबलि को राज ज्योतिषी की आवश्यकता थी। मंत्री परिषद के समक्ष राजा ने यह इच्छा रखी तो सर्वसम्मति से यह तय हुआ कि संपूर्ण राज्य में इसकी घोषणा कर दी जाए और फिर जो भी प्रत्याशी आएं, उनकी योग्यता को परखकर नियुक्ति दी जाए। अगले ही दिन पूरे राज्य में घोषणा करवाई गई कि राज ज्योतिषी के लिए योग्य प्रत्याशी साक्षात्कार दें। इस महत्वपूर्ण राजपद को पाने के लिए कई ज्योतिषी इच्छुक थे। वे सभी नियत तिथि व समय पर दरबार में एकत्रित हो गए। राजा ने स्वयं साक्षात्कार लेना आरंभ किया। अनेक...
    November 25, 07:40 AM
  • विश्वामित्र ने राजपद का त्याग किया और साधना करने लगे। भाैतिकता के संपूर्ण त्याग के बावजूद वे अहंकार नहीं छोड़ पाए। बरसों की तपस्या के बाद ब्रह्मा प्रकट हुए और इच्छा पूछी। विश्वामित्र ने कहा, मैं ब्रह्मर्षि विश्वामित्र कहलाना चाहता हूं। तब ब्रह्माजी बोले, जब ब्रह्मर्षि वशिष्ठ तुम्हें ब्रह्मर्षि मान लेंगे, तभी तुम्हें यह उपािध प्राप्त होगी। तुम उनसे ही यह प्रार्थना करो। विश्वामित्र के अहंकार को यह सुनकर ठेस लगी। फिर भी उन्होंने वशिष्ठ से मिलकर अपनी इच्छा प्रकट की, लेकिन वशिष्ठ ने उन्हें...
    November 24, 07:20 AM
  • देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू विशिष्ट लोगों से भेंट करने के साथ-साथ आम जनता से भी बड़े स्नेेह से मिलते थे। सर्वोच्च पद पर आसीन होने के बावजूद उनमें अहंकार का लेशमात्र भी नहीं था। लोगों से मिलना, उनकी समस्याएं जानना तथा समाधान की राह खोजना उनकी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा था। लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए आस्था उनके व्यक्तित्व में कूट-कूटकर भरी हुृई थी। एक दिन पं. नेहरू के पास एक ही समय पर किसी देश का राजदूत, सैनिक और एक नवयुवक मिलने आए। बाहर बैठे नेहरूजी के सचिव से पहले राजदूत और सैनिक...
    November 22, 07:18 AM
  • महाभारत का एक प्रसंग है। पांडव बारह वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास पूर्ण कर चुके थे। वे अब अपने पक्ष के वीरों को कौरवों के खिलाफ युद्ध करने के लिए इकट्ठा कर रहे थे। चचेरे भाइयों के बीच होने वाले युद्ध को रोकने के लिए भगवान श्रीकृष्ण पांडवों के दूत बनकर दुर्योधन को समझाने कौरवों की राजधानी हस्तिनापुर गए, किंतु वह नहीं माना। जब भगवान श्रीकृष्ण लौटने लगे तो हस्तिनापुर की सीमा तक छोड़ने आए लोगों में भीष्म पितामह, धर्मराज विदुर, दानवीर कर्ण आदि थे। नगर की सीमा आने पर सभी लौट गए, किंतु भगवान...
    November 21, 04:26 AM
  • लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की राष्ट्रनिष्ठा और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान से सभी परिचित हैं। उनके जीवन का एक प्रसंग है, जो बहुत ही प्रेरणादायक है। इसमेें तिलक की कर्मठता और काम के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की झलक मिलती है। किस्सा यह है कि एक बार लोकमान्य तिलक अपने कार्यालय में किसी महत्वपूर्ण प्रश्न पर विचार कर रहे थे। प्रश्न बड़ा ही जटिल और राजनीतिक था। दूसरे शब्दों में कहें तो यह कि प्रश्न राष्ट्र की स्वाधीनता से जुड़ा हुआ था। तिलक अपने खास सहयोगियाें के साथ बैठकर विचार-विमर्श कर रहे थे। तभी...
