जीवन दर्शन
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  • वह दिन आंधी और बारिश से भरा हुआ था। वह छोटी-सी चिड़िया अपने लिए आश्रय खोज रही थी। नीम का घना पेड़ दिखते ही वह उसकी एक डाल पर आ बैठी, लेकिन अधिक देर तक नहीं बैठ पाई। उस पेड़ पर रहने वाले कौए उससे लड़ने लगे। उनका कहना था कि यह पेड़ हमारा घर है और हम तुम्हें यहां नहीं रहने देंगे। चिड़िया ने विनती की, बस, आज की रात मुझे यहां रह लेने दो। सुबह मौसम ठीक होते ही मैं यहां से चली जाऊंगी। आज ऐसी भारी बारिश में कहां जाऊं? आप लोग मुझ पर दया कीजिए। किंतु कौए ताे लड़ाकू व स्वार्थी ठहरे। उन्होंने कांव-कांव कर आसमान सिर पर उठा...
    December 20, 01:18 AM
  • किसी राजा को यह विचार आया कि वह अकेले वेश बदलकर संपूर्ण राज्य का भ्रमण करे। विचार को जल्दी ही अमली जामा पहनाया गया और राजा सामान्य व्यक्ति की तरह राज्य भ्रमण पर निकल पड़ा। वह यथासंभव राज्य के हर इलाके में गया ताकि लोगों की जिंदगी की वास्तविकता पता चल सके। उन दिनों लोग पैर में मोटे कपड़े के मोजों का उपयोग चप्पल-जूतों की तरह करते थे। जब राजा भ्रमण से लौटा, तो उसके पैरों में सूजन थी और वे बेतहाशा दर्द कर रहे थे। राजा ने अपने मंत्री को बताया कि मार्ग के कंकड़-पत्थर उसके पैरों में खूब चुभे और पैरों की दशा...
    December 19, 05:08 AM
  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय पंडित मदनमोहन मालवीय का ऐसा सपना था, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने अथक परिश्रम किया। उनके पास इतना धन नहीं था कि इसे साकार रूप दे सकें। अत: उन्होंने बिना संकोच किए दान इकट्ठा किया और विश्वविद्यालय की स्थापना की। विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद उसका उत्तम रीति से संचालन हो, इसकी भी व्यवस्था महामना ने बखूबी की थी। विश्वविद्यालय से संबंधित कोई भी बात उनसे छिपी नहीं रहती थी और वे निरंतर वहां की व्यवस्था दुरुस्त करते रहते थे। एक बार हॉलैंड से कुछ शिक्षाविद्...
    December 18, 04:45 AM
  • अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी राजनीतिक विरोधियों के प्रति सदव्यवहार रखते थे। गलत चीजों के प्रति उनका रुख सख्त था, किंतु सही चीजों के लिए (भले ही राजनीतिक रूप से उनके खिलाफ हों) वे सॉफ्ट कॉर्नर रखते थे। उनके कार्यकाल में मार्टिन लूथर किंग को गिरफ्तार किया गया। किसी को पता नहीं था कि उन्हें कहां कैद कर रखा गया है? इस कारण मार्टिन की पत्नी बहुत परेशान हो गईं। उन्हें चिंता हुई कि उनके पति जीवित भी हैं अथवा मार दिए गए हैं। बहुत प्रयास के बाद भी जब वे सच का पता नहीं लगा पाईं तो उन्होंने एक...
    December 17, 04:30 AM
  • एक विवाहित लड़की प्रतिदिन के तनावों से परेशान थी। जीवन में सुख था, किंतु शांति नहीं थी। परेशान होकर वह मां के पास गई और बोली, मां! जितनी सुखी मैं तुम्हारे पास गरीबी के बावजूद थी, उतनी आज संपन्न जीवन में भी नहीं हूं। तुम ही बताओ कि मैं क्या करूं। मां स्नेह से बोली, चलो, आज तुम्हें कुछ बताती हूं। शायद उससे तुम्हारी समस्या का समाधान हो जाए। मां ने किचन में जाकर तीन कटोरों में पानी उबाला और एक में अंडे, दूसरे में आलू और तीसरे में कॉफी बीन्स डाले। बेटी हैरत से देख रही थी, किंतु कुछ समझ नहीं पा रही थी। कुछ देर...
