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गोपनीयता के खिलाफ एक सशक्त आवाज

भास्कर न्यूज | Nov 27, 2012, 00:03AM IST
 
 

स्पीकर- हीथर ब्रूक
 
प्रोफाइल :  सिटी यूनिवर्सिटी लंदन में जर्नलिज्म की प्रोफेसर और पत्रकार ब्रूक सूचना के अधिकार की पैरोकार हैं। 
 
 TED पर अब तक 2,55,850 लोग सुन चुके हैं।
 
 
पहले दुनिया बड़े परिवार की तरह थी। इसे शक्तिशाली माता-पिता चलाते थे। लोग असहाय और आशाहीन शरारती बच्चों की तरह थे। अगर कोई माता-पिता के अधिकारों के बारे में पूछता तो उसे डांट दिया जाता। यदि वे माता-पिता के कमरों में जाते, तो उन्हें सजा दी जाती।
 
एक दिन बाहर से एक आदमी माता-पिता के कमरों से चुराए गए गोपनीय दस्तावेजों के साथ आया। उसमें मैप्स और मिनट्स ऑफ मीटिंग थे। बच्चों ने उसे देखा और चकित रह गए। क्योंकि माता-पिता भी उनकी तरह ही गलतियां और व्यवहार कर रहे थे।
 
अंतर सिर्फ एक ही था, उनकी गलतियों को छिपाया जा रहा था। उस गांव में एक बच्ची थी, जिसका मानना था कि कुछ भी गोपनीय नहीं होना चाहिए। सारे दस्तावेजों को पढ़ने का बच्चों को अधिकार होना चाहिए। वो लड़की मैं हूं। सीकेट्र दस्तावेज, जो मैं चाहती थी वे, ब्रिटिश संसद में रखे खर्चो की रसीदें हैं। मुझे ये देने में आनाकानी। ऐसा लगा जैसे मैंने न्यूक्लियर बंकर का कोड मांग लिया हो। इसके लिए मैंने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और जीती।
 
समस्या ये थी कि संसद ये डाटा मुझे देने में टालमटोल कर रही थी। ताकि इस दौरान वे ऐसे कानून बना सकें, जिससे पूर्व में हुई गलतियों से वे बच सकें। लेकिन वे डिजिटाइजेशन को भूल गए थे। इससे सारा डाटा कॉपी कर संसद के बाहर भेजा जा सकता था। ऐसा हुआ और टेलीग्राफ अखबार ने हफ्तों तक इसके खुलासे किए। नतीजतन छह मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा। ३क्क् सालों में पहली बार हाउस के स्पीकर को दबाव में इस्तीफा देना पड़ा और पारदर्शिता के जनादेश पर नई सरकार का गठन हुआ। चार मंत्रियों सहित छह लोगों को जेल हुई। 
 
मूल कहानी पर आते हैं। तथाकथित मां-बाप घबरा गए। उन्होंने सारे दरवाजे बंद कर दिए। उन्होंने घरों में सीसीटीवी कैमरे लगा दिए। वे जानने की कोशिश कर रहे हैं कि कौन उनके लिए खतरा बन सकता है। और जो उनके खिलाफ शिकायत करता है, उसे आतंकवाद के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया जाता है।
 
वर्तमान में कई देशों में हमारे अधिकार कमजोर हैं। ब्रिटेन सहित कई देशों में ऑफिशियल सीक्रेट कानून हैं। इसका उल्लंघन करने पर लोगों को सजा दी जाती है। तो इसका हल क्या है? मेरा मानना है कि सूचना के अधिकार का कानून होना चाहिए। हमें इस दिशा में काम करना है। 
 

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