जीवन दर्शन
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  • बरसों पहले की बात है। लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों की कुछ मांगें थीं, जो लंबे समय से विश्वविद्यालय प्रशासन के पास लंबित थीं। धीरे-धीरे छात्रों में असंतोष पनपने लगा। वे चाहते थे कि उनकी मांगों पर शीघ्रातिशीघ्र विचार कर फैसला लिया जाए। एक दिन विश्वविद्यालय के भीतर कांग्रेस के मंत्रियों एवं अन्य प्रतििष्ठत हस्तियों की बैठक चल रही थी। जब छात्रों को यह मालूम पड़ा तो वे एकमत होकर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर धरना देकर बैठ गए। उन्होंने जोर-जोर से सरकार के विरुद्ध नारे लगाने शुरू कर दिए। छात्र...
    06:43 AM
  • वीर सावरकर को राजद्रोह के आरोप में दो आजन्म कारावासों की सजा सुनाई गई थी। अंडमान जेल में उन्हें सवेरे उठते ही कोल्हू चलाना पड़ता। कोल्हू में नारियल की गरी पड़ते ही वह इतना भारी चलता कि बलिष्ठ शरीर के बंदी भी उसकी 20 फेरियां करके रोने लगते थे। कोल्हू के डंडे को हाथ से उठाकर आधे रास्ते तक चला जाता और उसके बाद का आधा गोला पूरा करने के लिए डंडे पर लटकना पड़ता, क्योंकि तब तक हाथों की शक्ति समाप्त हो चुकी होती थी। जब कोल्हू में काम करते हुए सावरकर प्यास के मारे बेहाल हो जाते, तो उन्हें पानी नहीं दिया जाता और...
    October 18, 07:21 AM
  • विद्यालय में इतिहास की कक्षा चल रही थी। अध्यापक बच्चों को पाठ लिखा रहे थेे, किंतु एक छात्र चुपचाप बैठा हुआ था और लिख नहीं रहा था। थोड़ी देर बाद अध्यापक ने बोलते-बोलते पूरी कक्षा पर निगाह डाली, तो उन्हें उस छात्र पर शंका हुई। उन्होंने पास जाकर देखा तो पाया कि वास्तव में उसने अपनी कॉपी पर कुछ भी नहीं लिखा था। अध्यापक को क्रोध आ गया। उन्होंने उससे न लिखने का कारण पूछा तो वह बोला, गुरुजी! आपने जो कुछ भी लिखाया है, वह मुझे अक्षरश: याद है, इसलिए मैं नहीं लिख रहा हूं। जवाब सुनकर अध्यापक का क्रोध और बढ़ गया।...
    October 17, 07:34 AM
  • घटना उन दिनों की है, जब बगदाद में खलीफा उमर का शासन था। वे अपनी प्रजा के सच्चे अर्थों में संरक्षक थे। उनके राज में कभी प्रजा अत्याचार का शिकार नहीं हुई। खलीफा नेकदिल और इंसाफ पसंद व्यक्ति थे। नियमों का पालन उनकी प्रजा से लेकर हर खास अधिकारी तक होता था। वे स्वयं भी नियमों के पाबंद थे। अनुशासनप्रियता उनके स्वभाव में थी। एक बार उन्हें शिकायत मिली कि राज्य में शराबियों का उत्पात बढ़ रहा है। खलीफा नैतिक मूल्यों को लेकर भी अत्यंत सजग थे। उन्होंने अपने राज्य के शराबियों की शराब की लत छुड़ाने के लिए...
    October 16, 05:46 AM
  • बात उस समय की है, जब फ्रांस की सबसे बड़ी नदी सैन में जबर्दस्त बाढ़ आई हुई थी। शाम का समय था। एक लड़का नदी पर बने बांध से घर जा रहा था। अचानक उसने देखा कि बांध में एक जगह छेद हो गया है और उसमें से पानी रिस रहा है। लड़का समझदार था। वह समझता था कि बांध से पानी रिसने के कितने भयावह परिणाम हो सकते हैं। पानी के दबाव से छेद बढ़ता जाएगा और फिर हो सकता है कि बांध का बड़ा हिस्सा ही ढह जाए। फिर तो पूरा नगर पानी में डूब जाएगा, यह विचार कर उसने छेद वाली जगह पर ढेर सारी मिट्टी डाल दी। पानी का रिसाव कुछ देर रुका भी, किंतु वेग...
    October 15, 05:44 AM
  • अपने भाई के दुर्व्यवहार से तंग आकर बेंजामिन फ्रेंकलिन ने 17 वर्ष की आयु में बोस्टन छोड़ दिया। जब वे यहां से न्यूयाॅर्क पहुंचे तो काफी प्रयासों के बावजूद उन्हें कोई काम नहीं मिला। एक दिन वे किसी छापेखाने से निराश होकर लौट ही रहे थे कि वहां के मालिक- कीमर ने उन्हें पुकारा, मेरा एक हैंड प्रेस खराब पड़ा है। क्या तुम उसे ठीक कर सकते हो? फ्रेंकलिन ने हैंड प्रेस देखने के बाद कीमर से कहा, मैं इसे ठीक तो कर सकता हूं, किंतु इस काम में पूरा दिन लग सकता है। क्या आप मुझे पूरे दिन की मजदूरी देंगे? कीमर ने फ्रेंकलिन को...
