जीवन दर्शन
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  • प्रख्यात वैज्ञानिक व नोबेल पुरस्कार से सम्मानित भौतिकशास्त्री सर सीवी रमन को अपने विभाग के लिए योग्य वैज्ञानिक की आवश्यकता थी। उन्होंने अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित करवाया, जिसे पढ़कर उनके पास कई आवेदन आए। रमन ने उनमें से कुछ का चयन किया और उन्हें साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया। इनमें एक नवयुवक भी था, जिसे रमन ने अस्वीकार कर दिया था। थोड़ी देर बाद जब साक्षात्कार समाप्त हो गया तो रमन ने गौर किया कि वह नवयुवक अब भी उनके कार्यालय के आस-पास घूम रहा है। वे तत्काल उसके पास पहुंचे और नाराजगी...
    January 31, 04:25 AM
  • स्वभाव से अत्यंत मितभाषी एक चित्रकार दिन-रात काम में डूबा रहता। उसका मानस सदैव चित्रों के नए-नए विषय खोजने में लगा रहता। कभी उसके चित्रों में कल्पना के भावभीने रंग होते, तो कभी यथार्थ का कड़वापन झलकता। रंगों की दुनिया में मस्त रहने वाले इस चित्रकार ने विवाह भी नहीं किया, क्योंिक उसे घर-गृहस्थी में पड़कर अपनी चित्रकारी के शौक से समझौता करना कतई गवारा नहीं था। माता-पिता जीवित थे तो शादी के लिए उस पर दबाव डालते रहते थे। उनके बाद चित्रकार अकेला अपनी दुनिया में डूब गया। एक बार उसका सामना विचित्र...
    January 30, 06:50 AM
  • अपने जीवन के 40 वर्ष पूर्ण कर चुके, लेनिन ग्रांट की अब तक कोई पहचान नहीं बन पाई थी। उसने विभिन्न प्रकार के काम किए, लेकिन सफलता उससे दूर ही रही। अपने विद्यार्थी जीवन में भी वह कोई उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल नहीं कर पाया। वस्तुत: ग्रांट अपनी योग्यता और क्षमता को ठीक से पहचान ही नहीं पाया था। 32 वर्ष की आयु में उसे अयोग्य मानकर नौकरी से निकाल दिया गया। बेरोजगार ग्रांट ने फिर काम की खोज की। उसे कस्टम हाउस में रख लिया गया। कुछ समय बाद ग्रांट को उस नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा। काम की तलाश पुन: शुरू हुई। अबकी बार...
    January 29, 06:54 AM
  • ध्यानचंद हॉकी के महान खिलाड़ी थे और उतने ही बड़े राष्ट्रभक्त भी थे। अपने खेल से देश का नाम रोशन करने में उन्हें हािर्दक प्रसन्नता होती थी। एक बार जर्मनी में ध्यानचंद को हाॅकी खेलने जाना था। सदा की तरह उन्होंने पर्याप्त अभ्यास किया और अपनी टीम के साथ जर्मनी पहुंचे। जर्मनी में उन दिनों हिटलर का शासन था। चूंकि उनको अपने देश पर बहुत गर्व था, इसलिए जर्मनी और भारतीय टीम के बीच मैच देखने वह भी आया। ध्यानचंद ने हिटलर की मौजूदगी में अत्यंत सहजता से अपना बेहतरीन खेल खेला। तानाशाह हिटलर ध्यानचंद के खेल से...
    January 28, 05:13 AM
  • दुर्ग के एक अंधेरे कोने में लोहार दिन-रात काम करके राज्य के सैनिकों के लिए अस्त्र-शस्त्र बनाने में लगा रहता। लोहे व इस्पात पर उसे अनोखी महारत हासिल थी। वह योद्धाओं के पिता जैसा था, जो शस्त्रों की मरम्मत के लिए उसके पास आते। लोहार उन्हें सत्य, बहादुरी और मन में चल रहे और भी बड़े युद्ध की बातें बताता। इस तरह वह सैनिकों में मूल्यों की स्थापना करता। उसका काम बढ़ता जा रहा था, क्योंकि मंत्री को खून-खराबा पसंद था। वह राजा को गलत सलाह देता। एक दिन लोहार को पता चला कि मंत्री राजा को कोई दवा दे रहा है ताकि उसका...
