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जीवन दर्शन
 
 
 
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  • February 22, 01:01
     
    एक  पंडितजी को किसी यजमान ने अपने यहां प्रवचन देने  के लिए आमंत्रित किया। यजमान के घर काफी लोग जमा थे। प्रवचन सुनने वालों में एक सफाई कर्मचारी भी था, जिसे पंडितजी नित्य सड़क साफ करते देखते थे। पंडितजी ने प्रवचन शुरू किया।   अनेक छोटी-छोटी नीति कथाओं के माध्यम से...
     

  • February 21, 12:54
     
    राबिया  आला दर्जे की संत थीं। एक बार राबिया ने रोजा रखा। सात दिन तक उन्होंने कुछ भी नहीं खाया। सभी उनके ऐसे कठोर उपवास को देखकर दंग थे और चिंतित भी थे कि उन्हें कुछ हो न जाए, किंतु राबिया अपने प्रण पर दृढ़ रहीं।   आठवें दिन उन्होंने रोजा खोलने का निश्चय किया। किसी ने...
     

  • February 20, 01:11
     
    एक  बार भगवान बुद्ध अपने शिष्यों के साथ पाटलिपुत्र पहुंचे। सभी लोग विहार में रुके। भोजन के बाद बुद्ध ने आनंद से अगले दिन से प्रवचन आरंभ करने को कहा। अगले दिन बुद्ध के प्रवचन सुनने बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। बुद्ध प्रवचन देने के बाद लोगों से मिलते, उनकी समस्याएं...
     

  • February 19, 01:41
     
    काफी समय पहले की बात है। दस लड़के बहुत अच्छे मित्र थे। वे साथ ही पढ़ते थे और अधिकांश समय साथ ही रहते। एक बार उन लोगों ने लंबी यात्रा का कार्यक्रम बनाया।   उन्होंने स्थान तय किया। फिर अपनी-अपनी गति से सफर तय करने लगे। उनमें से कोई धीरे चलता था, तो कोई तेज। इस कारण सभी...
     

  • February 18, 12:06
     
    बचपन  में गांधीजी को प्यार से सभी मोहन के स्थान पर मोनिया कहते थे। पेड़ पर चढ़ना उसका शौक था। घर के लोगों को पेड़ से मोनिया के गिरने का डर लगता, किंतु वह निर्भीक था। एक दिन वह अमरूद के पेड़ पर चढ़ गया। वह नीचे उतरता, इसके पहले ही उसकेबड़े भाई वहां आ गए।   उन्होंने उसे...
     

  • February 16, 12:29
     
    प्राचीन  यूनान की घटना है। वहां एक बार विशाल प्रदर्शनी लगी। उस प्रदर्शनी में अपोलो की एक अत्यंत सुंदर मूर्ति थी। यूनानी लोग अपोलो को अपना ईश्वर मानते थे। सभी जानना चाहते थे कि वह मूर्ति किसने बनाई? किंतु यह किसी को नहीं पता था। एक दिन यूनान के राजा से उसके मंत्री ने...
     

  • February 15, 06:14
     
    एक  संत ईश भक्ति में सदा डूबे रहते और अपना हर कार्य ईश्वर को समर्पित कर देते। वे परम भक्ति की अवस्था को प्राप्त कर चुके थे। एक बार संत अत्यधिक बीमार हो गए। उनके भक्तजन अनेक नामी वैद्यों को लेकर आए, किंतु कोई उन्हें स्वस्थ नहीं कर पाया। हालांकि संत अपनी इस अवस्था में...
     

  • February 14, 06:43
     
    कोलंबस के मन में एक ही धुन थी नई दुनिया की खोज। साधन सीमित थे, किंतु हौसला बड़ा था। उसने तय कर लिया कि अब नए देशों की खोज करनी है, तब उसके पास मात्र एक छोटा-सा जहाज था। उसने अपने कुछ सहयोगियों से इस विषय में चर्चा की। वे लोग उसकी लगन को देखकर उसका साथ देने के लिए राजी हो गए।...
     

  • February 13, 05:23
     
    एक  बार राजा श्रेणिक और उनकी रानी चेलना की इच्छा भगवान महावीर के दर्शन करने की हुई। दोनों उनसे मिलने पहुंचे और उनसे बहुत प्रभावित हुए। लौटते समय रास्ते में रानी ने देखा कि एक मुनि तन पर एक कपड़ा पहने तपस्या में लीन है। वे भीषण ठंड के दिन थे। इस कठोर साधना को देखकर...
     

  • February 12, 06:19
     
    एक   बार खलीफा उमर को जनता के बीच भाषण देने के लिए आमंत्रित किया गया। उनका भाषण प्रभावशाली था। बीच-बीच में खलीफा ने लोगों से प्रश्न भी किए, जिनके संतोषजनक जवाब उन्होंने दिए। खलीफा से धर्म व नीतिगत जिज्ञासाओं का भी लोगों ने समाधान प्राप्त किया। इसी क्रम में खलीफा...
     

  • February 11, 12:47
     
    घटना उन दिनों की है, जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था। देश में एक ओर क्रांतिकारी थे, जो हिंसा का मार्ग अपनाकर आजादी पाने का प्रयास कर रहे थे और दूसरी ओर अहिंसा के रास्ते आजादी पाने की इच्छा रखने वाले भी थे। एक बालक यह सब देख-देखकर देशभक्ति की प्रेरणा पाता था। बालक की मां ने...
     

  • February 9, 07:41
     
    किसी  राज्य के लोग एक डाकू से बहुत त्रस्त थे। वह लोगों को लूटने के लिए उनकी हत्या करने से भी नहीं हिचकता था। राजा ने उसे पकडऩे के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी, किंतु कोई नतीजा नहीं निकला। एक बार राजा के दरबार में एक नामी संत पधारे। राजा ने यथोचित सत्कार के बाद अपनी इस...
     

  • February 8, 01:25
     
    एक  राजा था। उसके जीवन में किसी वस्तु की कमी नहीं थी। पड़ोसी राज्यों से भी उसके मैत्रीपूर्ण संबंध थे। इसके बावजूद राजा के मन में सदैव यह भय बना रहता था कि कहीं कोई हमला करके उसे मार न डाले।   एक दिन राजा अपने शयनकक्ष में लेटा हुआ इसी बात पर सोच रहा था कि अचानक उसे एक...
     

  • February 7, 04:24
     
    किसी  शहर में एक आदमी रहता था। उसने थोड़ी पूंजी लगाकर व्यापार की शुरुआत की। धीरे-धीरे उसका कारोबार बढ़ने लगा। पैसों से पैसा बढ़ा और कुछ ही समय में वह लखपति सेठ बन गया। अब वह कई आलीशान हवेलियों का मालिक था और जो वस्तु चाहता, धन के बल पर प्राप्त कर लेता।   धीरे-धीरे वह...
     

  • February 6, 12:21
     
    भगवान  बुद्ध के सभी शिष्यों की कोशिश यही रहती थी कि उनके सिद्धांतों को यथाशक्ति आचरण में उतार लें। साथ रहने वाले शिष्य परस्पर एक-दूसरे के आचरण पर दृष्टि रखते थे और एक के द्वारा कोई भूल होने पर दूसरा उसे टोक देता था।   एक दिन बुद्ध के दो शिष्य नालंदा से पाटलिपुत्र आ...
     
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