Home >> Abhivyakti >> Jeevan Darshan
  • सेतब्या नामक शहर में दो व्यापारी भाई थे महाकाल और चुलकाल। एक बार व्यापार के संबंध में यात्रा के दौरान उन्हें भगवान बुद्ध के प्रवचन सुनने का अवसर मिला। प्रवचन के बाद महाकाल ने बुद्ध से अपने संघ में शामिल करने की अनुमति मांगी। चुलकाल भी देखादेखी भिक्षु बन गया पर उसका इरादा संघ से बाहर आने और साथ में अपने भाई को भी बाहर लाने का था। महाकाल अपनी साधना के प्रति गंभीर था और जल्द ही उसने अरिहंत की स्थिति प्राप्त कर ली। एक बार बुद्ध दोनों भाइयों व संघ सहित सेतब्या शहर के पास एक जंगल में ठहरे। वहां चुलकाल...
    04:19 AM
  • मुगलकाल में एक सामंत था। नाम था- बलवंत राय। वह खाने का बहुत शौकीन था। उसके दरबार में प्राय: दावतों के आयोजन होते और उनमें विविध प्रकार के व्यंजन बनाए जाते। इन दावतों के दौरान मनोरंजन भी साथ चलता। नर्तकियों के नृत्य, बहुरूपियों के तमाशे तो होते साथ ही बलवंत राय प्राय: किसी न किसी दरबारी को निशाना बनाकर उसका सार्वजनिक उपहास करने से भी नहीं चूकता था। उसकी इस आदत से सभी को चिढ़ होती, किंतु राजा को कौन टोक सकता था? एक बार ऐसी ही एक दावत का आयोजन चल रहा था। बलवंत राय के पास उसका मंत्री बैठा था। दोनों के...
    April 24, 02:46 AM
  • अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति थे- टॉमस जैफरसन। जैफरसन साधारण कृषक परिवार से थे और इस कारण कृषकों व मजदूरों के प्रति सहानुभूति रखते थे। वे उनकी समस्याओं को भी भली-भांति जानते थे और चाहते थे कि अमेरिका में एक आदर्श कृषि प्रधान समाज की स्थापना हो। राष्ट्रपति बनने के बाद भी जैफरसन की सादगी यथावत रही और वे उच्चवर्गीय जीवनशैली से दूर रहकर साधारण लोगों की तरह ही रहे। उन्हीं दिनों जैफरसन एक बड़े होटल में अकेले गए और वहां ठहरने के लिए होटल मालिक से एक कमरा मांगा। चूंकि वे उस समय कृषकों जैसी साधारण...
    April 23, 03:20 AM
  • जब दिल्ली का शहंशाह अकबर था, एक बहुरूपिया बहुत लोकप्रिय था। वह भांति-भांति के रूप धरकर लोगों को चमत्कृत कर देता था। उसकी ख्याति जब अकबर के कानों तक पहुंची तो उन्होंने भी उसके करतब देखने की इच्छा व्यक्त की। जिस स्थान पर बहुरूपिया खेल दिखाता था, एक दिन अकबर अपने लाव-लश्कर के साथ वहीं पहुंच गए। बहुरूपिये ने अनेकानेक वेश धारण किए। अंत में वह बैल का रूप धारण कर आया। वह हूबहू बैल ही लग रहा था। दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। एक छोटा-सा लड़का भी यह खेल देख रहा था। उसने जमीन से एक कंकड़ उठाकर बैल बने...
    April 22, 04:12 AM
  • चीन में एक युवा भिक्षु था। वह बौद्ध धर्म का बहुत गंभीरता से अध्ययन करता। भगवान बद्ध की शिक्षाओं को सुनता, गुनता और उन्हें अपने जीवन में उतारने की कोशिश करता। उसकी गंभीरता का विहार में मौजूद अन्य भिक्षुओं पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता। एक दिन बौद्ध ग्रंथों का अध्ययन करते हुए उसने ऐसी कोई बात पढ़ ली जो उसे बिल्कुल भी समझ में नहीं आई। बार-बार पढऩे पर भी जब अर्थ स्पष्ट नहीं हुआ तो वह उसके समाधान के लिए अपने गुरु के यहां पहुंचा। जब गुरु ने प्रश्न सुना तो वे जोर-जोर से हंसने लगे। हंस-हंसकर वे दोहरे हुए जा रहे...
    April 21, 03:22 AM
  • रोमन इतिहास में विख्यात सम्राट जूलियस सीज़र का जन्म एक अत्यंत अभिजात्य रोमन कुल में हुआ था। इस कुल के लोग स्वयं को वीनस देवी का वंशज मानते थे। स्वाभाविक रूप से उच्च कुलोत्पन्न होने का अहंकार सीज़र को विरासत में मिला था। उसने रोमन गणतंत्र में स्वयं को तानाशाह के रूप में स्थापित कर लिया था। वह अपने साम्राज्य से संबंधित सारे निर्णय अकेला लेता था। कहने को तो प्रशासकीय निर्णय रोमन सीनेट की बैठक में लिए जाते थे, किंतु वास्तव में राजसत्ता का प्रमुख केंद्र सीज़र का महल था। वह विचार-विमर्श भले ही सभी...