    January 24, 07:12 AM
  • दुर्ग के एक अंधेरे कोने में लोहार दिन-रात काम करके राज्य के सैनिकों के लिए अस्त्र-शस्त्र बनाने में लगा रहता। लोहे व इस्पात पर उसे अनोखी महारत हासिल थी। वह योद्धाओं के पिता जैसा था, जो शस्त्रों की मरम्मत के लिए उसके पास आते। लोहार उन्हें सत्य, बहादुरी और मन में चल रहे और भी बड़े युद्ध की बातें बताता। इस तरह वह सैनिकों में मूल्यों की स्थापना करता। उसका काम बढ़ता जा रहा था, क्योंकि मंत्री को खून-खराबा पसंद था। वह राजा को गलत सलाह देता। एक दिन लोहार को पता चला कि मंत्री राजा को कोई दवा दे रहा है ताकि उसका...
    January 24, 06:14 AM
  • नेताजी सुभाषचंद्र बोस के मन में विद्यार्थी जीवन से ही गरीब व दलित वर्ग के प्रति सहानुभूति थी। एक बार कोलकाता में हैजा फैल गया। सारे धनी लोग शहर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए। गुलामी के उन दिनों में भारतीयों के लिए कोई बेहतर उपचार सेवा दूर की कौड़ी थी, इसलिए नेताजी ने गरीब रोगियों के उपचार का बीड़ा उठाया। हालांकि, गरीब बस्तियों में कुछ उपद्रवी तत्व उनकी इस पहल में कोई निहित स्वार्थ देखते थे। उन्होंने नेताजी को धमकाया, खबरदार! फिर यहां आए तो। नेताजी ने बहादुरी से जवाब दिया, आप यदि मुझे मार डालना...
    January 23, 06:45 AM
  • भगवान महावीर भ्रमण करते हुए एक दिन मोराक सन्निवेश में आए। वहां दूरज्जन्तक ऋषि के आश्रम में कुलपति के आग्रह पर रुक गए। कुलपति ने उन्हें वहीं पर्णकुटी बनाने का निवेदन किया। महावीर इस स्नेहाग्रह को नहीं टाल सकेे। चूंकि उस समय मोराक में पर्याप्त वर्षां नहीं हुई थी, इसलिए जलस्रोत रीते पड़े थे। मनुष्य तो पानी की व्यवस्था जैसे-तैसे कर लेते थे, किंतु पशु-पक्षी बहुत परेशान थे। आसपास की गायें घास की तलाश में आश्रम आ जातीं और वहां बनी पर्णकुटियों की घास खींच-खींचकर खाने लगतीं। फिर आश्रमवािसयों द्वारा...
    January 22, 05:21 AM
  • चंपारन में गांधीजी के नेतृत्व मंे किसानों का सत्याग्रह चल रहा था। वे सभी लोग इस सत्याग्रह में शामिल थे, जो भीतर से मजबूत थे अर्थात आत्मिक बल से संपन्न थे। कुछ ऐसे भी लोग थे, जो शारीिरक दृष्टि से दुर्बल थे, किंतु दृढ़ इच्छाशक्ति उन्हें इस सत्याग्रह में मजबूती से लगाए हुए थी। ऐसे ही लोगांे में कुष्ठ रोग से पीड़ित एक खेतिहर मजदूर भी था। उसका शरीर घाव के कारण दुखता रहता था, किंतु वह उन पर कपड़ा लपेटकर चलता था। एक शाम सत्याग्रही अपने शिविर की ओर लौट रहे थे, किंतु उस कुष्ठ रोगी से चला नहीं जा रहा था, क्योंिक...
    January 21, 06:17 AM
  • एक सूफी फकीर अपने बेटे से बहुत स्नेह करता था। बेटे के साथ ही वह भोजन करता, घूमने जाता और ईश्वर की प्रार्थना भी करता था। बेटा भी अपनी मां से अधिक पिता से लगाव महसूस करता था। वह सदैव पिता के आदर्शों पर चलता और कभी ऐसा कोई काम नहीं करता, जिससे उन्हें तकलीफ पहुंचे। एक दिन फकीर का बेटा कहीं जा रहा था। अचानक पीछे से तेजगति में आई गाड़ी ने उसे टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। जब बेटे का शव घर आया तो मां फूट-फूटकर रोने लगी, किंतु फकीर निर्विकार भाव से बैठा रहा। उसने यथाविधि बेटे का अंतिम संस्कार किया। फकीर...
