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जीवन दर्शन
 
 
 
 

  • April 4, 12:03
     
    अबुल हसन खिरकानी मुस्लिम संत थे। उनके एक भाई थे। दोनों मिलकर अपनी वृद्ध और बीमार मां की सेवा करते थे। पिता अर्सा पहले गुजर गए थे। दोनों भाइयों के बीच बहुत स्नेह था और दोनों ने कार्य-विभाजन इस प्रकार किया था कि जब एक भाई मस्जिद में नमाज पढऩे जाता, तो दूसरा उस समय मां के...
     

  • April 3, 12:52
     
    महावीर स्वामी निरंतर भ्रमण करते और रात को किसी एकांत स्थान पर ध्यानमग्न हो जाते थे। उन दिनों पुष्य नामक एक ज्योतिषी की ख्याति चारों ओर फैली हुई थी। एक दिन पुष्य गंगा किनारे भ्रमण कर रहा था। वहां उसने देखा कि रेत पर किसी के चरण-चिह्न् हैं।   अपने ज्ञान के आधार पर उसने...
     

  • April 2, 02:12
     
    सन 1917 की घटना है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन कलकत्ता में हुआ। उसी के साथ राष्ट्रभाषा सम्मेलन भी किया गया। इस सम्मेलन के सभापति थे  लोकमान्य तिलक।   गांधीजी, सरोजिनी नायडू सहित अनेक बड़े नेता इसमें हिस्सा ले रहे थे। गांधीजी को छोड़कर सभी लोगों...
     

  • April 1, 02:37
     
    एक दिन ईसा मसीह से एक अहंकारी विद्वान मिलने आया। उसने कठिन प्रश्न पूछकर ईसा को निरुत्तर करने का विचार किया और बोला- 'यदि मुझ जैसे ज्ञानी को दिव्य जीवन पाना हो, तो किस प्रकार की साधना करनी चाहिए?Ó ईसा ने उसके अहंकार को पहचानकर कहा- 'इस विषय में शास्त्र क्या कहते हैं,...
     

  • March 30, 12:08
     
    दक्षिण अफ्रीका में ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू अनेक जनविरोधी कानूनों का अहिंसक विरोध कर उन्हें निरस्त कराने में मिली सफलता के बाद गांधीजी भारत लौटने की तैयारी कर रहे थे। उनके एक सहयोगी ने प्रश्न किया- ‘बापूजी! हम भारत में कहां रहेंगे?’ गांधीजी ने उत्तर दिया-...
     

  • March 29, 12:16
     
    तक्षशिला में एक विद्वान आचार्य का गुरुकुल था। उनके हजारों शिष्यों में से एक था- पापक। उसे अपना नाम पसंद नहीं था। हालांकि वह नाम के विपरीत बहुत भला और बुद्धिमान था। एक दिन उसने आचार्य के समक्ष अपने मन की बात रखी- ‘आचार्य! मेरा नाम अशुभ है। कृपा कर मुझे दूसरा नाम...
     

  • March 27, 12:02
     
    एक पौराणिक कथा के अनुसार देवी सती दक्ष प्रजापति की बेटी थीं। सती जब युवा हुईं, तो उन्होंने अपने पिता दक्ष की इच्छा के विरुद्ध भगवान शिव से विवाह की इच्छा व्यक्त की। पिता के समझाने के बावजूद अंतत: दोनों का विवाह हुआ। इस बात से दुखी दक्ष ने अपनी बेटी से संबंध तोड़ लिए।  ...
     

  • March 26, 12:09
     
    दो  भाइयों में जमीन को लेकर विवाद हो गया। मामला अदालत में पहुंचा। उन भाइयों में एक लखपति था और दूसरा निर्धन। यह स्थिति देखकर न्यायाधीश हैरान हुआ।   उसने अमीर भाई से पूछा- ‘तुम दोनों भाइयों की आर्थिक स्थिति में इतना अंतर क्यों?’ उसने उत्तर दिया- ‘सात वर्ष पूर्व...
     

  • March 25, 04:42
     
    मगध  नरेश कुमारसेन न्यायपूर्वक राज्य करते थे। उन्हें धर्म से शासन करते देख उनके मंत्रीगण भी धर्मानुसार ही मुकदमों का फैसला करते। कुमारसेन ने सोचा कि सभी मुझे गुणवान मानते हैं और मेरा अनुसरण कर धर्मानुकूल आचरण करते हैं, किंतु कोई न कोई दुगरुण तो मुझमें अवश्य होगा।...
     

  • March 23, 02:46
     
    वर्ष1804 में विलियम लाइड गैरिसन का जन्म बाल्टीमोर में हुआ था। निर्धन परिवार के गैरिसन ने आरंभ में छोटे-मोटे काम किए। पढऩे-लिखने का शौक था, अत: अखबारों में लिखने लगे। अनेक पत्रों में संपादन का कार्य किया। उन्होंने महसूस किया कि अमेरिका के दक्षिणी राज्यों में...
     

  • March 22, 01:15
     
    काशी में ब्रह्मदत्त का राज्य था। उसके राज्य में एक पद ‘अर्धकारक’ का था। ‘अर्धकारक’ विभिन्न वस्तुओं का मूल्य निर्धारण करता था। हाथी, घोड़े, सोना, चांदी, हीरे, मोती, मकान, दुकान आदि सभी का मूल्य निश्चित कर वस्तु के मालिक को उचित मूल्य दिलवाना उसका काम था। उस समय इस...
     

  • March 21, 02:19
     
    स्वामी  सहजानंद के शिष्य थे - सौराष्ट्र के मनसुख भाई। वे व्यापारी थे। उन्होंने व्यापार से खूब धन कमाया। फिर एक आलीशान हवेली बनवाई। वे चाहते थे कि गुरु सहजानंद के चरण वहां पड़ें। स्वामीजी को निमंत्रित करने वे काशी आए और उनसे निवेदन किया- ‘आपके आशीर्वाद से मैंने एक...
     

  • March 20, 01:11
     
    उज्जैन  के राजा विक्रमादित्य गरीबों और लाचारों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। प्रजाहितैषी राजा की प्रशंसा चारों ओर होती थी। शनिदेव ने जब विक्रमादित्य की प्रशंसा सुनी तो उनकी परीक्षा लेने का विचार आया।   शनि ने विक्रमादित्य से जाकर कहा- ‘राजन! मैं कौन हूं,...
     

  • March 19, 06:28
     
    यहूदियों  के आदिपुरुष बाबा अभराम जितने कर्मठ थे, उतने ही बड़े भक्त भी थे। उनकी पत्नी सारा भी मेहनती थी। वे झोपड़ी में रहते और जानवर चराकर अपनी आजीविका चलाते थे। अभराम की भक्ति से प्रसन्न हो एक बार भगवान स्वयं उसके घर आए। अभराम ने देखा कि उसकी झोपड़ी के सामने तीन लोग...
     

  • March 18, 12:05
     
    किसी  राजा के घर पुत्र का जन्म हुआ। राजा-रानी ने ज्योतिषियों से बच्चे का भविष्य पूछा। उन्होंने बताया कि कुमार बहुत भाग्यशाली है। अपनी वीरता से वह कई राज्यों को जीतेगा। पांच शस्त्रों को चलाने में सिद्धहस्त होगा और अनेक उपलब्धियां हासिल करेगा।   राजा-रानी ने उसका...
     
 
 
 
 
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