एक दिन भगवान बुद्ध का प्रिय शिष्य आनंद भिक्षाटन हेतु नगर पहुंचा। वहां किसी नदी पर पानी पीने के लिए रुका, तो देखा कि प्रकृति नाम की एक लड़की घड़े से पानी भर रही थी। आनंद ने उससे पानी मांगा, तो उसने अपनी निम्न जाति का हवाला देकर पानी पिलाने से मना किया। तब आनंद ने स्वयं को ऐसे भेदभाव से परे होने की बात कहकर प्रकृति का दिया पानी पी लिया। आनंद तो वापस लौट गया, किंतु प्रकृति उससे प्रभावित हो गई।
उसने आनंद से विवाह का निश्चय कर लिया। अपनी मां से जब प्रकृति ने यह बात कही, तो मां ने आनंद के ब्रrाचर्य व्रत के बारे में उसे बताया। फिर भी वह अड़ गई। तब मां ने आनंद को बुलाकर प्रकृति...