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जीवन दर्शन
 
 
 
 

  • April 23, 01:33
     
    सिखों के शासनकाल में एक सूबा था मुलतान। वहां के दीवान थे सावनमल। वे अत्यंत न्यायप्रिय थे। अत: मामलों का न्यायोचित निराकरण होता था और प्रजा उनसे संतुष्ट बनी रहती थी। एक बार दीवान साहब के पास एक विधवा महिला आई और उसने बताया कि पति के न रहने पर उसके रिश्तेदारों ने उसकी...
     

  • April 22, 06:57
     
    बात उन दिनों की है, जब भारत में आजादी पाने के लिए पुरजोर प्रयास किए जा रहे थे। गर्म दल अपने तरीके से और नर्म दल अपनी शैली में कर्मरत था।   उद्देश्य दोनों का एक ही था - आजादी। इस दौर में स्वतंत्रता-संग्राम सेनानियों के लिए जेल जाना किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं होता था। ये...
     

  • April 20, 04:03
     
    वीर बालक ने पाया वीरोचित सम्मान बंगाल के शासक नवाब सरफराज खां बिहार दौरे पर थे। जब वे राजधानी मुर्शिदाबाद की ओर लौटने लगे तो उनके सेनापति अलीवर्दी खां ने पूरी सेना के साथ भागीरथी नदी के किनारे पर आकर पड़ाव डाला। वह नवाब को खत्म कर तख्त छीनने के इरादे से आया था।   जब...
     

  • April 19, 07:10
     
    गौतम बुद्ध ने जिस दिन से संन्यास ग्रहण किया, उसी दिन से स्वयं को संपूर्ण समाज के कल्याण हेतु समर्पित कर दिया था। संन्यास पथ पर निरंतर चलते हुए उन्हें गया में निरंजना नदी के किनारे ज्ञान की प्राप्ति हुई। उनके पवित्र जीवन उद्देश्य को लाखों लोगों ने उनका शिष्यत्व ग्रहण...
     

  • April 18, 06:39
     
    वाराणसी   का राजा ब्रह्मदत्त शंकालु प्रवृत्ति का था। एक बार उसे अपने पुत्र पर ही संदेह हो गया कि वह उसकेविरुद्ध षड्यंत्र रच रहा है। उसने पुत्र को उसकी पत्नी सहित राज्य से निकाल दिया। पिता के इस कटु व्यवहार से आहत पुत्र के स्वभाव में भी कठोरता आ गई। वह दूसरे राज्य में...
     

  • April 17, 05:29
     
    त्रेता युग में सम्राट रघु की बड़ी प्रतिष्ठा थी। ‘दान’ उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा था। उनकी यह ख्याति त्रिलोक में फैल गई थी। एक दिन राजा रघु दरबार में बैठे थे कि दरबान ने किसी ऋषिकुमार के आने की सूचना दी।   राजा रघु ने उन्हें दरबार में सादर ले आने का आदेश दिया।...
     

  • April 16, 06:34
     
    दादाभाई  नौरोजी को किसी मुकदमे केसिलसिले में लंदन जाना था। संयोग से बाल गंगाधर तिलक को भी वहां कुछ काम था। सो, दोनों ने साथ ही जाने का कार्यक्रम बनाया। जब नौरोजी व तिलक लंदन पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि लंदन में ठहरने का खर्च अधिक था।   कम खर्च केउद्देश्य से दोनों ने...
     

  • April 14, 11:50
     
    रसायनशास्त्री आचार्य नागाजरुन को ऐसे व्यक्ति की तलाश थी, जो उनके साथ रहकर जीवनोपयोगी रसायन तैयार कर सके। उन्होंने घोषणा करवाई। अनेक युवक उनके पास आए। नागाजरुन ने साक्षात्कार लेकर दो युवकों का चयन किया।   उन्होंने दोनों को एक रसायन बनाकर लाने का आदेश दिया। पहला...
     

  • April 13, 07:58
     
    महात्मा  गांधी दक्षिण अफ्रीका में थे। उन्होंने वहां की ब्रिटिश सरकार के खिलाफ अहिंसक युद्ध छेड़ रखा था। गांधीजी ने वहां फीनिक्स आश्रम की स्थापना की थी, जहां रहकर वे आंदोलन का संचालन करते थे। उनके साथ जो लोग थे, वे गांधीजी के सादगीपूर्ण तरीकेसे जीवन-यापन के...
     

  • April 12, 12:36
     
    महावीर स्वामी जब संन्यासी नहीं हुए थे, तब की बात है। वे महल के वैभव में रहते थे और निर्धनों व असहायों की दुनिया से पूर्णत: अपरिचित थे। एक दिन उन्हें भ्रमण की इच्छा हुई। जब उनकी इच्छा के बारे में पिता राजा सिद्धार्थ को ज्ञात हुआ, तो उन्होंने एक सेवक को महावीर के साथ कर...
     

  • April 11, 12:13
     
    किसी जंगल में हिरण बहुतायत में रहते थे। उनकी अच्छी तादाद देखकर एक शिकारी प्राय: उस जंगल में आता और एक फलदार वृक्ष पर मचान बांधकर बैठ जाता।   जब हिरण फल खाने उस वृक्ष के नीचे आते, तो वह हिरण का शिकार कर उनका मांस बेचकर अपनी गृहस्थी चलाता था। हिरणों केसमूह के एक हिरण ने...
     

  • April 10, 12:17
     
    एक नगर में चार गरीब मित्र रहते थे। चारों ने तय किया कि किसी और नगर में जाकर काम खोजें। चारों नगर छोड़कर चल दिए। चलते-चलते थक गए तो वे एक वृक्ष के नीचे बैठ गए। सामने कुटिया में एक संत रहते थे। संत ने उनकी परेशानी का कारण पूछा। जिसे सुनकर संत ने कहा- ‘मैं तुम्हें चार दीपक...
     

  • April 9, 08:00
     
    बालक  शंकर अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। शंकर था भी बड़ा आज्ञाकारी व गुणी। उसे देव-दर्शन का बड़ा चाव था। जब मां मंदिर जातीं, तो शंकर का मन खिल उठता। एक दिन शंकर ने मां के समक्ष संन्यासी बनने की इच्छा व्यक्त की। मां बिल्कुल राजी नहीं हुई। उन्होंने कहा- ‘तू मेरा एक...
     

  • April 8, 05:28
     
    शिवगढ़ के राजा वीरसिंह की एकमात्र पुत्री रूपाली विवाह योग्य हुई तो उसकेविवाह केकई प्रस्ताव आए, किंतु रूपाली ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। वह किसी बुद्धिमान युवक से विवाह करना चाहती थी, इसलिए उसने कहा कि वह उसी से विवाह करेगी जो उसकेतीन सवालों  केउत्तर दे देगा।  ...
     

  • April 6, 05:11
     
    एक राजा मृगों केशिकार का आदी था। वह अपनी राजधानी के सभी प्रमुख लोगों को प्रतिदिन इकट्ठा करवाता और शिकार करने जाता। लोग परेशान हो गए, क्योंकि रोज राजा केसाथ जाने से उनके काम का हर्जा होता। लोगों ने विचार किया कि हमें ऐसा कोई उपाय करना चाहिए, जिससे सारे मृग एक ही स्थान...
     
 
 
 
 
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