    October 14, 06:02 AM
  • जॉन रस्किन प्रसिद्ध ब्रिटिश विचारक थे। उनकी सोच जीवन के प्रति बहुत सकारात्मक थी। वे परेशानियों से न तो कभी घबराते और न ही उसका किसी के सामने अधिक उल्लेख करते। उनके साथ जो भी रहता वह उनसे प्रेरणा ही पाता था। रस्किन अपने सभी मित्रों को कष्टों के बीच सहज रहने की तरकीबें बताया करते थे। एक दिन रस्किन के मित्र उनसे मिलने आए। दोनों की बातचीत के दौरान कहीं जाने के विषय में तय हुआ। घर से रवाना होकर जब दोनों लंदन की गलियों से गुजर रहे थे तो देखा कि रास्ता किसी कारणवश कीचड़ से भरा हुआ था। रस्किन उस अस्वच्छ...
    October 13, 07:34 AM
  • प्रख्यात वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडीसन उन दिनों संघर्षरत थे। उनका सक्रिय दिमाग और जिज्ञासु वृत्ति उन्हें निरंतर प्रयाेगों के प्रति आग्रही बनाकर रखते थे। कुछ अनोखा और महत्वपूर्ण करने की चाह एडीसन के मन में जोर मारती थी। वे दिन-रात काम में जुटे रहते थे। एक दिन रात में एडीसन पेट्रोमैक्स की रोशनी में काम कर रहे थे। उसमें बार-बार तेल खत्म हो जाता तो उन्हें तेल भरने के लिए काम छोड़कर उठना पड़ता। वे परेशान हो गए। फिर सोचा कि क्यों न ऐसा कुछ करें, जिससे यह बार-बार तेल भरने का झंझट ही समाप्त हो जाए। उन्होंने...
    October 10, 07:38 AM
  • अर्से पहले की बात है। पश्चिम बंगाल में छोटे-सा स्टेशन गुष्करा है। एक दिन रेलगाड़ी रोज की तरह स्टेशन पर आकर रुकी। जिन लोगों को चढ़ना था, वे तेजगति से चढ़ने लगे और उतरने वाले भी शीघ्रता से उतरने लगे। इस आपाधापी में एक बुजुर्ग स्त्री बड़ी कठिनाई से किसी तरह भीड़ में राह बनाकर रेलगाड़ी से नीचे उतरने में तो कामयाब रही, किंतु वह अपनी गठरी नहीं उतार पाई। बहुत प्रयास के बाद भी उससे गठरी का बोझ संभाला नहीं जा रहा था। गठरी ट्रेन के डिब्बे के दरवाजे पर रखी रह गई। उसने चढ़ते-उतरते लोगों से बड़ी दीनतापूर्वक प्रार्थना...
    October 9, 07:08 AM
  • एक राजा ने मंत्री परिषद के समक्ष तीन प्रश्न किए, सबसे अच्छा मित्र कौन है? सबसे अच्छा समय कौन-सा? सबसे अच्छा काम कौन-सा? सभी ने अलग-अलग उत्तर दिए। किसी ने कहा कि ज्योतिषी द्वारा निर्धारित समय, कर्म तथा मित्र श्रेष्ठ हैं तो किसी ने राजा के मित्र के रूप में मंत्री और सेनापति के नाम सुझाए, किंतु राजा को किसी भी उत्तर से संतोष नहीं हुआ। फिर राजा को प्रधानमंत्री ने सलाह दी कि वन में ज्ञानी ऋषि रहते हैं। वे उनका समाधान कर सकते हैं। राजा वहां पहुंचा तो देखा कि कुटिया में ऋषि नहीं हैं। बगल के खेत में बुजुर्ग...
    October 8, 06:37 AM
  • प्रश्नोपनिषद में उल्लेख है कि एक बार भार्गव ऋषि ने महर्षि पिप्पलाद से प्रश्न किया कि प्राणियों के शरीर को धारण और प्रकािशत करने वाले देवता कौन हैं और इनमें सर्वश्रेष्ठ कौन हैं? इसके उत्तर में महर्षि पिप्पलाद ने यह आख्यान सुनाया- एक बार मानव शरीर के प्रकाशक चौदह देवता, पांच ज्ञानेंद्रियां, पांच कर्मेंद्रियां, मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार सर्वश्रेष्ठ बताकर विवाद करने लगे। हर एक ने कहा यदि मैं न रहूं तो शरीर समाप्त हो जाएगा। बहुत देर तक विवाद के बाद भी निर्णय नहीं हुआ। तब इतनी देर से यह सब देख-सुन...
    October 7, 06:52 AM
  • भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू समय के पाबंद थे। वे प्रात:काल जल्दी उठते थे और बंधे हुए समय पर अपने नित्य कर्मों को निपटाते थे। उन्हें विलंब किसी भी कार्य में पसंद नहीं था और न ही वे समय को किसी ऐसे कार्य पर बर्बाद करते थे, जो महत्वपूर्ण न हो। एक दिन नेहरूजी प्रात:काल उठे और अपने नियमित कामों को निपटाने लगे। इसी क्रम में सुबह 5 बजे जब वे दाढ़ी बना रहे थे, तो दरबान ने बताया कि गांव के एक नेताजी उनसे मिलने आए हैं। नेहरूजी ने सोचा कि इतनी सुबह यदि कोई मिलने आया है तो अवश्य ही जरूरी काम से...
    October 6, 06:21 AM
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