चिंताजनक कुपोषण
bhaskar news | Sep 22, 2012, 07:20AM IST
ताजा रिपोर्ट के जरिए पहली बार पोषण बैरोमीटर पेश करने की कोशिश की गई है। इसका निष्कर्ष है कि भारत की 70 फीसदी महिलाएं व बच्चे पोषण संबंधी कमियों से ग्रस्त हैं। रिपोर्ट में कुपोषण से निपटने के मामले में उन 36 देशों के प्रदर्शन का जायजा लिया गया है, जहां दुनिया के 90 फीसदी कुपोषित बच्चे रहते हैं। इस मामले में भारत का दर्जा बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से भी नीचे है। सबक साफ है। अर्थव्यवस्था की तेज विकास दर धीरे-धीरे समाज के सभी तबकों में खुशहाली लाएगी, यह विश्वास व्यवहार में सच साबित नहीं हो रहा है।
इसी तरह प्रशासनिक भ्रष्टाचार और अकुशलता के कारण सरकारी कल्याणकारी योजनाएं अपना मकसद पाने में पिछड़ी हुई हैं। इसलिए संबंधित गैर-सरकारी संस्था का यह अंदेशा निराधार नहीं है कि भारत मिलेनियम विकास लक्ष्यों (एमडीजी) को प्राप्त करने में विफल हो सकता है। सरकारों को अब अधिक कुशल ढंग से हस्तक्षेप करना होगा। सबके लिए भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं का इंतजाम करना एक ऐसा लक्ष्य है, जिसके बिना भारत उस शर्म को नहीं धो सकता, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री ने किया था। इसके साथ ही भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अकुशलता से अब युद्धस्तर पर संघर्ष की जरूरत है। वरना हमारी विकासगाथा सवालों के घेरे में रहेगी।






