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जीवन दर्शन

जौहरी ने अमूल्य हीरा पाकर भी आखिर खो दिया

एक किसान खेत में हल चला रहा था। थोड़ी देर बाद उसका हल एक पत्थर से अटक गया। किसान ने जोर लगाकर पत्थर को हटा दिया। तभी उसके जूते में एक कील चुभी तो उसने उसी पत्थर से उसे ठोंकना शुरू कर दिया। उसी समय उधर से गुजर रहे एक जौहरी की नजर उस पत्थर पर पड़ी। उसने पहचान लिया कि वह पत्थर हीरा है। उसने किसान से उसे खरीदने की इच्छा जाहिर की। किसान हैरान हुआ कि यह आदमी एक सामान्य पत्थर क्यों खरीदना चाहता है? फिर उसने सोचा कि इस पत्थर के बदले जो मिल जाए, बहुत है। किसान ने पांच रुपए में वह पत्थर जौहरी को दे दिया। हीरा पाकर जौहरी खुशी-खुशी घर पहुंचा और उसने हीरे को जैसे ही थैली में से निकाला, हीरा...
 

जब राजा ने खाली गमला लाने वाले को विजेता घोषित किया

एक राजा को सुयोग्य व ईमानदार मंत्री की आवश्यकता थी। उसके दरबार में चाटुकारों की भरमार थी, जिनसे राजा बहुत परेशान...

हर एक की उपयोगिता है उसे जानें, पहचानें और मानें

जीवन दर्शन. यह दौर उपयोगिता का है। सभी को साबित करना पड़ता है कि वे उपयोगी हैं। अब रिश्ते संवेदनाओं से नहीं,...
 
 
 

शंकरदेव ने रूढ़िवादिता दूर करने के लिए किया संघर्ष

जीवन दर्शन... शंकरदेव का जन्म असम के नौगांव जिले में हुआ था। पारिवारिक और सामाजिक दबावों के समक्ष न झुकते हुए...

परोपकार की अनूठी मिसाल पेश की गंगाधर शास्त्री ने

जीवन दर्शन.. मिथिला में गंगाधर शास्त्री नामक पंडित एक विद्यालय में अध्यापन कार्य करते थे। शास्त्रीजी अपने कार्य...
 
 

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  • May 9, 12:58
     
    जीवन दर्शन.. उपन्यासकार डॉ. क्रोनिन अत्यंत निर्धन थे। पुस्तकों की रॉयल्टी या तो प्रकाशक हड़प जाते अथवा क्रोनिन को उनके हक से कम देते। क्रोनिन बहुत सीधे थे। प्रकाशकों से लड़ाई कर अपना हक लेना उन्हें नहीं आता था। अत: बड़ी गरीबी में उनका जीवन बीत रहा था। इसी गरीबी में जैसे-तैसे उन्होंने चिकित्सा की पढ़ाई पूर्ण की और डॉक्टर बन गए। जब वे चिकित्सा के क्षेत्र में आए तो कुछ लोगों ने...
     

  • May 8, 01:35
     
    जीवन दर्शन.. स्वामी विवेकानंद के प्रवचन ज्ञानयुक्त और तर्क आधारित होते थे। ज्ञान, भक्ति और कर्म विषयक जटिल से जटिल प्रश्नों का समाधान स्वामीजी अपनी सहज मेधा से कर देते थे। कई बार ऐसा होता था कि जिज्ञासुओं का जमावड़ा उनके आसपास होता और प्रवचन के दौरान भी तथा प्रवचन समाप्ति के उपरांत भी उनकी ओर से प्रश्न आते रहते और स्वामीजी उन्हें परम संतुष्टिकारक उत्तर देते। एक बार स्वामीजी...
     

  • May 7, 12:14
     
    जीवन दर्शन.. गांधीजी प्रत्येक वस्तु का उपयोग बहुत सोच-समझकर करते थे। वे अपनी जरूरत के मुताबिक वस्तु का उपयोग करते और शेष को भविष्य के लिए सुरक्षित रख देते। मितव्ययिता की यह शिक्षा वे अपने संपर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को देते थे, ताकि देश के सभी लोगों की महत्वपूर्ण आवश्यकताएं पूर्ण हो सकें और कोई किसी वस्तु के लिए न तरसें। गांधीजी के पास देशभर से पत्र आते थे और सुबह के समय...
     

