Home >> Abhivyakti >> Jeevan Darshan
  • कौशल नरेश की रानी इतनी नाजुक मिजाज थी कि अधखिली कलियों के बिछौने पर ही उसे नींद आती थी। एक रात कुछ खिली हुई कलियां भी आ गईं। उनकी पंखुड़ियों से रानी के शरीर में चुभन होने लगी और नींद उसकी आंखों से कोसों दूर भाग गई। उसकी दशा देखकर राजा के मुंह से निकल गया, मजदूरों को तो ठंडी जमीन और पत्थरों पर भी नींद आ जाती है और तुम्हें फूल भी चुभ रहे हैं। इन शब्दों ने रानी को आहत कर दिया। उसने राजसी वेशभूषा त्यागकर मजदूर का जीवन अपनाने की घोषणा कर दी। उसने राजा से कहा कि वह दो वर्ष तक उसकी खोज बिल्कुल नहीं करेगा। दो...
    September 16, 07:26 AM
  • एक ब्राह्मण निर्धन होने के बावजूद अत्यंत उदार था। वह हवन-यज्ञादि कर्मों से जो भी प्राप्त करता, उसे असहायों में बांट देता। एक बार ब्राह्मण किसी सेठ के यहां हवन कराने गया। हवन के बाद सेठ ने ब्राह्मण को अनेक पकवानों से सज्जित थाली पर भोजन हेतु बैठाया। ब्राह्मण ने सोचा कि इससे तो कम से कम तीन निर्धनों की भूख मिटाई जा सकती है। उसने सेठ से अाग्रह किया कि वह उस भोजन को घर जाकर ग्रहण करेगा। ब्राह्मण जब वह भोजन लेकर बाहर आया तो रास्ते में जो भी भूखा मिला, उसे उसने भरपेट खिलाया। अंत में जो कुछ बचा, उसे...
    September 15, 07:02 AM
  • रमण महर्षि के एक भक्त के युवा बेटे का निधन हो गया। वह बहुत दुखी होकर उनके पास आया और कुछ प्रश्न पूछे जिनसे उसका दु:ख प्रकट हो रहा था। महर्षि ने उससे कहा, खुद से पूछो कि कौन दु:खी हो रहा है। हालांकि, इससे उसका समाधान नहीं हुआ। फिर महर्षि ने कहा, मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूं। राम और कृष्ण नाम के दो युवकों ने अपने-अपने माता-पिता से कहा कि वे विदेश जाकर बहुत-सा पैसा कमाना चाहते हैं। दोनों के पालकों ने अनुमति दे दी। हालांकि, विदेश पहुंचते ही कृष्ण को कोई बीमारी हो गई और कुछ ही दिनों में उसकी मौत हो गई। राम...
    September 13, 06:35 AM
  • प्राचीनकाल की बात है। पहाड़ी प्रदेश में एक राजा राज्य करता था। चूंकि राज्य पहाड़ों से घिरा था, इसलिए कभी किसी ने वहां आक्रमण नहीं किया। राजा के सैनिक प्रशिक्षित तो थे, किंतु लड़ाई में उन्होंने कभी हिस्सा नहीं लिया था। चूंकि एेसा अवसर ही नहीं आया था, इसलिए राजा सहित सभी सैनिक निश्चिंत रहते थे, मगर एक बार किसी राज्य ने हिम्मत दिखाई और इस राज्य पर हमला कर दिया। वे लोग पूरी तैयारी के साथ आए थे। पहाड़ी प्रदेश का राजा भी वीर था। उसने अपने सैनिकों को बुलाकर युद्ध संबंधी निर्देश दिए। फिर पूर्वाभ्यास हेतु एक...
    September 12, 07:31 AM
  • आंध्रप्रदेश में संत बम्मेर पोतन्ना हुए हैं, जिन्होंने श्रीमद भागवत का तेलगू में रूपांतरण किया है। एक दिन पोतन्ना अष्टम स्कंध का गजेंद्र मोक्ष प्रसंग लिख रहे थे। तभी उनका साला श्रीनाथ पोतन्ना का लिखा हुआ पढ़ने लगा, मगर ने गजेंद्र का पैर पकड़ा और वह उसे धीरे-धीरे निगलने लगा। प्राण संकट में देख उसने भगवान कृष्ण से बचाने की प्रार्थना की। उसकी करुण पुकार सुनकर भगवान तुरंत वहां पहुंचे, लेकिन जल्दी में अपना सुदर्शन चक्र लेकर नहीं आए। श्रीनाथ इतना पढ़कर रुक गया और बोला, आपने यह कैसा लिखा कि भगवान को...
    September 11, 07:21 AM
  • एक युवक संत कबीर के पास आया और कहने लगा, गुरु महाराज! मैंने अपनी शिक्षा से पर्याप्त ज्ञान ग्रहण कर लिया है। मैं विवेकशील हूं और अपना अच्छा-बुरा भली-भांति समझता हूं, किंतु फिर भी मेरे माता-पिता मुझे निरंतर सत्संग की सलाह देते रहते हैं। जब मैं इतना ज्ञानवान और विवेकयुक्त हूं, तो मुझे रोज सत्संग की क्या जरूरत है? कबीर ने उसके प्रश्न का मौखिक उत्तर न देते हुए एक हथौड़ी उठाई और पास ही जमीन पर गड़े एक खूंटे पर मार दी। युवक अनमने भाव से चला गया। अगले दिन वह फिर कबीर के पास आया और बोला, मैंने आपसे कल एक प्रश्न...
