और भी कारगर कदम उठाने की जरूरत है
Source: जोगिंदर सिंह | Last Updated 00:26(29/01/12)
इन दिनों भ्रष्टाचार को लेकर हमारे देश में बहुत ज्यादा जागरूकता का माहौल है। भ्रष्टाचार के खात्मे को लेकर आंदोलन या चर्चा-बहस जारी हैं। साथ ही लोकपाल बिल का भी बड़ा हल्ला है। भ्रष्टाचार रूपी दानव के खात्मे में लोकपाल बिल बहुत कारगर होगा, आमतौर पर एेसा माना जा रहा है। जबकि मैं इससे पूरी तरह असहमत हूं। मुझे लगता है, लोकपाल के अलावा भ्रष्टाचार से निबटने के लिए और भी कारगर कदम उठाने की जरूरत है। टीम अन्ना का प्रस्तावित प्रभावी लोकपाल बिल भी यदि अस्तित्व में आ जाए, तो भी यह भ्रष्टाचार को मिटाने में बहुत असरदार साबित नहीं होगा, क्योंकि हमारे यहां पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं हैं।
लोकपाल के दम से यदि हमने भ्रष्टाचारियों पर शिकंजा कस भी लिया, तब भी उन्हें कब सजा मिलेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है। वे सालों तक भ्रष्टाचार के जरिए जमा किए पैसे से ही केस लड़ते रहेंगे। वर्तमान में हमारे यहां 25 लाख केस पेंडिंग हैं, सौ साल पुराने केस तक चल रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस एपी शास्त्री ने एक बार कहा था सारे केसों को सुलझाने में 465 साल लगेंगे।
लिहाजा जजों की संख्या बढ़ाना बहुत जरूरी है। दुनिया में उसूल है कि 10 लाख लोगों के लिए 50 जज होना चाहिए। अमेरिका में 160 हैं। हमारे यहां साढ़े नौ हैं। जज ही नहीं बैठेंगे, तो कहां से फैसला होगा? फ्रांस में आय से ज्यादा संपत्ति मिलने पर बताना पड़ता है कि कहां से आई? हिंदुस्तान में भी ऐसा ही कानून बने।
हमारे यहां रिश्वत लेने और देने वाले, दोनों को गुनाहगार माना जाता है, रिश्वत देने वाले को अपराधी न माना जाए। विटनेस प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की जरूरत है। आप ही सोचिए, किसी भी बाहुबली के खिलाफ कोई व्यक्ति अपनी जान जोखिम में डालकर कैसे गवाही दे पाएगा? वैसे मैं यह भी कहूंगा कि सरकार चाहे, तो भ्रष्टाचार को काफी हद तक नियंत्रित कर सकती है। नौकरशाही में भ्रष्टाचार गले-गले तक है और सरकार भ्रष्टाचार का आरोप लगने पर अफसर को (केस का फैसला आने तक) धारा 311 के तहत नौकरी से निकाल सकती है। ऐसा किया जाना चाहिए। (अमित स्वप्निल से बातचीत पर आधारित) -पूर्व सीबीआई निदेशक