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जीवन दर्शन
 
 
 
 

  • April 12, 12:36
     
    महावीर स्वामी जब संन्यासी नहीं हुए थे, तब की बात है। वे महल के वैभव में रहते थे और निर्धनों व असहायों की दुनिया से पूर्णत: अपरिचित थे। एक दिन उन्हें भ्रमण की इच्छा हुई। जब उनकी इच्छा के बारे में पिता राजा सिद्धार्थ को ज्ञात हुआ, तो उन्होंने एक सेवक को महावीर के साथ कर...
     

  • April 11, 12:13
     
    किसी जंगल में हिरण बहुतायत में रहते थे। उनकी अच्छी तादाद देखकर एक शिकारी प्राय: उस जंगल में आता और एक फलदार वृक्ष पर मचान बांधकर बैठ जाता।   जब हिरण फल खाने उस वृक्ष के नीचे आते, तो वह हिरण का शिकार कर उनका मांस बेचकर अपनी गृहस्थी चलाता था। हिरणों केसमूह के एक हिरण ने...
     

  • April 10, 12:17
     
    एक नगर में चार गरीब मित्र रहते थे। चारों ने तय किया कि किसी और नगर में जाकर काम खोजें। चारों नगर छोड़कर चल दिए। चलते-चलते थक गए तो वे एक वृक्ष के नीचे बैठ गए। सामने कुटिया में एक संत रहते थे। संत ने उनकी परेशानी का कारण पूछा। जिसे सुनकर संत ने कहा- ‘मैं तुम्हें चार दीपक...
     

  • April 9, 08:00
     
    बालक  शंकर अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। शंकर था भी बड़ा आज्ञाकारी व गुणी। उसे देव-दर्शन का बड़ा चाव था। जब मां मंदिर जातीं, तो शंकर का मन खिल उठता। एक दिन शंकर ने मां के समक्ष संन्यासी बनने की इच्छा व्यक्त की। मां बिल्कुल राजी नहीं हुई। उन्होंने कहा- ‘तू मेरा एक...
     

  • April 8, 05:28
     
    शिवगढ़ के राजा वीरसिंह की एकमात्र पुत्री रूपाली विवाह योग्य हुई तो उसकेविवाह केकई प्रस्ताव आए, किंतु रूपाली ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। वह किसी बुद्धिमान युवक से विवाह करना चाहती थी, इसलिए उसने कहा कि वह उसी से विवाह करेगी जो उसकेतीन सवालों  केउत्तर दे देगा।  ...
     

  • April 6, 05:11
     
    एक राजा मृगों केशिकार का आदी था। वह अपनी राजधानी के सभी प्रमुख लोगों को प्रतिदिन इकट्ठा करवाता और शिकार करने जाता। लोग परेशान हो गए, क्योंकि रोज राजा केसाथ जाने से उनके काम का हर्जा होता। लोगों ने विचार किया कि हमें ऐसा कोई उपाय करना चाहिए, जिससे सारे मृग एक ही स्थान...
     

  • April 5, 12:28
     
    सरगोधा जिले के खुशाबनगर में दीवान मदनगोपाल रहते थे। कई हवेलियों के मालिक मदनगोपाल को शराब का बेहद शौक था। विलायती ह्विस्की की पेटियां उनके घर में भरी रहतीं। गर्मियों के दिन थे।   मदनगोपाल सुगंधित ठंडे कमरे में विश्राम कर रहे थे। ऐसी तपती दोपहरी में अचानक एक...
     

  • April 4, 12:03
     
    अबुल हसन खिरकानी मुस्लिम संत थे। उनके एक भाई थे। दोनों मिलकर अपनी वृद्ध और बीमार मां की सेवा करते थे। पिता अर्सा पहले गुजर गए थे। दोनों भाइयों के बीच बहुत स्नेह था और दोनों ने कार्य-विभाजन इस प्रकार किया था कि जब एक भाई मस्जिद में नमाज पढऩे जाता, तो दूसरा उस समय मां के...
     

  • April 3, 12:52
     
    महावीर स्वामी निरंतर भ्रमण करते और रात को किसी एकांत स्थान पर ध्यानमग्न हो जाते थे। उन दिनों पुष्य नामक एक ज्योतिषी की ख्याति चारों ओर फैली हुई थी। एक दिन पुष्य गंगा किनारे भ्रमण कर रहा था। वहां उसने देखा कि रेत पर किसी के चरण-चिह्न् हैं।   अपने ज्ञान के आधार पर उसने...
     

  • April 2, 02:12
     
    सन 1917 की घटना है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन कलकत्ता में हुआ। उसी के साथ राष्ट्रभाषा सम्मेलन भी किया गया। इस सम्मेलन के सभापति थे  लोकमान्य तिलक।   गांधीजी, सरोजिनी नायडू सहित अनेक बड़े नेता इसमें हिस्सा ले रहे थे। गांधीजी को छोड़कर सभी लोगों...
     

  • April 1, 02:37
     
    एक दिन ईसा मसीह से एक अहंकारी विद्वान मिलने आया। उसने कठिन प्रश्न पूछकर ईसा को निरुत्तर करने का विचार किया और बोला- 'यदि मुझ जैसे ज्ञानी को दिव्य जीवन पाना हो, तो किस प्रकार की साधना करनी चाहिए?Ó ईसा ने उसके अहंकार को पहचानकर कहा- 'इस विषय में शास्त्र क्या कहते हैं,...
     

  • March 30, 12:08
     
    दक्षिण अफ्रीका में ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू अनेक जनविरोधी कानूनों का अहिंसक विरोध कर उन्हें निरस्त कराने में मिली सफलता के बाद गांधीजी भारत लौटने की तैयारी कर रहे थे। उनके एक सहयोगी ने प्रश्न किया- ‘बापूजी! हम भारत में कहां रहेंगे?’ गांधीजी ने उत्तर दिया-...
     

  • March 29, 12:16
     
    तक्षशिला में एक विद्वान आचार्य का गुरुकुल था। उनके हजारों शिष्यों में से एक था- पापक। उसे अपना नाम पसंद नहीं था। हालांकि वह नाम के विपरीत बहुत भला और बुद्धिमान था। एक दिन उसने आचार्य के समक्ष अपने मन की बात रखी- ‘आचार्य! मेरा नाम अशुभ है। कृपा कर मुझे दूसरा नाम...
     

  • March 27, 12:02
     
    एक पौराणिक कथा के अनुसार देवी सती दक्ष प्रजापति की बेटी थीं। सती जब युवा हुईं, तो उन्होंने अपने पिता दक्ष की इच्छा के विरुद्ध भगवान शिव से विवाह की इच्छा व्यक्त की। पिता के समझाने के बावजूद अंतत: दोनों का विवाह हुआ। इस बात से दुखी दक्ष ने अपनी बेटी से संबंध तोड़ लिए।  ...
     

  • March 26, 12:09
     
    दो  भाइयों में जमीन को लेकर विवाद हो गया। मामला अदालत में पहुंचा। उन भाइयों में एक लखपति था और दूसरा निर्धन। यह स्थिति देखकर न्यायाधीश हैरान हुआ।   उसने अमीर भाई से पूछा- ‘तुम दोनों भाइयों की आर्थिक स्थिति में इतना अंतर क्यों?’ उसने उत्तर दिया- ‘सात वर्ष पूर्व...
     
 
 
 
 
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