जीवन दर्शन
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  • असली बुद्धिमान की पहचान
    बुद्धिमान व्यक्ति भी अशांत क्यों हो जाता है, यह सोचने वाली बात है। पढ़े-लिखे व्यक्ति के पास जिंदगी की सभी समस्याओं का समाधान होना चाहिए। आप पढ़े-लिखे हों या निरक्षर, शांति की खोज का तरीका दोनों के लिए समान रहेगा। दोनों जीवन में शांति चाहते हैं। हिंदू धर्म में अवतारों की जीवनशैली देखें तो समझ में आ जाएगा कि शांति आदमी के अंदर रहती है। यह तथ्य जितना साफ-साफ समझ में आ जाएगा शांत होना उतना ही आसान हो जाएगा, क्योंकि बुद्धि मनुष्य को बाहर की ओर ले जाती है। बुद्धि का स्वभाव है चीजों को तर्क की दृष्टि से...
    February 16, 07:17 AM
  • किसी नगर के व्यापारी ने कड़ी मेहनत से बहुत पैसा कमाया और वैभवशाली जीवन जीने लगा। एक बार दूसरे शहर से अाए उसके दोस्त ने बातचीत में बताया कि उसके नगर के सबसे संपन्न सेठ की मौत हो गई और फिर सहज ही कह दिया, दोस्त! लाखों की धन-संपत्ति यंू ही पड़ी रह जाती है और मृत्यु एक पल में हमें समाप्त कर देती है। व्यापारी को यह बात गहरे तक छू गई। अब उसे दिन-रात मृत्यु का भय सताने लगा। चिंता और तनाव के चलते वह बीमार रहने लगा। इलाज भी बहुत कराया, लेकिन मन का रोग दवाओं से कैसे ठीक होता? एक दिन व्यापारी की पत्नी किसी ख्यात संत...
    February 14, 07:41 AM
  • वह आज की दुनिया का सफल इंसान था। उसके पास पैसा, नाम, शोहरत सभी कुछ था। घर में स्नेहमयी, समझदार पत्नी और बच्चे थे। किसी चीज की कमी नहीं थी, लेकिन फिर भी वह सदा अशांत बना रहता था। जरा-सा मन के विपरीत हो जाए तो क्रोध आ जाता था। उसके मन के विपरीत करने वाला उसके लिए घृणा का पात्र हो जाता था। पर्याप्त धन होने के बावजूद चाह बनी रहती थी। एक दिन उसने सुना कि मन की उलझने हल करने में माहिर दार्शनिक उसके शहर में आ रहे हैं। वह अपनी समस्या लेकर उनके पास पहुंचा। दार्शनिक ने उसकी सभी बातें सुन लीं और फिर एक ओर जल रहे...
    February 13, 06:57 AM
  • ठेकेदार ने मजदूरों को हुक्म दिया, यह गाड़ी आज मंदिर तक पहुंच जानी चाहिए। ध्यान रखें भगवान की मूर्ति खंडित न हो जाए। कल मूिर्त की स्थापना है। मजदूर सामान सहेजकर गाड़ी में बैठ गए। गाड़ी में भगवान की मूिर्त के साथ संगमरमर की टाइल्स भी ले जाई जा रही थीं, जो मंदिर के फर्श पर लगाई जानी थीं। मजदूर अपनी बातचीत में मशगूल हो गए। इधर, टाइल्स और भगवान की मूिर्त के मध्य संवाद होने लगा। टाइल्स ने भगवान की मूिर्त से कहा, भाई! ईश्वर ने यह पक्षपात क्यों किया? तुम भी पत्थर हो और मैं भी पत्थर हूं। एक ही खदान में हमारा जन्म...
    February 12, 05:45 AM
  • एक विधवा मां ने एकलौते पुत्र को मेहनत-मजदूरी कर खूब पढ़ाया-िलखाया। लड़का शिक्षित तो हो गया, किंतु समझदारी नहीं आई। मां की दी हुई सुविधाओं से वह आलसी हो गया। मां उसे नौकरी करने को कहती तो वह कल पर टाल देता। थक-हारकर मां ने यह कहना बंद कर दिया, किंतु अब वह रोज उसे खाना परोसकर यह अवश्य कहती, बेटा! ठंडी रोटी खा लो। लड़का समझ नहीं पाता कि मां गर्म रोटी को ठंडी रोटी क्यों कहती हैं? कुछ दिनों बाद मां ने उसका विवाह कर दिया। लड़का तब भी नहीं सुधरा और कोई काम नहीं खोजा। फिर एक दिन मां को किसी काम से बाहर जाना था, तो वह...