    January 20, 06:34 AM
  • ईसा मसीह ने अपने समय से आगे की सोच रखने के कारण समाज की खूब प्रताड़ना सही। लोगों को उनकी बातें कथित नैतिकता के विरुद्ध लगतीं। उन्हें लगता ईसा के सिद्धांत उनकी सम्माननीय परंपराओं की अवहेलना करते हैं। ऐसे में उन्हें परेशान करने का, कष्ट पहुंचाने का कोई अवसर लोग नहीं छोड़ते थे। इन्हीं लोगों में से एक थे संत पॉल। वे कट्टर यहूदी परंपरा के समर्थक थे। इस कारण उन्हें भी ईसा मसीह की बातें अच्छी नहीं लगती थीं। वे उन्हें कोसते थे और उनके प्रबल विरोधियों में शामिल थे, लेकिन कुछ समय बाद संत पॉल ने यह पाया कि...
    January 19, 07:14 AM
  • किस्सा अमेरिका का है। किसी कंपनी के मालिक ने अपने यहां काम करने वाले साधारण से दंपती को एक दिन बिताने के लिए अपने महलनुमा आवास पर आमंत्रित किया। वह उनकी मेहनत व ईमानदारी का सम्मान करना चाहता था। दोनों में से महिला ज्यादा खुश थी कि उसे अत्यंत समृद्ध जीवन का अनुभव लेने का मौका मिला है। बॉस ने अपनी मेहमाननवाजी पूरी तरह निभाई। उसने उन्हें अपना घर दिखाया और फिर वह उन्हें शहर के सबसे महंगे रेस्त्रां में डिनर के लिए ले गया। वहां पहुंचने पर वह अचानक रुका और फर्श को देर तक मौन होकर देखता रहा। फर्श पर एक...
    January 17, 07:19 AM
  • स्वर्ग में नई आत्मा आई थी। देवदूत उसे वहां से परिचित करा रहा था। दोनों साथ-साथ चलते हुए बड़ी-सी कार्यशाला में पहुंचे। वहां कई फरिश्ते काम कर रहे थे। देवदूत पहले हिस्से में ठहरा। उसने कहा, यहां सारी प्रार्थनाएं स्वीकार की जाती हैं। वे सारी बातें जो लोग मांगते हैं या मंदिरों में जाकर याचना करते हैं। खुशियां मांगते हैं। सांसारिक वस्तुएं मांगते हैं। वे सब याचनाएं यहीं एकत्रित की जाती हैं। आत्मा ने देखा कि वहां असंख्य फरिश्ते दुनियाभर के लोगों द्वारा की गई प्रार्थनाएं, उनकी उम्मीदें व आकांक्षाएं...
    January 16, 04:41 AM
  • एक लड़का पढ़ने में बहुत होशियार था। पढ़ाई पूरी होने के बाद उसने बड़ी कंपनी में नौकरी के लिए साक्षात्कार दिया। लिखित परीक्षा उसने बड़ी सफलता के साथ उत्तीर्ण की थी, इसलिए कंपनी का डायरेक्टर उससे बहुत प्रभावित था। साक्षात्कार में डायरेक्टर ने पूछा, क्या तुम्हारे स्कूल की फीस तुम्हारे पिताजी देते थे? लड़के ने हामी भरी। डायरेक्टर ने अगला प्रश्न किया, वे क्या काम करते हैं? लड़का बोला, सर! वे लोगों के कपड़े धोते हैं फिर उन्होंने पूछा, क्या तुमने कभी कपड़े धोने में पिताजी की सहायता की? लड़के ने उत्तर दिया, नहीं,...
    January 15, 05:40 AM
  • एक बूढ़ा कारपेंटर अपने काम के लिए जाना जाता था। उस पहाड़ी इलाके में मकान लकड़ी के बनाए जाते थे और उसके बनाए मकान दूर-दूर तक प्रसिद्ध थे। बूढ़ा होने पर उसने सोचा कि अब काम छोड़कर आराम करना चाहिए। वह अगले दिन अपने मालिक के पास पहुंचा और बोला, ठेकेदार साहब, मैंने बरसों आपकी सेवा की है। अब मैं अपना शेष जीवन आराम से पूजा-पाठ में बिताना चाहता हूं। ठेकेदार इस कारपेंटर को बहुत मानता था, लेकिन वह उसे निराश भी नहीं करना चाहता था। उसने कहा, आपकी कमी कोई पूरी नहीं कर सकता, लेकिन मेरा निवेदन है कि जाते-जाते आप हमारे...
