विज्ञापन
 
 
 
 
जीवन दर्शन
 
 
 
 

  • January 14, 12:16
     
    जीवन दर्शन.. बहुत पुराने समय की बात है। एक राजा था, जो हर समय अस्वस्थ रहता था। कोई न कोई शारीरिक कष्ट उसे सदैव बना रहता था। इस कारण राज-काज में भी उसका मन नहीं लगता था। राजवैद्य से लेकर अन्य कई नामी वैद्य उसका उपचार कर चुके थे, किंतु बीमारी की जड़ कोई नहीं पकड़ पा रहा था। राजा बड़ा परेशान हो गया। एक दिन राजा को किसी से पड़ोसी राज्य के एक अच्छे वैद्य के बारे में पता चला। उसने उसे सादर...
     

  • January 13, 12:25
     
    जीवन दर्शन.. एक गांव में दो भाई रहते थे, जो अपनी शैतानियों के लिए कुख्यात थे। उन्हें दूसरों को परेशान करने में बड़ा आनंद आता था। वे हर समय किसी न किसी को परेशान करने में लगे रहते थे। गांव के लोगों के साथ-साथ उनके माता-पिता भी उनकी ऐसी हरकतों के कारण बहुत दुखी थे। जब गांव का कोई व्यक्ति उनके माता-पिता के पास उनकी शिकायत लेकर आता तो वे दोनों को बहुत समझाते, किंतु दोनों भाइयों के कानों पर...
     

  • January 12, 12:22
     
    जीवन दर्शन.. एक युवक अत्यंत जिज्ञासु प्रवृत्ति का था। वह अल्प समय में सभी प्रकार का ज्ञान हासिल करना चाहता था। इसके लिए वह अक्सर पुस्तकालय जाता और वहां नई-पुरानी सभी प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन करता रहता था। लगातार किताबें पढ़ते रहने से युवक के ज्ञान में काफी वृद्धि हुई भी थी और उसे इसका बहुत अहंकार भी था। एक बार युवक को घुड़सवारी सीखने की इच्छा हुई। वह तत्काल पुस्तकालय में...
     

  • January 11, 12:06
     
    जीवन दर्शन.. जातक कथाओं में एक कथा आती है, जो कार्य से पूर्व विचार की शिक्षा देती है। एक पुरानी हवेली में एक वृद्ध महिला रहती थी। उसके घर में और कोई नहीं था, वह अकेली थी। इसलिए उसने घर के प्रत्येक कार्य के लिए नौकर-नौकरानी रख रखे थे। उस वृद्धा के पास एक तोता था, जो अत्यंत वफादार था। वह वृद्धा का सुबह से लेकर रात तक मनोरंजन करता था। यहां तक कि पिंजरा खुला होने पर भी वह कभी नहीं भागा।...
     

  • January 10, 12:23
     
    जीवन दर्शन.. एक जंगल में अनेक पशु-पक्षियों के साथ शेर का परिवार भी रहता था। शेर के साथ शेरनी और उसके दो बच्चे थे। शेर और शेरनी अपने दोनों बच्चों को अत्यधिक स्नेह करते थे और उन्हें कहीं अकेले नहीं जाने देते थे। कभी-कभी वे अपने बच्चों को लेकर निकलते। उन्हें देखकर जंगल के सभी पशु डरकर भाग जाते थे। अधिकतर वे बच्चों को गुफा में छोड़कर जंगल में भोजन की तलाश में जाते थे और बच्चों को अकेले...
     

  • January 9, 12:17
     
    जीवन दर्शन.. वर्षा के दिन थे। शाम घिर आई थी। एक वृक्ष पर बहुत सारे कौए बैठे थे। वे आपस में लड़ रहे थे। उसी समय एक मैना वहां आई और उस वृक्ष की एक डाल पर बैठ गई। अब कौए अपना झगड़ा छोड़ मैना से लड़ने लगे। मैना ने कहा - बारिश होने वाली है और अंधेरा घिर आया है। मुझे आज रात इस पेड़ पर आश्रय दे दो, कल चली जाऊंगी। किंतु कौए नहीं माने। उन्होंने पेड़ पर केवल अपना अधिकार बताया। तब मैना बोली - यह...
     

  • January 8, 12:16
     
    जीवन दर्शन. संसार पाना हो, तो दौड़ लगाना ही पड़ती है और भगवान से मिलना हो, तो थोड़ा रुकना पड़ता है। इन दोनों के बीच की स्थिति है चलना। नए वर्ष में जब हमारे कदम प्रवेश के साथ फूट रहे हों इस बात पर विचार करिए कि यात्रा को केवल बाहर ही न रखें, भीतर की ओर मोड़ने की तैयारी भी हो। अब पूरा एक वर्ष चलना है। कितनी ही रुकावटें, कितने ही मोड़ आएंगे। गति रुकेगी नहीं, लेकिन गति मोड़ी जा सकती है। अपनी...
     

  • January 7, 12:07
     
    जीवन दर्शन.. तुलाधार एक उदार विचारधारा वाले विद्वान थे। उन्हें व्यर्थ के आडंबर और दिखावे में विश्वास नहीं था। वे न कभी किसी धार्मिक यात्रा पर गए और न ही नित्य मंदिर जाना, पूजा-पाठ करना, व्रत-उपवास रखना उनकी दिनचर्या में शामिल था। वे प्राणिमात्र की सेवा को सर्वोपरि मानकर उसी में लगे रहते थे। एक दिन तुलाधार के घर एक साधु आए। तुलाधार ने उनका यथोचित सत्कार किया। फिर दोनों के बीच...
     

