विज्ञापन
 
Home >> Abhivyakti >> Editorial >> Alarming Malnutrition

चिंताजनक कुपोषण

bhaskar news | Sep 22, 2012, 07:20AM IST
 
 

भारत की विकासगाथा को समावेशी बनाने के लक्ष्य के सामने चुनौतियां कितनी बड़ी हैं, यह एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संस्था की रिपोर्ट से फिर साफ हुआ है। यह रिपोर्ट उसी दौर के बारे में है, जब हमारी अर्थव्यवस्था की ऊंची विकास दर ने दुनिया को आकर्षित किया। इसका दुखद पक्ष यह है कि विकास के लाभ देश की एक बड़ी आबादी तक नहीं पहुंच रहे हैं। कुछ माह पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तस्दीक की थी कि देश में 42 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। उन्होंने इसे "राष्ट्रीय शर्म" बताया था।






ताजा रिपोर्ट के जरिए पहली बार पोषण बैरोमीटर पेश करने की कोशिश की गई है। इसका निष्कर्ष है कि भारत की 70 फीसदी महिलाएं व बच्चे पोषण संबंधी कमियों से ग्रस्त हैं। रिपोर्ट में कुपोषण से निपटने के मामले में उन 36 देशों के प्रदर्शन का जायजा लिया गया है, जहां दुनिया के 90 फीसदी कुपोषित बच्चे रहते हैं। इस मामले में भारत का दर्जा बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से भी नीचे है। सबक साफ है। अर्थव्यवस्था की तेज विकास दर धीरे-धीरे समाज के सभी तबकों में खुशहाली लाएगी, यह विश्वास व्यवहार में सच साबित नहीं हो रहा है।





इसी तरह प्रशासनिक भ्रष्टाचार और अकुशलता के कारण सरकारी कल्याणकारी योजनाएं अपना मकसद पाने में पिछड़ी हुई हैं। इसलिए संबंधित गैर-सरकारी संस्था का यह अंदेशा निराधार नहीं है कि भारत मिलेनियम विकास लक्ष्यों (एमडीजी) को प्राप्त करने में विफल हो सकता है। सरकारों को अब अधिक कुशल ढंग से हस्तक्षेप करना होगा। सबके लिए भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं का इंतजाम करना एक ऐसा लक्ष्य है, जिसके बिना भारत उस शर्म को नहीं धो सकता, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री ने किया था। इसके साथ ही भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अकुशलता से अब युद्धस्तर पर संघर्ष की जरूरत है। वरना हमारी विकासगाथा सवालों के घेरे में रहेगी।
 
 
 

आपके विचार
 
 
कोड:
6 + 8

 
Ad Link
विज्ञापन
विज्ञापन
 
 
 
 
Sabse Bada Match Fixer Contest
 
 

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

क्रिकेट

बिज़नेस

जोक्स

पसंदीदा खबरें

Email Print Comment
Email Print Comment