    December 16, 06:24 AM
  • एक युवक सीढ़ियों से गिरकर घायल हो गया। उसके पिता तत्काल उसे लेकर अस्पताल गए। वहां आवश्यक जांच के बाद पता चला कि युवक के शरीर में तीन-चार जगह गंभीर फ्रेक्चर है। ऑपरेशन की आवश्यकता देखते हुए सीनियर डॉक्टर को बुलाया गया। उन्हें आने में थोड़ी देर लगी। यह देख युवक के पिता क्रोध से अाग बबूला हो गए। कुछ देर तक तो नर्स व अन्य डॉक्टरों पर नाराज होते रहे। फिर जब सीनियर डॉक्टर का आगमन हुआ तो युवक के पिता उनसे लड़ने लगे। उन्होंने कहा, आप लोगों के लिए मरीज इंसान नहीं, मशीन होता है। जब सुविधा हुई तब आकर इलाज...
    December 15, 06:41 AM
  • न्यूयॉर्क के किसी स्कूल की शिक्षिका ने कक्षा के प्रत्येक बच्चे को बुलाया, उसे बताया कि उसका कक्षा में कितना महत्व है और उसे एक नीला फीता भेंट किया, जिस पर सुनहरे अक्षरों में लिखा था, मैं क्या हूं, इससे फर्क पड़ता है। फिर उसने बच्चों को अतिरिक्त फीता देकर किसी को सम्मानित करने को कहा। एक बच्चा उठकर पड़ोस में मौजूद कंपनी में गया और एक जूनियर एग्ज़ीक्यूटिव की बांह पर वह फीता लगाकर कहा, धन्यवाद आपने मुझे कॅरिअर के लिए एक दिन मार्गदर्शन दिया था। फिर उसने उन्हें भी फीता देकर कहा, आप चाहें तो किसी को...
    December 13, 06:43 AM
  • हिंदी साहित्य के मूर्धन्य विद्वान आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी अत्यंत सरल स्वभाव के थे। वे जिस युग में हुए, वह युग सामाजिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ था। समाज में अंधविश्वास, जाितभेद, छुआछूत चरम पर थे। उच्च वर्ण के लोग इन बातों में विश्वास करते थे और कड़ाई से ऐसे सभी नियमों का पालन करते थे। आचार्य द्विवेदी उच्च कुलोत्पन्न होने के बावजूद उसके अहंकार से मुक्त थे। इसके अलावा वे सरस्वती पत्रिका के संपादक भी थे। यह उस जमाने की सर्वश्रेष्ठ व प्रतिष्ठित पत्रिका थी, लेकिन उन्हें इसका भी कोई अभिमान नहीं था।...
    December 12, 05:50 AM
  • वर्ष 1940 की बात है। हंगरी के सर्वश्रेष्ठ निशानेबाज घोषित हुए थे कार्ली टैकास। निशाना अचूक होता था और अपनी इसी प्रतिभा के बल पर उन्होंने अनेक स्पर्द्धाएं जीतीं और अनेक महत्वपूर्ण पदक अपने नाम किए। उनकी अद्वितीय योग्यता के मद्देनजर उनका चयन जापान में होने वाले ओलिंपिक खेलों के लिए किया गया, लेकिन इसी बीच द्वितीय विश्वयुद्ध छिड़ गया। पूरी दुनिया में उथल-पुथल मच गई। हंगरी से भेजी गई सेना में कार्ली टैकास भी थे। अब कार्ली युद्ध के मैदान में थे और पूर्ण मनोयाेग से युद्ध में हिस्सा ले रहे थे।...
    December 11, 05:29 AM
  • सम्राट वायुसेन को उनके राज ज्योतिषी ने अंधविश्वासी बना दिया था। बिना मुहूर्त देखे वे कोई काम नहीं करते थे। प्रजाहित में जल्दी किए जाने वाले काम भी ज्योतिषी के मना करने पर टाल देते। इस कारण प्रजा बड़ी हैरान-परेशान होती। एक बार पड़ोसी राजा ने आक्रमण किया, तो राज ज्योतिषी ने मुहूर्त न होने का कारण देकर जवाबी हमला रोक दिया। परिणामस्वरूप शत्रु सेना नगर में घुस आई और तबाही मचा दी। बुद्धिमान सेनापति के अथक प्रयासों से हार को जीत में बदला जा सका। सभी सभासद सम्राट को इस ज्योतिषी के पाखंड से मुक्त कराना...