    November 20, 06:00 AM
  • स्कॉटलैंड का राजा ब्रूस अपने शत्रुओं से युद्ध में हार गया। उसके सैनिक या ताे मारे गए अथवा बंदी बना लिए गए। उसके महल पर शत्रु सेना का कब्जा हो गया। वह अपने परिवार से भी बिछड़ गया। ब्रूस अपनी जान बचाकर जंगल में भागा। शत्रु सेना उसका पीछा कर रही थी। ब्रूस घने जंगल में स्वयं के लिए कोई सुरक्षित आश्रय की तलाश करने लगा। जंगल में तो पेड़ थे, उनसे सुरक्षा मिलना तो मुश्किल था भागते-भागते अचानक उसे एक गुफा दिखाई दी। भयभीत ब्रूस को मृत्यु निकट आती लग रही थी। वह बिना कुछ सोचे-विचारे गुफा में घुस गया। वह ठीक से...
    November 19, 06:44 AM
  • भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री सादा जीवन, उच्च विचार के हिमायती थे। प्रधानमंत्री पद पर रहने के दौरान भी उनकी सादगी में कोई कमी नहीं आई। वे आम व्यक्ति की तरह ही जीवन जीते थे। उन्होंने स्वयं के लिए अथवा परिवार की खातिर कभी कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं ली। यदि किसी ने उनके पद के मानस्वरूप कोई सहूलियत देने की पेशकश की, तो शास्त्रीजी ने विनम्रतापूर्वक इनकार कर दिया। उनकी इस अनुकरणीय सादगी को दर्शाता एक प्रसंग है। जब शास्त्रीजी प्रधानमंत्री थे, उन दिनों की बात है। सर्दियों का मौसम था।...
    November 18, 06:53 AM
  • प्रसंग उस समय का है, जब पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रधानमंत्री थे। पं. नेहरू अपनी अनुशासनप्रियता के लिए जाने जाते थे। घर हो या बाहर, वे बहुत अनुशासित ढंग से रहते थे। उन दिनों राज्यसभा का सत्र चल रहा था। अध्यक्ष की कुर्सी पर देश के तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन आसीन थे। शून्यकाल चल रहा था। एक मंत्री कांग्रेस के ही एक सदस्य द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। पं. नेहरू सहित पूरा सदन उन्हें सुन रहा था। अचानक पं. नेहरू को कुछ याद आया। वे उठे और एक अन्य मंत्री के पास जाकर...
    November 17, 06:11 AM
  • किसी शहर के मैनेजमेंट संस्थान में कर्मचारी काम को लेकर बहुत स्ट्रेस (तनाव) में रहते थे। इसका प्रतिकूल असर उनके स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर पड़ रहा था, इसलिए उस संस्थान ने कर्मचारियों को स्ट्रेस मैनेजमेंट के बारे में समझाने के लिए मनोवैज्ञानिक को आमंत्रित किया। आरंभिक परिचय के बाद मनोवैज्ञािनक ने कर्मचािरयों के समक्ष पानी से भरा गिलास उठाया। कर्मचारी समझे कि अब आधा गिलास खाली या आधा भरा है पूछा और समझाया जाएगा। किंतु मनोवैज्ञािनक ने पूछा, इस गिलास में भरे पानी का कितना वजन होगा? सभी ने...
    November 15, 06:35 AM
  • महाराजा जयसिंह इंग्लैंड की राजधानी लंदन की यात्रा पर थे। एक दिन वे बिना किसी लाव-लश्कर के सादे कपड़ों में लंदन की बाॅन्ड स्ट्रीट में घूमने गए। वहां उन्होंने रोल्स रॉयस कार कंपनी का भव्य शोरूम देखा, तो अंदर कार की कीमत पता करने गए। उनकी साधारण वेशभूषा देखकर शोरूम मैनेजर ने उन्हें आम भारतीय समझकर वापस जाने को कहा। वहां मौजूद सेल्समैन ने भी उन्हें काफी अपमानित किया। अपमानित महाराजा जयसिंह ने होटल लौटकर उसी शोरूम पर फोन लगवाकर संदेश कहलवाया कि अलवर महाराज कार खरीदने के लिए आएंगे। कुछ देर बाद जब...
    November 13, 05:55 AM
  • अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन समय के बहुत पाबंद थे। अपने प्रत्येक कार्य को समय पर करना उनके स्वभाव में था। विविध कार्यक्रमों में भी वे ठीक समय पर पहुंचते थे। प्राय: राजनेता दिए गए समय से काफी विलंब से पहुंचते हैं, किंतु वाशिंगटन ऐसा नहीं करते थे। कई बार तो ऐसा होता था कि किसी कार्यक्रम में अकेले वाशिंगटन समय पर पहुंचते और शेष अतिथि देर से आते। हालांकि, राष्ट्रपति की समय की ऐसी पाबंदी अन्य अतिथियों को लज्जित होने पर मजबूर कर देती थी। अपने एक-एक क्षण का उपयोग करने वाले वाशिंगटन ने एक...
    November 12, 06:04 AM
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