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1000 साल से निकल रहा है यहां पानी, मृत कुंड में रहता है सांपों का जोड़ा

Rajeev Tiwari | Sep 12, 2013, 11:53AM IST

(महाशिवरात्रि के अवसर पर भास्कर डॉट कॉम इंदौर बायपास स्थित देवगुराडिय़ा पहाड़ी स्थित गुटेश्वर महादेव से जुड़ी बातों से रूबरू करा रहा है। शिवरात्रि पर्व की वजह से अलसुबह 4 बजे से ही इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शनों को पहुंच गए थे। इंदौर ही नहीं दूर-दूर से यहां भक्त पहंचते हैं।)


 


इंदौर. इंदौर बायपास से बैतूल मार्ग पर देवगुराडिय़ा पहाड़ी स्थित गुटकेश्वर महादेव का एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना शिव मंदिर है, जिसमें हर साल सावन माह में पहाड़ी जल से शिवजी का प्राकृतिक अभिषेक होता है। मंदिर में शिवलिंग के ऊपर की तरफ बने नंदी के मुख से प्रतिवर्ष प्राकृतिक जल निकलता है। यह सीधे शिवलिंग पर गिरता है और मंदिर के दरवाजे के बाहर बने अमृत कुंड़ में भर जाता है। मंदिर में कुल पांच कुंड़ है। शिवजी पर गिरने वाला प्राकृतिक जल इन कुंडों में भरता है। पहला कुंड शिवलिंग के ठीक सामने स्थित है। इसे अमृत कुंड कहा जाता है। इसी अमृत कुंड से मंदिर के बाहर बने शेष चार कुंडों में पानी भरता है। बाहर के कुंड में यहां आने वाले श्रद्वालु स्नान करते हैं, जबकि अमृतकुंड का जल शिव पर चढ़ता है। मंदिर के बाहर बने चार कुंडों के बीचोबीच एक मंदिर बना हुआ है। इसमें भी शिवलिंग स्थापित किए गए हैं। यहां के लोग बताते हैं कि गुटकेश्वर महादेव के दर्शन करने के बाद कुंड के बीच स्थित शिवलिंग के दर्शन करना भी जरूरी होता है।


सोमवार शाम जोड़ा मंदिर में आता है : बुजुर्गों के मुताबिक मंदिर परिसर में बने अमृत कुंड में सर्प का एक जोड़ा सालों से रह रहा है। कहते हैं सोमवार शाम को यह जोड़ा मंदिर में अवश्य आता है और सिर्फ किस्मत वाले ही इस जोड़े का दर्शन कर पाते हैं। सापों का यह जोड़ा कई बार अमृत कुंड और उसके आसपास भी देखा गया है। यह प्राकृतिक अभिषेक एक हजार साल से भी ज्यादा समय से हो रहा है ।


भगवान गरुड़ ने यहां कठिन तपस्या की थी : पुजारी ओमप्रकाश पुरी बताते हैं कि उनकी सोलह पीढिय़ां इस मंदिर की पूजा करती आयी हैं और अब सत्रहवीं पीढ़ी यह काम संभालने के लिए तैयार है। वे बताते हैं कि यह मंदिर एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। मान्यता यह है कि भगवान गरुड़ ने यहां कठिन तपस्या की थी, जिसके बाद यहां शिवलिंग प्रकट हु्आ था। होल्कर रियासत की देवी अहिल्या शिव की भक्त थीं, उन्होंने इस प्राचीन शिव मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था।
 



 


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