    February 10, 05:59 AM
  • एक बंजारा बैलों पर मिट्टी लादकर दिल्ली आ रहा था। रास्ते में पड़ने वाले गांवों में उसकी मुल्तानी मिट्टी का आधा हिस्सा बिक गया। बोरे आधे खाली होने सेे बैलों की पीठ पर टिक नहीं पा रहे थे। तब बंजारे ने नौकरों से कहा, बोरों के एक तरफ बालू रेत भर लो। हम अभी राजस्थान की जमीन पर खड़े हैं। यहां तो हर ओर रेत है। आगे चलते हुए इस काफिले को दिल्ली का व्यापारी मिला। उसने कहा, तुम लोग मूर्ख हो। बैलों को व्यर्थ ही कष्ट दे रहे हो। रेत फेंककर मिट्टी आधा-आधा कर बैलों पर रखो। कम भार होने से बैल तेज चलेंगे। तब बंजारे ने...
    February 9, 05:48 AM
  • एक चोर महान बौद्ध गुरु नागार्जुन के आकर्षण में खिंचा चला आया। उसने ऐसा गरिमामय व्यक्तित्व नहीं देखा था। उसने नागार्जुन से पूछा, क्या मेरे उद्धार की भी कोई संभावना है। फिर जल्दी से बोला, एक बात स्पष्ट कर दूं। मैं चोर हूं और चोरी छोड़ नहीं सकता, इसलिए इसे छोड़ने को मत कहना। गुरु बोले, तुम्हारे चोर होने की कौन बात कर रहा है। चोर ने कहा कि वह जिस भी साधु-महात्मा के यहां गया उसने चोरी छोड़ने को कहा। नागार्जुन ने हंसकर कहा, तुम जरूर चोरों के यहां गए होंगे वरना उन्हें इसकी क्यों चिंता होनी चाहिए। अब जाओ और जो...
    February 7, 06:58 AM
  • जातक कथा के अनुसार राजगृह के निकट वन में एक समझदार मृग रहता था। एक दिन उसकी बहन अपने बेटे को लेकर आई और बोली, भैया! अपने भांजे को जीवन सुरक्षित व सुचारू ढंग से जीने के गुर सिखा दो। मैं नहीं चाहती कि अनुभवहीनता की वजह से उसे किसी संकट का सामना करना पड़े। बहन के आग्रह को मानकर मृग ने भांजे को छह माह प्रशिक्षण दिया। एक दिन नन्हा मृग अपने मित्रों के साथ वन में घूम रहा था। तभी वह शिकारी के फंदे में फंस गया। उसके मित्र लाख कोशिशों के बावजूद उसे छुड़ा नहीं पाए। घबराकर वे उसकी मां के पास पहुंचे और सारी बात...
    February 6, 06:03 AM
  • दिल्ली का एक संपन्न व्यापारी बादशाह अकबर के पास आया और उसने शिकायत की, हुजूर! मेरी कुल जमा नकद धन रािश की थैली चोरी हो गई है। कृपा कर मुझे वह दिलवाइए अन्यथा बर्बाद हो जाऊंगा। अकबर ने बीरबल से यह मामला सुलझाने के लिए कहा। बीरबल ने व्यापारी से पूछा, क्या तुम्हें किसी पर शंका है? व्यापारी बोला, मुझे लगता है कि मेरे किसी नौकर ने ही यह चोरी की है, किंतु सबूत के अभाव में मैं किसी का नाम नहीं ले सकता। बीरबल ने उसे घर जाने को कहा। अगले दिन बीरबल, व्यापारी के घर पहुंचा और उसके सभी नौकरों को बुलाकर उन्हें एक-एक...
    February 5, 05:02 AM
  • एक व्यापारी अपने काम-काज को लेकर बहुत तनाव में रहता था। व्यापार में लाभ-हानि चलते रहते है, किंतु वह इसकी चिंता में दिन-रात घुलता रहता। इसका असर उसके पारिवारिक जीवन पर भी पड़ रहा था। पत्नी-बच्चों से भी वह प्राय: विवाद कर बैठता था। मित्रों से भी अनबन होती रहती थी। स्वयं उसका भी स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता था। एक दिन उसका एक मित्र उसे एक ज्ञानी के पास ले गया। ज्ञानी ने उससे पूछा, यदि मैं एक संतरे को दबाकर निचोड़ूंगा तो उसमें से क्या निकलेगा? व्यापारी ने उत्तर दिया, संतरे का रस ही निकलेगा। ज्ञानी ने फिर...
