एक्सप्लोरर-1 अमेरिका का पहला उपग्रह था, जिसने इंटरनेशनल जियोफिजिकल ईयर 1957-58 में अमेरिकी भागीदारी सुनिश्चित की थी। इसे आधिकारिक तौर पर ‘1958 अल्फा’ के नाम से जाना जाता है। कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में डिजाइन किए गए इस उपग्रह को फ्लोरिडा के केप केनेवेरल (मौजूदा केप कैनेडी) सेंटर से 31 जनवरी 1958 को रात में तकरीबन पौने ग्यारह बजे जुपिटर-सी रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया था।
शीत युद्ध के उस दौर में अमेरिका के इस मिशन से एक साल पहले सोवियत रूस अपने दो उपग्रह (स्पुतनिक-1 व 2) अंतरिक्ष में भेज चुका था, जिसके चलते दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष कार्यक्रम की होड़ शुरू हो गई थी। यह पहला उपग्रह था, जिसने अंतरिक्ष में कॉस्मिक विकिरण बेल्ट की मौजूदगी का पता लगाया था। चूंकि इसकी व्याख्या डॉ. वान एलन ने की थी, लिहाजा इसे ‘वान एलन रेडिएशन बेल्ट’ की संज्ञा दी गई।
इस उपग्रह ने अपनी बैटरियां खत्म होने से पहले तकरीबन चार महीने तक पृथ्वी पर संकेत भेजे। यह वर्ष 1970 तक अंतरिक्ष में अपनी कक्षा में घूमता रहा। इसके बाद एक्सप्लोरर श्रंखला में नब्बे से अधिक उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे गए।