    September 10, 07:34 AM
  • किसी राजा को एक सौदागर ने बाज की ऊंची नस्ल के दो बच्चे उपहार में दिए। राजा उन्हें पाकर खुश हो गया, क्योंकि इतने शानदार बाज उसने पहले कभी नहीं देखे थे। सौदागर ने राजा से निवेदन किया कि उनकी देखभाल के लिए किसी अनुभवी व्यक्ति को नियुक्त करें। राजा ने अनेक पक्षियों को पालने व प्रशिक्षण देने का कार्य कर चुके व्यक्ति को बाज के बच्चे सौंप दिए। कुछ समय बाद राजा बाज के बच्चे देखने पहुंचा,तो उसने पाया कि दोनों वयस्क हो चुके हैं। राजा ने कहा, मैं इनकी उड़ान देखने का इच्छुक हूं। उस व्यक्ति ने संकेत किया तो...
    September 9, 07:30 AM
  • शांति नामक महिला अत्यंत क्रोधी स्वभाव की थी। क्रोध में वह छोटा-बड़ा कुछ नहीं देखती थी और जो मुंह में आता, बोल देती थी। उसके परिजनों से लेकर पूरा मोहल्ला परेशान था। हालांकि, जब उसका क्रोध शांत होता तो उसे अपने व्यवहार पर बहुत पछतावा होता था। संयोगवश शांति के नगर में एक संत का आगमन हुआ। वह उनसे मिलने गई। संत को उसने कहा, महाराज! क्रोध करने की मेरी आदत ने मुझे सभी से दूर कर दिया है। बावजूद इसके मैं स्वयं को नहीं सुधार पा रही हूं। आप कोई रास्ता बताइए। संत ने उसे एक शीशी देते हुए कहा, इस दवा को पीने से...
    September 8, 07:55 AM
  • एक संत के आश्रम में शिष्यों के बीच कार्यों का विभाजन किया गया था। दो शिष्य ऐसे थे, जो संत की सेवा में लगातार रहते थे। संत के भोजनादि का ध्यान रखना, उनकी पूजा-सामग्री जुटाना, उनके वस्त्रािद व्यवस्थित रखना, उनके हाथ-पैर दबाना, इस सेवा में शािमल था। हालांकि संत को अपना काम स्वयं करना पसंद था, किंतु दोनों गुरु के प्रति निष्ठा के चलते उनकी बात न मानकर सेवा में लगे रहते। एक बार दोनों शिष्यों ने संत से मेला देखने जाने की अनुमति मांगी। संत ने एक को अनुमति दी, किंतु दूसरे को रोक लिया। जो शिष्य मेला देखने...
    September 6, 08:18 AM
  • एक बार किसी नगर के लोगों के बीच चर्चा हुई कि इस संसार में ऐसा कौन है, जो सबसे सुखी है और पूर्ण शांति का जीवन जी रहा है? लगभग सभी लोगों का मत था कि ऐसा व्यक्ति राजा ही हो सकता है, क्योंकि उसके पास अकूत धन-संपत्ति है, समस्त प्रकार की सुविधाएं हैं, नौकर-चाकर हैं और सबसे बड़ी बात उसके पास सत्ता है। वे सभी लोग राजा के पास गए और उससे पूछा, क्या आप अपने जीवन से संतुष्ट हैं? राजा ने कहा, अरे नहीं, नहीं। मैं कैसे संतुष्ट रह सकता हूं। मुझे तो सदैव यह चिंता लगी रहती है कि अन्य राज्य कहीं मेरे राज्य पर हमला न कर दें।...
    September 5, 07:25 AM
  • आद्य शंकराचार्य वेदांत निपुण स्वामी श्री गोविंद भगवत्पाद से मिलने बद्रीनाथ गए। मार्ग में थकान महसूस हुई तो एक तालाब के किनारे विश्राम करने लगे। वहीं उन्होंने देखा कि कुछ मेंढक परस्पर खेल रहे थे। शंकराचार्य को उनके खेल में आनंद आने लगा। चूंकि वह ग्रीष्म ऋतु की दोपहर थी, अत: तालाब का पानी भी गर्म हो गया था। कुछ देर बाद सभी मेंढक तालाब छोड़कर नमी वाले ठंडे स्थानों पर चले गए। तभी शंकराचार्य ने देखा कि मेंढक का एक नन्हा बच्चा गर्म पानी से बाहर तो निकल आया, किंतु जमीन पर आकर उसे समझ नहीं आया कि ठंडक...
    September 4, 07:45 AM
  • किसी नगर के युवा संतुलित भोजन को लेकर अत्यंत जागरूक हो गए। इस विषय पर वहां सभाएं होने लगी, गोष्ठियां बुलाई जाने लगीं। एक सभा में आहार पर अनेक लोगों ने भिन्न-भिन्न मत व्यक्त किए। एक युवक ने कहा, साबूत अनाज, फल और बीजों के साथ सम्यक आहार है। एक लड़की बोली, सब्जियां और फल एक-दूसरे के साथ मेल नहीं खाते। दूसरे युवक ने राय दी, दस दिन में एक दिन उपवास रखने से शरीर स्वस्थ रहता है। सभी की बातों में कुछ न कुछ सत्यता थी, लेकिन कोई किसी से सहमत नहीं था। तभी एक ज्ञानी पुरुष उस नगर में आए। संतुलित भोजन के विषय में उनकी...
    August 29, 07:38 AM
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