  • May 6, 12:34
     
    जीवन दर्शन. विकास और प्रगति जैसे शब्द जब व्यावसायिक जीवन से जुड़ते हैं, तो इनमें एक लक्ष्य निर्धारित होता है। जब ये आध्यात्मिक जीवन से जुड़ते हैं, तो इनमें अंत नहीं होता, आरंभ और चलना ही होता है। आजकल प्रोफेशनल लाइफ में भी यही समझाया जा रहा है कि लक्ष्य पर पहुंचकर अंत नहीं मानें। हर दिन लक्ष्य नए गढ़ना पड़ेंगे, इसलिए रुकें नहीं, चलते रहें। व्यावसायिक जीवन में एक बड़ी रुकावट है...
     

  • May 5, 12:48
     
    जीवन दर्शन.. जर्मनी के जोसेफ बर्नार्ड अपनी बाल्यावस्था से लेकर किशोरावस्था तक अत्यंत बुद्धिहीन रहे। उनके पिता ने अच्छी से अच्छी टच्यूशन लगवाई, किंतु कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। वे अत्यंत मेधावी शिक्षकों को जोसेफ बर्नार्ड को शिक्षण देने हेतु नियुक्त करते थे, किंतु वह इतने जड़ बुद्धि थे कि किसी भी प्रकार से न व शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते थे। एक दिन उनके पिता इस बात से नाराज...
     

  • May 4, 12:05
     
    जीवन दर्शन.. महादेव गोविंद रानाडे को नई चीजें सीखने की सदा चाह रहती थी। वे हमेशा तत्पर रहते थे कि जो अब तक नहीं सीख पाए, उसे पूर्ण मनोयोग से सीख लें। कई बार लोग हैरान हो जाते थे कि रानाडे ने इतनी जल्दी कोई नई चीज कैसे सीख ली? रानाडे कहते थे कि सीखने के लिए बस लगन की आवश्यकता होती है। लगन होगी, तो जटिल से जटिल विधा भी आसानी से सीखी जा सकती है। एक बार की बात है रानाडे कलकत्ता से पूना के लिए...
     

  • May 3, 12:58
     
    जीवन दर्शन.. राबिया महान भक्त थीं। उनकी अटूट भक्ति से सभी प्रभावित थे। लोक समाज में वे श्रद्धा का केंद्र थीं। उनके संतत्व में आम जनता के साथ-साथ ज्ञानानुरागी संत साधक भी सम्मिलित होते थे और उनके आध्यात्मिक अनुभवों का लाभ उठाते थे। राबिया जिन धर्मग्रंथों का अध्ययन करती थीं, उनका अध्ययन यह संत समुदाय भी उनकी अनुमति लेकर करता और जहां कोई बात समझ नहीं आती, तो राबिया उनका यथोचित...
     

  • May 2, 12:20
     
    जीवन दर्शन.. स्वामी दयानंद सरस्वती के प्रवचनों में अमीरचंद नामक व्यक्ति गाना गाता था। उसका गला अत्यंत सुरीला था और वह जब भी गाता, बड़ी तन्मयता के साथ गाता था। उसे सुनकर श्रोता मुग्ध हो जाते। अमीरचंद के भावपूर्ण गीतों ने स्वामीजी को भी उसका मुरीद बना दिया था और वे सदैव उसे प्रोत्साहन देते थे। एक बार उनके प्रवचन के उपरांत जब अमीरचंद गाना गाकर चला गया तो कुछ प्रतिष्ठित लोगों ने...
     

  • May 1, 12:44
     
    जीवन दर्शन.. करीब ढाई सौ वर्ष पूर्व जापान में होकीची नामक एक बालक का जन्म हुआ। सात वर्ष की उम्र में उसे चेचक हो गया। उसके माता-पिता ने काफी उपचार कराया, जिससे होकीची ठीक तो हो गया, किंतु उसकी आंखों की रोशनी चली गई। होकीची ने नेत्रहीन हो जाने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और यह सोचा कि मात्र आंखें ही तो गई हैं, शेष शरीर तो स्वस्थ है, उसका उपयोग राष्ट्रहित में करना चाहिए। होकीची...
     
 
 
 
 
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