यूरोप के किसी द्वीप पर एक समय कोढ़ का रोग फैल गया था। वह द्वीप ‘कोढ़ियों के द्वीप’ के नाम से जाना जाने लगा था। स्वस्थ लोग वहां जाते ही नहीं थे, क्योंकि यह रोग संक्रामक माना जाता है। नतीजतन कोढ़ियों की स्थिति बहुत दयनीय हो गई थी। वे लोग जैसे-तैसे अपने दिन गुजार रहे थे। उनकी इस दुर्दशा को जब एक दयालु पादरी ने देखा, तो वह उनके बीच रहकर उनकी सेवा करने चला आया।
उसने अपनी दिनचर्या में कोढ़ियों से संबंधित सभी कार्य शामिल कर लिए। वह उनके घाव धोता, दवा लगाता, नहलाता, खाना खिलाता। कोढ़ियों के आत्मिक बल को बढ़ाने के लिए वह उन्हें धार्मिक पुस्तकें पढ़कर सुनाता। कोढ़ियों के...