  • January 6, 12:06
     
    भगवान महावीर के अनेक शिष्य थे, जो उनसे कई गंभीर विषयों पर सार्थक चर्चा करते थे। ऐसी चर्चाओं से शिष्यों को ही लाभ प्राप्त नहीं होता था, बल्कि उनके द्वारा जनता के मध्य भी ज्ञान का प्रचार होता था। एक दिन महावीर स्वामी ने अपने शिष्यों से पूछा कि मनुष्य के पतन के क्या कारण हो सकते हैं? शिष्यों ने सोचा-विचारा। फिर किसी ने अहंकार बताया तो किसी ने काम वासना। किसी शिष्य का विचार था कि लोभ...
     

  • January 5, 12:43
     
    जीवन दर्शन.. यह बात उन दिनों की है जब यूनान का बादशाह सिकंदर था। सिकंदर किसी भी विधा में पारंगत कलाकारों की बहुत कद्र करता था। वह अपने दरबार में आने वाले हर उस कलाकार का भरपूर सम्मान और सत्कार करता था, जो अपने फन में माहिर हो। एक दिन सिकंदर के मन में यह विचार आया कि राजधानी के किसी बड़े बगीचे में स्वर्गीय और वर्तमान सभी महापुरुषों की मूर्तियां स्थापित की जानी चाहिए, ताकि उनके विषय...
     

  • January 4, 12:07
     
    जीवन दर्शन.. चीन के महानतम संत कन्फ्यूशियस एक दिन जंगल में बैठकर चिंतन कर रहे थे। उन्हें प्राय: एकांत स्थलों पर जाना पसंद था क्योंकि वहां की शांति ध्यान और चिंतन-मनन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त होती थी। उस दिन चीन के सम्राट का काफिला उधर से गुजरा। जब सम्राट ने कन्फ्यूशियस को ध्यानमग्न देखा तो उनके मन में यह जिज्ञासा हुई कि ये कौन है? वे कन्फ्यूशियस के पास आए और कुछ देर तक उन्हें देखते...
     

  • January 3, 12:33
     
    मेजी रेस्टोरेशन वर्ष 1868 में जापान में हुए घटनाक्रमों का एक ऐसा सिलसिला था, जिसके जरिए वहां पर साम्राज्यवादी शासन बहाल हुआ और व्यापक सुधारों की राह प्रशस्त हुई। जापान में उन्नीसवीं सदी के शुरुआती दौर से ही तोकुगावा शोगुनेट की सत्ता का विरोध बढ़ने लगा था। वहां पर पश्चिमी ताकतों और खासकर अमेरिकियों के दखल ने विरोध को और भड़का दिया। 1854 में शोगुनेट ने विदेशी दबाव के आगे झुकते हुए कई...
     

  • January 3, 12:32
     
    यह प्रसंग उस समय का है, जब पूर्व राष्ट्रपति और सुविख्यात शिक्षाविद् डॉ. जाकिर हुसैन जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति थे। जाकिर हुसैन बेहद ही अनुशासनप्रिय व्यक्ति थे। वे चाहते थे कि जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र अत्यंत अनुशासित रहें, जिनमें साफ-सुथरे कपड़े और पॉलिश से चमकते जूते होना सर्वोपरि था। इसके लिए डॉ. जाकिर हुसैन ने एक लिखित आदेश भी निकाला, किंतु छात्रों ने उस पर...
     

  • January 2, 01:01
     
    चीन के महान नेता माओत्से तुंग के जीवन से जुड़ी एक घटना है। उनके घर में एक बगीचा था। वह इतना मनोहर था कि लोग उसे रोजाना देखने आते थे। बगीचे की देखभाल माओत्से की मां करती थीं। एक बार मां बीमार हो गईं। बीमारी में भी मां को स्वयं से अधिक बगीचे की चिंता थी। उन्हें लगता था कि खिले हुए फूल मुरझा न जाएं। मां की चिंता देख माओत्से तुंग ने बगीचे की देखरेख स्वयं आरंभ कर दी और मां को आश्वस्त कर...
     

  • December 31, 12:07
     
    जीवन दर्शन.. एक महात्मा की संपत्ति मात्र चार वस्तुएं थीं - एक कंबल, चिमटा, तूंबी और लंगोटी। इन चारों वस्तुओं में कीमत की दृष्टि से सर्वाधिक मूल्यवान था कंबल, जो महात्मा को किसी भक्त ने दिया था। एक रात वह कंबल चोरी हो गया। दूसरे दिन जब महात्मा के भक्त उनकी कुटिया में आए तो उन्हें यह जानकर बड़ा दुख हुआ। उन सभी ने महात्मा को दूसरा कंबल लाकर देने की बात कही, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर...
     
 
 
 
 
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

रोचक खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बॉलीवुड

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जीवन मंत्र

 
 
 
 
 
 
 
 
 

क्रिकेट

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बिज़नेस

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जोक्स

 
 
 
 
 
 
 
 
 

पसंदीदा खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

फोटोगैलरी

Most Viewed

Controversies that rocked B-town
Amazing Body Paintings
Just Added

करियर कॉलेज में फेयरवेल पार्टी के दौरान स्टूडेंट्स ने बिखेरे रंग
Bollywood Stars at Cannes
 
 
 
विज्ञापन