विज्ञापन
 
 
 
 

दमे के बावजूद दौड़-दौड़कर जनसेवा की डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने

 
Source: bhaskar news   |   Last Updated 00:10(02/02/12)
 
 
 
 
विज्ञापन
जीवन दर्शन.. देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भावनाओं के प्रबल समर्थक थे। वे इनका न केवल वाणी से समर्थन करते थे, बल्कि अपने आचरण में भी इन्हें जीते थे। उनके जीवन की एक घटना है, जो उनके इसी स्वरूप को दर्शाती है। एक बार राजेंद्र प्रसाद रेल द्वारा दरभंगा से पटना जा रहे थे कि उनकी गाड़ी सोनपुर स्टेशन पर रुकी। वहां से उन्हें पहलेजा घाट जाना था, जहां से स्टीमर द्वारा गंगा नदी पार कर पटना पहुंचना था।


सोनपुर एक बड़ा जंक्शन है, जहां चारों ओर से गाड़ियां आती हैं। राजेंद्र प्रसाद की गाड़ी जहां रुकी थी, उसके सामने ही छपरा की ओर से एक गाड़ी आकर रुकी। मई का महीना था और सूरज तीव्र गर्मी बरसा रहा था। छपरा से आने वाली गाड़ी पूरी भरी थी। उसमें से जितने लोग उतरे, उससे कहीं अधिक घुस गए। गाड़ी एक्सप्रेस थी और 5-10 मिनट बाद चल देती थी। कुछ स्त्रियां और बच्चे पानी-पानी चिल्ला रहे थे, किंतु उनकी चीख-पुकार सुनने वाला वहां कोई नहीं था।


राजेंद्र बाबू से उनका कष्ट देखा नहीं गया। वे लोटा लेकर नल की ओर दौड़े और उन्हें पानी पिलाने लगे। इस बीच उनकी गाड़ी भी रवाना हो गई। वे दौड़कर उसमें सवार तो हो गए, किंतु दमे के कारण उनकी हालत खराब हो गई। कथा का सार यह है कि जरूरतमंदों की निष्काम मदद का भाव व्यक्ति का बड़प्पन दर्शाता है और स्वयं के कष्टों को परे रखकर सहायता करने में बड़प्पन से भी बढ़कर महानता परिलक्षित होती है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
आपके विचार

 
 
कोड :
3 + 5

 
 
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

रोचक खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बॉलीवुड

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जीवन मंत्र

 
 
 
 
 
 
 
 
 

क्रिकेट

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बिज़नेस

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जोक्स

 
 
 
 
 
 
 
 
 

पसंदीदा खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

फोटोगैलरी

Most Viewed

Controversies that rocked B-town
Amazing Body Paintings
Just Added

करियर कॉलेज में फेयरवेल पार्टी के दौरान स्टूडेंट्स ने बिखेरे रंग
Bollywood Stars at Cannes
 
 
 
विज्ञापन
 
 
| Email  Print Comment
| Email  Print Comment