    December 10, 05:32 AM
  • दो छोटे बालक परस्पर मित्र थे। वे प्रतिदिन साथ-साथ विद्यालय जाते थे। उनका अध्ययन, खेलकूद, खाना लगभग साथ-साथ ही होता था। विद्यालय जाते वक्त दोनों खूब सारी बातें करते और कभी-कभी किसी बात पर लड़ भी पड़ते। बच्चे ही ठहरे, सो लड़ाई भी अधिक देर तक नहीं चलती और पुन: मित्रता हो जाती। उनमें से एक बच्चा संपन्न परिवार का था और दूसरा निर्धन था। हालांकि मित्रता इससे अप्रभावित थी। परस्पर पर्याप्त स्नेह व सौहार्द था। एक दिन दोनों बच्चे घर से विद्यालय जाने के लिए निकले, तो रास्ते में परस्पर बातचीत की धारा-कुश्ती की...
    December 9, 06:12 AM
  • भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन उद्भट विद्वान थे। वे जब भी किसी विषय पर विचार व्यक्त करते तो वे अत्यंत सारगर्भित होते थे। उनकी दृष्टि सूक्ष्म थी। विचार, ज्ञान व अनुभव से युक्त थे और वाणी में महाओज था, इसलिए राधाकृष्णन जब भी बाेलते, तो सुनने वाले परम आनंदित होते। हिंदुत्व के परम विद्वान डॉ. राधाकृष्णन राष्ट्रीयता के कट्टर हिमायती थे। वे देश की एकता के प्रबल पक्षधर थे और किसी भी आधार पर मनुष्यों के बीच भेदभाव के विरोधी थे। एक बार डॉ. राधाकृष्णन इंग्लैंड गए। उस समय भारत पर...
    December 8, 06:14 AM
  • विख्यात रूसी लेखक मैक्सिम गोर्की का बाल्यकाल अत्यंत निर्धनता व कठिनाइयों में बीता। गोर्की आरंभ से ही पढ़ना चाहते थे, किंतु उनके पिता की इच्छा थी कि वे काम करें। पढ़ाई को उनके पिता पैसे की बर्बादी समझते थे। कई बार ऐसा होता था कि गोर्की कुछ पढ़ते रहते और इसी बात पर पिता उन्हें पीटने लगते थे। कुछ समय तक तो गोर्की ने यह सब सहन किया, किंतु पिता के अत्याचार भी उनकी पढ़ने की इच्छा को कम नहीं कर पाए। यह इच्छा जैसे-जैसे बलवती हुई, वैसे-वैसे गोर्की के दिमाग ने पढ़ने की राह खोजनी शुरू कर दी। उन्होंने कबाड़ी की...
    December 6, 08:03 AM
  • सिकंदर के राज्य में किसी लुटेरे का बहुत आतंक हो गया। यह शातिर लुटेरा अपना काम अत्यंत चतुराई से करता और किसी की पकड़ में नहीं आता। सिकंदर ने पूरी सैन्य शक्ति उसे पकड़ने में लगा दी। कई महीनों के परिश्रम के बाद आखिर एक दिन लुटेरा पकड़ा गया। जब सिपाही उसे सिकंदर के सामने लाए तो सिकंदर ने देखा कि उसके चेहरे पर भय का कोई नामो-निशान नहीं है। सिकंदर उसके साहस को देखकर चकित भी हुआ और सम्राट होने के अहंकार के कारण थोड़ा क्रोध भी आया, क्योंकि उसे अपने सामने खड़े लोगों के चेहरों पर भययुक्त विनम्रता देखने की आदत...
    December 5, 07:47 AM
  • देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू स्वाधीनता आंदोलन के सक्रिय नेताओं में से थे, इसलिए उनकी लाेकप्रियता चरम पर थी। जब भी वे जनता के बीच होते, तो लोगों की भीड़ उन्हें घेर लेती, उन्हें फूलमालाओं से लाद दिया जाता और हर कोई उनके मिलने के लिए लालायित रहता। पं. नेहरू भी किसी को निराश नहीं करते थे और सभी को स्नेह से प्रत्युत्तर देते। एक बार पं. नेहरू की जीप जनता के बीच से होकर गुजर रही थी। पंडितजी खुली जीप में खड़े थे। उनके दर्शनार्थ लाखों लोग सड़क के दोनों ओर खड़े थे। जनता उन्हें जो फूल-मालाएं...
