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जीवन दर्शन
 
 
 
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  • January 31, 12:09
     
    महाराष्ट्र  में एकनाथ नाम के विख्यात संत हुए हैं। उनका आचरण स्नेह और उदारता से भरा होता था। एक बार उनके विरोधियों ने तय किया कि किसी भी तरह एकनाथ को गुस्सा दिलाया जाए। इसके लिए एक आदमी को चुना गया।   उसने पहले तो इनकार किया, किंतु पैसों का लालच देने पर वह मान गया।...
     

  • January 30, 12:22
     
    कुदरत इंसान पर लगातार अपनी कृपा बरसाती है। जहां कहीं भी प्रकृति का कहर नजर आता है, वहां कहीं न कहीं मनुष्य द्वारा की गई छेड़छाड़ जरूर होगी।   मनुष्य चाहे तो प्रकृति द्वारा दी गई स्वतंत्रता का सदुपयोग कर ले। इसका फायदा हमें हमारी सेहत पर मिलता है। प्रकृति के भीतर...
     

  • January 30, 12:22
     
    एक संत दुनियादारी से विरक्त होकर अपनी कुटिया में भगवद् चिंतन करते और कंद-मूल खाकर खुश रहते। न तो वे किसी से मिलते-जुलते और न कहीं आते-जाते।   बुजुर्गावस्था में एक बार संत काफी  अस्वस्थ हो गए। आसपास के लोगों ने उनका उपचार करवाया, किंतु संत जल्दी ही मृत्यु को प्राप्त...
     

  • January 29, 12:05
     
    भगवान बुद्ध किसी यात्रा पर जा रहे थे। उनका परम प्रिय शिष्य आनंद भी उनके साथ था। चलते-चलते दोपहर हो गई, तो आनंद ने बुद्ध से निवेदन किया कि थोड़ा विश्राम कर लिया जाए। बुद्ध एक घने वृक्ष के नीचे जाकर बैठ गए। आनंद भी पास में ही बैठ गया। कुछ देर बाद बुद्ध को प्यास लगी।  ...
     

  • January 26, 12:08
     
    एक  बार गुजरात विद्यापीठ की छात्राओं ने एक बैठक की, जिसमें प्रमुख रूप से इस बात पर विचार किया गया कि जो लड़के उन्हें छेड़ते हैं, उनके सुधार के लिए क्या किया जाए? इस कारण उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती थी।   तय हुआ कि श्री किशोरीलाल मशरूवाला (जो महात्मा गांधी के अनुयायी...
     

  • January 24, 11:22
     
    इब्राहीम आदम बलख के बादशाह थे। वे प्रजा के हितों का बहुत ध्यान रखते थे। स्वयं संपूर्ण राज्य में घूमते और पता लगाते कि कहीं किसी को कोई कष्ट तो नहीं है। प्रजा भी अपने इस नेकदिल बादशाह का बहुत सम्मान करती थी।   कुछ सालों के राजपाट के बाद इब्राहीम का मन विरक्त हो गया।...
     

  • January 24, 12:41
     
    एक  लड़का अत्यंत जिज्ञासु था। जहां भी उसे कोई नई चीज सीखने को मिलती, वह उसे सीखने के लिए तत्पर हो जाता।   उसने एक तीर बनाने वाले से तीर बनाना सीखा, नाव बनाने वाले से नाव बनाना सीखा, मकान बनाने वाले से मकान बनाना सीखा, बांसुरी वाले से बांसुरी बनाना सीखा। इस प्रकार वह...
     

  • January 23, 12:25
     
    एक  संत दुनिया-जहान से अलग वन में कुटिया बनाकर रहते थे। कंद-मूल पर गुजारा करते और ईश्वर के ध्यान में डूबे रहते। कभी वन से गुजरते हुए कोई उनकी कुटिया पर रुकता, तो उससे दो बात कर लेते और जो पास में होता, बड़े स्नेह से खिला देते। एक दिन एक युवा उनसे मिलने आया।   वह उनकी...
     

  • January 22, 01:29
     
    अरब  देशों में हातिमताई का नाम अपनी उदारता के लिए विख्यात था। हातिमताई खुले हाथों दान करता। उसके द्वार से कभी कोई खाली हाथ नहीं जाता था। वह किसी जरूरतमंद को देखता तो अपनी कीमती से कीमती वस्तु देने में भी संकोच नहीं करता था। लोग उसके पास निर्भयतापूर्वक आते और वे जो...
     

  • January 20, 11:59
     
    शिवाजी  के गुरु समर्थ रामदास उच्चकोटि के संत थे। निस्पृहता उनके व्यक्तित्व का अभिन्न अंग थी। वे भिक्षा मांगकर अपना पेट भर लेते और भगवद्भक्ति में लीन रहते। जो अपनी इच्छा से जितना दे देता, वे ले लेते।   अपनी तरफ से कोई मांग नहीं रखते। एक दिन सुबह जब समर्थ गुरु...
     

  • January 19, 04:46
     
    भूदान आंदोलन के दिनों की बात है। इसके प्रणोता आचार्य विनोबा भावे थे और उनकी पदयात्रा चल रही थी। अपने कुछ अनुयायियों के साथ विनोबाजी मीरा बहन के आश्रम में रुके थे। थोड़े विश्राम के उपरांत पदयात्रा पुन: आरंभ हुई। इस बार हरिद्वार की ओर सभी लोग जा रहे थे। विनोबाजी कुछ...
     

  • January 18, 02:42
     
    पुराने  समय में अबु उस्मान नाम के आला दर्जे के संत हुए हैं। वे शांत स्वभाव के तथा मितभाषी थे। स्नेहमय आचरण उनके स्वभाव की विशेषता थी। उनसे कोई कितनी ही कड़वी बात कह दे, किंतु वे उसका प्रत्युत्तर बड़े स्नेह से ही देते थे। क्रोध से वे कोसो दूर रहते थे और कहा जा सकता है कि...
     

  • January 17, 01:23
     
    शहर  में एक अमीर आदमी रहता था। उसके पास करोड़ों की संपत्ति थी। आलीशान हवेली में वह रहता था। एक दिन उसके किसी परिचित ने बातचीत में बताया कि उसके अपने शहर के सबसे बड़े सेठ की अचानक मृत्यु हो गई है।   उसकी अपार दौलत भी उसके प्राण बचाने में काम न आ सकी। यह सुनते ही उस अमीर...
     

  • January 16, 02:33
     
    संत  राबिया की प्रभु-भक्ति विख्यात है। वे मन, आत्मा व प्राण से ईश्वर का स्मरण करती रहतीं और प्राणिमात्र को प्रभु की रचना मानकर सेवा कार्यो में लगी रहतीं। एक रात जब राबिया सो रही थीं, तभी उनके घर में एकचोर घुस आया।   उसे राबिया के घर कोई धन-संपत्ति तो मिलनी नहीं थी।...
     

  • January 15, 01:00
     
    एक  खूंखार डाकू था अंगुलिमाल। वह लोगों को मारकर उनकी अंगुलियां काट लेता और उनकी माला बनाकर अपने गले में पहनता था। इसी कारण उसका नाम अंगुलिमाल पड़ा।   उन दिनों कौशल में राजा प्रसेनजित का शासन था। अंगुलिमाल के आतंक ने प्रसेनजित को भी त्रस्त कर रखा था। वे समझ नहीं पा...
     
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