    February 4, 05:26 AM
  • अपने एकमात्र पुत्र की पत्नी को सास बहुत स्नेह से रखती थी। बहू भी सास के स्नेह से अभिभूत हो संपूर्ण परिवार के प्रति समर्पित थी। उसका सद्व्यवहार परिवार में बहुत प्रशंसा पाता था और सास के लिए तो बहू आंख का तारा ही थी। एक दिन उनके परिवार में कोई दूर के रिश्तेदार का आगमन हुआ। बहू ने भोजन बनाकर बड़े ही स्नेह से उन्हें खिलाया। पूरा काम निपटाकर जब बहू सोने जा रही थी, तो उसने रिश्तेदार से सास को यह कहते सुना, मेरे विचार से बेटी शक्कर की तरह होती है और बहू नमक की भांति होती है। बहू को यह सुनकर बहुत बुरा लगा। वह...
    February 3, 04:54 AM
  • एक दर्जी कपड़ों की आला दर्जे की सिलाई करता था, किंतु पैसे वाजिब ही लेता था। नतीजतन उसकी आर्थिक स्थिति औसत ही थी, पर वह अपने जीवन से संतुष्ट था। अपने बेटे को भी दर्जी सदैव अच्छी बातें सिखाता था। एक दिन बेटे का स्वास्थ्य ठीक नहीं था, इसलिए वह स्कूल नहीं गया। उसकी मां ने उसे दवा दी और आराम करने के लिए कहा, लेकिन लड़के को बिस्तर पर पड़े रहना अच्छा नहीं लग रहा था। इसलिए वह नीचे जाकर पिता को काम करते हुए देखने लगा। उसने गौर किया कि उसके पिता कैंची से कपड़े काटते हैं और फिर उसे पैर के पास दबाकर रख देते हैं।...
    February 2, 04:42 AM
  • प्रख्यात वैज्ञानिक व नोबेल पुरस्कार से सम्मानित भौतिकशास्त्री सर सीवी रमन को अपने विभाग के लिए योग्य वैज्ञानिक की आवश्यकता थी। उन्होंने अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित करवाया, जिसे पढ़कर उनके पास कई आवेदन आए। रमन ने उनमें से कुछ का चयन किया और उन्हें साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया। इनमें एक नवयुवक भी था, जिसे रमन ने अस्वीकार कर दिया था। थोड़ी देर बाद जब साक्षात्कार समाप्त हो गया तो रमन ने गौर किया कि वह नवयुवक अब भी उनके कार्यालय के आस-पास घूम रहा है। वे तत्काल उसके पास पहुंचे और नाराजगी...
    January 31, 04:25 AM
  • स्वभाव से अत्यंत मितभाषी एक चित्रकार दिन-रात काम में डूबा रहता। उसका मानस सदैव चित्रों के नए-नए विषय खोजने में लगा रहता। कभी उसके चित्रों में कल्पना के भावभीने रंग होते, तो कभी यथार्थ का कड़वापन झलकता। रंगों की दुनिया में मस्त रहने वाले इस चित्रकार ने विवाह भी नहीं किया, क्योंिक उसे घर-गृहस्थी में पड़कर अपनी चित्रकारी के शौक से समझौता करना कतई गवारा नहीं था। माता-पिता जीवित थे तो शादी के लिए उस पर दबाव डालते रहते थे। उनके बाद चित्रकार अकेला अपनी दुनिया में डूब गया। एक बार उसका सामना विचित्र...
    January 30, 06:50 AM
  • अपने जीवन के 40 वर्ष पूर्ण कर चुके, लेनिन ग्रांट की अब तक कोई पहचान नहीं बन पाई थी। उसने विभिन्न प्रकार के काम किए, लेकिन सफलता उससे दूर ही रही। अपने विद्यार्थी जीवन में भी वह कोई उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल नहीं कर पाया। वस्तुत: ग्रांट अपनी योग्यता और क्षमता को ठीक से पहचान ही नहीं पाया था। 32 वर्ष की आयु में उसे अयोग्य मानकर नौकरी से निकाल दिया गया। बेरोजगार ग्रांट ने फिर काम की खोज की। उसे कस्टम हाउस में रख लिया गया। कुछ समय बाद ग्रांट को उस नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा। काम की तलाश पुन: शुरू हुई। अबकी बार...