    December 4, 06:39 AM
  • महान वैज्ञानिक आइजक न्यूटन का भौतिक विज्ञान के विकास में अप्रतिम योगदान है। गुरुत्वाकर्षण की खोज और गति के तीसरे नियम ने तो रॉकेट विज्ञान को जन्म दिया है। न्यूटन का विचार था कि कठिनाइयों के बिना उच्च लक्ष्य पूर्ण नहीं होते हैं। अत: जिनके लक्ष्य बड़े हों, उन्हें कठिनाइयों का सामना करने के लिए तत्पर रहना चाहिए। न्यूटन के जीवन का एक उल्लेखनीय प्रसंग है। न्यूटन प्रकाश के सिद्धांतों की खोज में बीस वर्षों से लगे थे। उन्होंने गहन परिश्रम कर अनेक शोध-पत्र इस विषय में तैयार किए थे। संभवत: बहुत शीघ्र ही...
    December 3, 08:06 AM
  • बात 1979 की है। भारत का अंतरिक्ष मिशन एसएलवी-1 असफल हो गया। चारों ओर इसी बात की चर्चा थी। माहौल निराशाजनक था। 11 अगस्त, 1979 को मिशन की असफलता की समीक्षा के लिए इसरो के 70 से अधिक वैज्ञानिकों की बैठक हुई। इस मिशन के डायरेक्टर थे डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम। बैठक में वैज्ञािनकों ने असफलता के अलग-अलग कारण गिनाने शुरू किए। अधिकांश वैज्ञानिकों का मानना था कि नाइट्रिक एसिड के रिसाव के कारण एसएलवी-1 फेल हो गया। डॉ. कलाम के चेहरे पर असंतोष था। वे उठकर खड़े हुए और इसरो प्रमुख प्रो. सतीश धवन को लक्ष्य कर कहा, महाेदय! हालांकि...
    December 2, 05:18 AM
  • रवींद्रनाथ टैगोर के जीवन में काफी उतार-चढ़ाव आए। उनकी पत्नी का देहावसान 1902 में ही हो गया था। काेमल कवि हृदय दु:ख के चरम पर पहुंच गया, किंतु भीतर का सृजनशील मन पराजित नहीं हुआ। 1910 के आते-आते गीतांजलि का प्रकाशन बंगला भाषा में हो चुका था। बंगाल में टैगाेर काफी लाेकप्रिय हो गए थे। हालांकि, इस समय तक उन्हें विदेशों में पहचान नहीं मिली थी। टैगाेर के भतीजे अवनींद्र नाथ इंग्लैंड में थे और वहां एक कलाकार के रूप में उनकी काफी प्रतिष्ठा थी। उनके कारण टैगोर के पास भी कुछ ब्रिटिश कलाकारों का आना-जाना था। एक बार...
    December 1, 05:23 AM
  • अमेरिका के 32वें राष्ट्रपति फ्रैंकलीन रूजवेल्ट की जीवटता अनुकरणीय थी। बात उनकी युवावस्था के दिनों की है। राजनीति में रूजवेल्ट की रुिच आरंभ से ही थी। अवसर मिलने पर उन्होंने स्थानीय चुनाव में हिस्सा लिया। जब वे चुनाव में खड़े हुए तो प्रचार अभियान का महत्वूपर्ण हिस्सा उन्हें ही पूर्ण करना था। रूजवेल्ट ने परिश्रम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ये चुनाव उनके लिए प्रतिष्ठा का विषय थे और वे किसी भी कीमत पर पराजय का मुंह नहीं देखना चाहते थे, इसलिए उन्होंने जोरदार प्रचार अभियान आरंभ किया। अपने आराम का...
    November 29, 06:41 AM
  • भोलानाथ बहुत अंध विश्वासी था। जहां भी किसी ज्योतिषी को देखता, अपना भविष्य पूछने बैठ जाता। कभी कोई उससे शनि की दशा खराब बताकर पूजा आदि के नाम पर पैसे ठग लेता, तो कभी निकट भविष्य में सुनहरी सफलता के सपने दिखाकर पैसे वसूल लेता। एक बार वह किसी यात्रा पर जा रहा था। ट्रेन में उसे एक पाखंडी ज्योतिषी मिला। युवक ने तत्काल अपना हाथ उसके आगे कर दिया। युवक का अंधविश्वास समझकर ज्योतिषी ने कहा, तुम्हारा भविष्य यूं तो उज्जवल है, किंतु एक बात चिंताजनक है। तुम्हारी मां तुम्हारी मृत्यु का कारण बनेगी। युवक ने...
    November 28, 06:47 AM
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