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जीवन दर्शन
 
 
 
 

  • December 21, 12:06
     
    एक  आदमी के दो बेटे थे। जब वह वृद्ध हुआ, तो उसने अपने दोनों बेटों को अपने पास बुलाया और कहा - ‘अब मैं बूढ़ा हो गया हूं। पता नहीं, जीवन कब खत्म हो जाए? इसलिए शेष जीवन मैं हरिद्वार में गंगा किनारे भगवान के भजन में बिताना चाहता हूं।   चूंकि पैसा झगड़े की जड़ है, इसलिए मैं...
     

  • December 20, 12:14
     
    बौद्ध संघ के एक भिक्षु को कोई गंभीर रोग हो गया। उसकी हालत इतनी खराब हो गई कि वह चल-फिर भी नहीं सकता था और मल-मूत्र में लिपटा पड़ा रहता था। उसकी यह हालत देख उसके साथी भिक्षु भी उसके पास नहीं आते और घृणा से मुंह फेरकर आसपास से निकल जाते थे। कुछ दिनों बाद बुद्ध को यह बात पता...
     

  • December 19, 01:01
     
    एक गरीब बुजुर्ग महिला अपने गांव से दूसरे गांव जाने के लिए निकली। उसके सिर पर एक भारी पोटली रखी थी। चलते-चलते वह थक गई।   सोचने लगी कि किसी का थोड़ा सहारा मिल जाए, तो अच्छा हो। तभी उधर से एक घुड़सवार गुजरा। बुजुर्ग महिला उसे रोकते हुए बोली - ‘बेटा! मैं बहुत थक गई हूं।...
     

  • December 18, 01:23
     
    एक साधु अपनी कुटिया में परम आनंद से रहते थे। सभी वर्गो के लोग उनकी सहजता तथा ज्ञान देखकर उनके पास आते और उनका सान्निध्य पाकर अपनी कठिनाइयों का सरल हल पा जाते।   एक दिन एक धनी उनके पास कुछ दिन रहने के लिए आया। उसने अपने मन की ऊहापोह इस रूप में साधु के समक्ष रखी -...
     

  • December 15, 12:57
     
    एक दिन महिला संत राबिया कुछ जिज्ञासुओं के साथ धर्म-चर्चा कर रही थीं। यह उनकी दिनचर्या का एक अभिन्न हिस्सा था।   उपस्थितजन राबिया से अपनी आध्यात्मिक जिज्ञासाओं व शंकाओं का समाधान कर रहे थे। अचानक राबिया ने उनमें से एक व्यक्ति से प्रश्न किया- ‘तुम ईश्वर की भक्ति...
     

  • December 14, 12:11
     
    आनंद भगवान बुद्ध के प्रमुख व प्रिय शिष्य थे। उनके स्वभाव में उदारता, स्नेह व सहिष्णुता जैसे गुण शामिल थे। वे सभी के प्रति समान व्यवहार करते थे। उनकी दृष्टि में कोई छोटा या बड़ा नहीं था। एक बार आनंद कहीं जा रहे थे। रास्ते में उन्हें बड़े जोर की प्यास लगी।   आसपास देखा,...
     

  • December 13, 12:53
     
    किसी  गांव में एक वृद्धा रहती थी। वह चरखे पर सूत कातकर अपने परिवार का पालन-पोषण करती थी। वृद्धा के खेत में कपास होता था। वह अपने घर के सभी लोगों के वस्त्र इस कपास के सूत को कातकर तैयार कर देती थी और अतिरिक्त कपास या रूई दूसरे गांवों में बैलगाड़ियों के माध्यम से...
     

  • December 11, 11:36
     
    एक  राजा और रानी की एक ही पुत्री थी। उसके बड़े होने पर रानी को उसके विवाह की चिंता हुई। राजा और रानी ने अनेक राजकुमार देखे, किंतु अपनी बेटी के अनुकूल किसी को नहीं पाया। एक दिन रानी उदास बैठी हुई थी। तभी महल में सफाई का काम करने वाली एक नौकरानी वहां आई। उसने रानी से...
     

  • December 11, 05:40
     
    एक  साधु किसी बस्ती के किनारे अपनी कुटिया में रहता था। सुबह-शाम उसकी कुटिया के आंगन में भजन-कीर्तन होता। उसके बाद वह सभी को उपदेश देता था। अपने उपदेशों के माध्यम से वह सदाचरण की शिक्षा देता था।   अमीर हो या गरीब, साधु की कुटिया के द्वार सभी के लिए खुले थे। लोग साधु के...
     

  • December 10, 04:53
     
    वाल्मीकि  रामायण में एक बड़ा ही प्रेरक प्रसंग आता है। जब श्रीराम ने रावण का वध करके लंका विजय कर ली, तब उन्हें सर्वप्रथम विभीषण का राजतिलक कर उसे लंका के सिंहासन पर आसीन करना था। इस कार्य के लिए उन्होंने लक्ष्मण को चुना।   लक्ष्मण से श्रीराम ने कहा - 'लक्ष्मण! तुम...
     

  • December 7, 11:07
     
    सिकंदर  की विश्व विजय से सभी परिचित हैं। उसने अपने इस विजय-अभियान से अपार धन-दौलत कमाई। तत्कालीन समय में वह सर्वाधिक अमीर बादशाह था। इस अपार धन-संग्रह से उपजी ताकत ने उसे अहंकारी बना दिया था। उसे लगता था कि उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता और वह सर्वशक्तिमान है।   ...
     

  • December 7, 12:04
     
    एक  विलासी बादशाह था। वह सभी प्रकार के व्यसन और दुराचार करता तथा अपने वजीर से कहता- ‘मनुष्य का जन्म बार-बार नहीं मिलता है, इसलिए खूब भोग करो और आनंद लो।’ वजीर बहुत भला था। उसे बादशाह की आदतों व आचरण से बड़ा कष्ट होता।   कभी-कभी अवसर देखकर वह बादशाह को समझाने का...
     

  • December 6, 12:22
     
    एक दिन गांधीजी सेवाग्राम में घूमने निकले। साथ में उनके कुछ सहयोगी भी थे। स्वराज को लेकर चर्चा हो रही थी और गांधीजी सभी के विचार सुन रहे थे। साथ ही अपनी राय भी व्यक्त कर रहे थे।   इस भ्रमण के दौरान गांधीजी की दृष्टि मार्ग में पड़े पूनी के एक छोटे-से टुकड़े पर गई।...
     

  • December 5, 12:05
     
    चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री चाउ एन लाइ भारत आए हुए थे। पंडित जवाहरलाल नेहरू खासे उत्साहित थे। चीनी प्रधानमंत्री के सत्कार में कोई कमी न रह जाए, इसके लिए नेहरूजी स्वयं सभी व्यवस्थाओं पर निगरानी रख रहे थे।   विशिष्ट अधिकारियों की पूरी टीम चाउ एन लाइ के आतिथ्य में...
     

  • December 3, 11:10
     
    एक  विख्यात संत थे। दूर-दूर से शिक्षा प्राप्त करने शिष्यगण उनके पास आते थे। उनके अनेक शिष्यों में दो उन्हें अति प्रिय थे, क्योंकि दोनों बहुत धार्मिक वृत्ति के थे। दोनों नित्य प्रात:काल जल्दी उठकर स्नान करने के बाद पूजा-पाठ में लग जाते।   चार घंटे की पूजा के बाद वे...
     
 
 
 
 
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