    January 29, 06:54 AM
  • ध्यानचंद हॉकी के महान खिलाड़ी थे और उतने ही बड़े राष्ट्रभक्त भी थे। अपने खेल से देश का नाम रोशन करने में उन्हें हािर्दक प्रसन्नता होती थी। एक बार जर्मनी में ध्यानचंद को हाॅकी खेलने जाना था। सदा की तरह उन्होंने पर्याप्त अभ्यास किया और अपनी टीम के साथ जर्मनी पहुंचे। जर्मनी में उन दिनों हिटलर का शासन था। चूंकि उनको अपने देश पर बहुत गर्व था, इसलिए जर्मनी और भारतीय टीम के बीच मैच देखने वह भी आया। ध्यानचंद ने हिटलर की मौजूदगी में अत्यंत सहजता से अपना बेहतरीन खेल खेला। तानाशाह हिटलर ध्यानचंद के खेल से...
    January 28, 05:13 AM
  • दुर्ग के एक अंधेरे कोने में लोहार दिन-रात काम करके राज्य के सैनिकों के लिए अस्त्र-शस्त्र बनाने में लगा रहता। लोहे व इस्पात पर उसे अनोखी महारत हासिल थी। वह योद्धाओं के पिता जैसा था, जो शस्त्रों की मरम्मत के लिए उसके पास आते। लोहार उन्हें सत्य, बहादुरी और मन में चल रहे और भी बड़े युद्ध की बातें बताता। इस तरह वह सैनिकों में मूल्यों की स्थापना करता। उसका काम बढ़ता जा रहा था, क्योंकि मंत्री को खून-खराबा पसंद था। वह राजा को गलत सलाह देता। एक दिन लोहार को पता चला कि मंत्री राजा को कोई दवा दे रहा है ताकि उसका...
    January 24, 07:12 AM
  • दुर्ग के एक अंधेरे कोने में लोहार दिन-रात काम करके राज्य के सैनिकों के लिए अस्त्र-शस्त्र बनाने में लगा रहता। लोहे व इस्पात पर उसे अनोखी महारत हासिल थी। वह योद्धाओं के पिता जैसा था, जो शस्त्रों की मरम्मत के लिए उसके पास आते। लोहार उन्हें सत्य, बहादुरी और मन में चल रहे और भी बड़े युद्ध की बातें बताता। इस तरह वह सैनिकों में मूल्यों की स्थापना करता। उसका काम बढ़ता जा रहा था, क्योंकि मंत्री को खून-खराबा पसंद था। वह राजा को गलत सलाह देता। एक दिन लोहार को पता चला कि मंत्री राजा को कोई दवा दे रहा है ताकि उसका...
    January 24, 06:14 AM
  • नेताजी सुभाषचंद्र बोस के मन में विद्यार्थी जीवन से ही गरीब व दलित वर्ग के प्रति सहानुभूति थी। एक बार कोलकाता में हैजा फैल गया। सारे धनी लोग शहर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए। गुलामी के उन दिनों में भारतीयों के लिए कोई बेहतर उपचार सेवा दूर की कौड़ी थी, इसलिए नेताजी ने गरीब रोगियों के उपचार का बीड़ा उठाया। हालांकि, गरीब बस्तियों में कुछ उपद्रवी तत्व उनकी इस पहल में कोई निहित स्वार्थ देखते थे। उन्होंने नेताजी को धमकाया, खबरदार! फिर यहां आए तो। नेताजी ने बहादुरी से जवाब दिया, आप यदि मुझे मार डालना...
    January 23, 06:45 AM
  • भगवान महावीर भ्रमण करते हुए एक दिन मोराक सन्निवेश में आए। वहां दूरज्जन्तक ऋषि के आश्रम में कुलपति के आग्रह पर रुक गए। कुलपति ने उन्हें वहीं पर्णकुटी बनाने का निवेदन किया। महावीर इस स्नेहाग्रह को नहीं टाल सकेे। चूंकि उस समय मोराक में पर्याप्त वर्षां नहीं हुई थी, इसलिए जलस्रोत रीते पड़े थे। मनुष्य तो पानी की व्यवस्था जैसे-तैसे कर लेते थे, किंतु पशु-पक्षी बहुत परेशान थे। आसपास की गायें घास की तलाश में आश्रम आ जातीं और वहां बनी पर्णकुटियों की घास खींच-खींचकर खाने लगतीं। फिर आश्रमवािसयों द्वारा...
    January 22, 05:21 AM
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