    April 19, 02:26 AM
  • एक जंगल में एक धूर्त लोमड़ी रहती थी। वह प्राय: अपनी धूर्तता से भोले-भाले छोटे जानवरों को अपने वाग्जाल में फंसाकर उनका शिकार कर लेती थी। वह इतना मीठा बोलती कि जानवर उस पर सहज ही विश्वास कर लेते थे। एक बार लोमड़ी शिकार की तलाश में निकली। उसने रास्ते में एक मुर्गे को पेड़ की ऊंची डाल पर बैठे देखा। लोमड़ी के मुंह में पानी भर आया। अब इतनी ऊंची डाल तक तो लोमड़ी पहुंच नहीं सकती थी। सोचा कि मुर्गे को किसी तरह अपने विश्वास में लेकर नीचे उतारा जाए। वह पेड़ के नीचे गई और मुर्गे से दुआ-सलाम कर अपनी आवाज में...
    April 18, 04:10 AM
  • प्राचीन काल में किसी राजा का एक ही पुत्र था। राजा ने उसे अच्छे संस्कार दिए थे, इसलिए वह सर्वथा सही राह पर था। दुर्भाग्यवश राजकुमार की मित्रता सेनापति के पुत्र से हो गई, जो अत्यंत अविवेकी और चरित्रहीन था। राजा ने बेटे को समझाने का प्रयास किया, किंतु उसे सेनापति के पुत्र का साथ सुहाता था इसलिए उसने मित्रता नहीं छोड़ी। कुसंगति में लड़का बिगड़ न जाए, अपने मन का यह भय राजा ने अपने बुद्धिमान मंत्री से साझा किया। मंत्री ने समस्या के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। अगले दिन मंत्री शाही बगीचे में पहुंचा।...
    April 17, 02:32 AM
  • प्राचीन लोककथा है। एक बार पशुओं और पक्षियों में विवाद हो गया। दोनों स्वयं को एक-दूसरे से अधिक ताकतवर बता रहे थे। दोनों पक्षों के बीच तर्क-वितर्क हो रहा था, जिसने कुछ समय बाद संघर्ष का रूप ले लिया। निर्णय कराने वाला कोई नहीं था। अत: दोनों पक्ष अपनी पूरी ताकत से लडऩे लगे। चमगादड़ों ने इस लड़ाई में किसी का पक्ष नहीं लिया। उन्होंने सोचा, हम पक्षियों की तरह उड़ते हैं अत: पक्षियों में शामिल हो सकते हैं। दूसरी ओर हमारे पक्षियों जैसे पंख नहीं होते और हम उनकी तरह अंडे भी नहीं देते। हम तो स्तनपायी हैं। अत:...
    April 16, 01:58 AM
  • एक बार ईरान के बादशाह ने अकबर को पत्र लिखकर 15 दिनों के लिए बीरबल को ईरान बुला लिया। वहां बीरबल ने अपनी चतुराई व ज्ञान से जल्दी ही बादशाह को प्रभावित कर लिया। इससे उनके कई दरबारियों को ईष्र्या हुई, क्योंकि बीरबल के आने से उनका महत्व घट गया। एक दिन बादशाह ने बीरबल से कहा, तुम दुनिया के अनेक देशों का भ्रमण कर चुके हो और वहां के राजाओं से मिले हो। क्या तुमने कहीं मेरे जैसा दयालु, सहृदय, उदार और न्यायशील राजा देखा है? बीरबल ने उत्तर दिया, बादशाह! आप तो पूनम के चांद के समान हैं। अन्य किसी राजा की तुलना आपके...
    April 15, 02:24 AM
  • भारत के महान समाज सुधारक और आधुनिक भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर को अपनी बाल्यावस्था से ही सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। तब भारतीय समाज में छुआछूत का बड़ा बोलबाला था। वे इससे बहुत दु:खी हो जाते थे और मन में संकल्प करते थे कि एक दिन वे इस व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाएंगे। उनके इस संकल्प को मजबूत करने वाली एक घटना उनके बचपन में घटी। एक दिन तेज धूप में विद्यालय से घर लौटते समय उन्हें प्यास लगी। रास्ते में कुआं देखकर उसमें से पानी निकाला और हाथ-मुंह धोकर पानी पीने लगे। तभी एक...
    April 14, 03:09 AM
  • प्राचीन जापान में एक सम्राट बहुत सनकी था। वह छोटी-छोटी गलतियों के लिए बड़ा दंड दे देता था। इसलिए प्रजा उससे बहुत भयभीत रहती थी। सम्राट के पास बीस फूलदानियों का एक अति सुंदर संग्रह था, जिस पर उसे बड़ा गर्व था। वह अपने महल में आने वाले अतिथियों को यह संग्रह अवश्य दिखाता था। एक दिन फूलदानियों की नियमित सफाई के दौरान सेवक से एक फूलदानी टूट गई। सम्राट तो आगबबूला हो गया। उसने सेवक को फांसी पर लटकाने का हुक्म दे दिया। राज्य में खलबली मच गई। एक फूलदानी टूटने की इतनी बड़ी सजा पर सभी हैरान रह गए। सम्राट से...
    April 12, 04:58 AM
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