    January 14, 07:35 AM
  • दक्षिण अफ्रीका में मानव अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ चुके महात्मा गांधी जब भारत लौटने लगे तो वहां की जनता बहुत भावुक हो गई। वास्तव में यह बहुत बड़ी बात थी कि दूसरे देश का व्यक्ति वहां आकर उनके अधिकारों के लिए सारे खतरे उठाकर संघर्ष करे और उन्हें वह अधिकार दिलाकर ही जाए। इसी कारण गांधीजी का वहां बहुत आदर व सम्मान था। वहां के लोग उन्हें पूजते थे, इसलिए जब वे भारत आने लगे तो अफ्रीकी जनता का स्नेह और श्रद्धा उपहारों के रूप में झलका। गांधीजी को अनेक बहुमूल्य उपहार दिए गए। बापू और उनकी पत्नी कस्तूरबा...
    January 13, 06:34 AM
  • श्रीमन्नारायण भारत के विख्यात शिक्षा शास्त्री थे। 1935 में उन्हें जॉर्ज पंचम की रजत जयंती के समारोह में हिस्सा लेने के लिए लंदन से निमंत्रण भेजा गया। श्रीमन्नारायण को चूंकि अत्यंत आदर से बुलाया गया था, इसलिए उन्होंने तय किया कि वे इस समारोह में जाएंगे। श्रीमन्नारायण लंदन पहुंचे और वहां देखा कि पूरा लंदन जश्न में डूबा है। चूंकि अवसर ही इतना खास था, इसलिए लंदन की जनता का उस्ताह चरम पर था। कई दिनों तक उत्सवी माहौल लंदन में बना रहा। श्रीमन्नारायण ने भी समारोह में उत्साह के साथ भाग लिया। उन्होंने...
    January 12, 05:50 AM
  • ठंड का मौसम था। एक वृद्धा अपने छोटे-से घर में ठंड से कांप रही थी। उसका जीवन अत्यंत दु:खमय रहा। युवावस्था में ही पति का निधन हो गया। अपने दुधमुंहे बच्चे की ओर देखकर उसने जीवन की कठिन राह पर चलना शुरू किया। बेटे को काबिल बनाने के लिए इस युवा मां ने घर-घर जाकर काम किया। कई बार छुट्टी लेकर आराम करने की सोचती, किंतु बेटे के भविष्य को याद कर फिर काम पर चल पड़ती। सोचती कि जब बेटा काबिल बनेगा तब आराम ही आराम होगा। समय बीता। मां वृद्ध हो गई और बेटे ने उच्च पद प्राप्त कर लिया। मां ने बेटे का विवाह किया और सोचा कि...
    January 10, 06:47 AM
  • रामगढ़ के राजा चंद्रधर सिंह साहित्यकारों के प्रति सद्भाव रखते थे। एक दिन उनके मन में यह विचार आया कि हिंदी के श्रेष्ठ आलोचक, कवि और कथाकारों को नियमित आर्थिक सहायता दी जाए, तो उन्हें अागे बढ़ने में भी मदद मिलेगी और मुझे सािहत्य की सेवा का सुख प्राप्त होगा। ऐसा विचार कर उन्होंने अपनी सलाहकार परिषद को बुलाया और यह प्रस्ताव रखा। सभी ने पुरजोर समर्थन किया। फिर चर्चा के दौरान नाम तय करने की प्रक्रिया हुई। सभी से विचार-विमर्श होने के बाद तय हुआ कि आलोचकों में महावीरप्रसाद द्विवेदी, कथाकारों में...
    January 9, 04:32 AM
  • महात्मा गांधी के जीवन का एक अनुकरणीय प्रसंग है। गांधीजी ने 1917 में साबरमती आश्रम की स्थापना की। उनका विचार था कि भारतीय समाज में धर्म और जाित के आधार पर किया जाने वाला भेदभाव अनुिचत है और सभी के साथ समानता का व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने विचार को अमलीजामा पहनाने के लिए स्वयं को आदर्श रूप में उपस्थित किया। उन्होंने एक हरिजन शिक्षक दूदाभाई की आश्रम में नियुक्ति की और उन्हें सपरिवार आश्रम में रहने के लिए न्यौता दिया। दूदाभाई ने पहले बहुत संकोच किया, क्योंकि वे जानते थे कि उनके आश्रम में...
    January 8, 05:31 AM
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