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आवंटन पर उचित फैसला

Bhaskar News | Sep 29, 2012, 00:01AM IST
 
 

नीलामी या आवंटन- प्राकृतिक संसाधनों के मामले में यह बहस दूरसंचार के 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के संदर्भ में खड़ी हुई, जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने कहा कि नीलामी का तरीका न अपनाने से राजकोष को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

उसके बाद 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन के 122 लाइसेंसों को रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी कर दी कि सभी प्राकृतिक संसाधनों का आवंटन नीलामी के माध्यम से ही होना चाहिए। निहितार्थ यह था कि सरकार सार्वजनिक हित की अपनी किसी खास नीति के तहत संसाधनों के उपयोग की योजना नहीं बना सकती। कई हलकों में इसे कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में न्यायपालिका का दखल माना गया। बहरहाल अब सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में पैदा हुई तमाम गलतफहमियों को दूर कर दिया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 2जी का फैसला सिर्फ स्पेक्ट्रम के आवंटन से संबंधित था। उसमें की गई टिप्पणी दूसरे संसाधनों पर लागू नहीं होगी। कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ नीलामी ही प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को तय करने का तरीका नहीं है। प्रधान न्यायाधीश एसएच कापडिया के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय पीठ ने संवैधानिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 39(बी) के तहत संसाधनों के वितरण के लिए मार्गदर्शक पहलू सार्वजनिक हित है। नीलामी अधिकतम राजस्व प्राप्त करने का सबसे अच्छा तरीका है, लेकिन ऐसा करना ही हमेशा अकेला उद्देश्य नहीं हो सकता।

स्पष्टत: सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे वितरण या आवंटनों के संदर्भ में प्राथमिकता तय करने के कार्यपालिका के अधिकारों की पुष्टि की है। यह संवैधानिक भावना के अनुरूप है, जिसके मुताबिक नीति बनाना सरकार का काम है, जो संसद के प्रति उत्तरदायी होती है। नीति पर अमल कानून-सम्मत हो, यह सुनिश्चित कराना कोर्ट का काम है। ताजा फैसले ने यह स्थिति बहाल कर दी है।
 
 
 

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