विज्ञापन
 
Home >> Abhivyakti >> Jeevan Darshan >> Bal Gangadhar Tilak

तिलक आखिर नहीं झुके

भास्कर | Sep 25, 2012, 05:52AM IST
 
 

बाल गंगाधर तिलक पर ब्रिटिश सरकार ने आरोप लगाया था कि उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध खूनी क्रांति के लिए जनता का आह्वान किया है। उन्हें 24 जून, 1908 को गिरफ्तार किया गया। न्यायालय में उन्होंने पूरे साहस से अपना पक्ष रखा- ‘जब तक आप हमें आजादी नहीं देते, हम इसी तरह बम फेंकते रहेंगे। मैं निर्दोष हूं। शायद परमात्मा की यही इच्छा है कि मैं जेल जाऊं, ताकि अपने घोषित लक्ष्य को प्राप्त कर सकूं।’ उन्हें मांडले जेल भेज दिया गया। जेल में बंद तिलक से उनकी पत्नी मिलने आईं तो यह देखकर बेहद दुखी हुईं कि दिसंबर की ठंड में उनके पति लकड़ी के एक कैबिन में हैं, जहां सर्दी से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं है।

घर लौटने के बाद वह निरंतर भगवान से पति के स्वास्थ्य और सुरक्षा की याचना करती रहतीं। इसी तरह एक वर्ष बीत गया। तिलक का स्वास्थ्य गिरने लगा। उनके मित्र ने उनसे कहा- ‘तुम्हें छह साल की सजा हुई है और एक साल में ही तुम्हारी हालत गिरने लगी है। यदि तुम सरकार की शर्ते मान लो तो मैं तुम्हें जेल से छुड़ा सकता हूं।’ तिलक स्वाभिमान से बोले- ‘नवयुवक हमारे त्याग से ही प्रेरणा ग्रहण करते हैं। यदि मैं अंग्रेज सरकार की शर्ते मान लूं तो उन नवयुवकों को कौन प्रेरणा देगा! मुझे अपनी कुर्बानी देने दो।’ तिलक की महानता देख मित्र की आंखें भर आईं। सार यह है कि उच्च लक्ष्य हासिल करने के लिए त्याग अपेक्षित है।
 
 
 

आपके विचार
 
 
कोड:
8 + 4

 
Ad Link
विज्ञापन
विज्ञापन
 
 
 
 
Job Alerts
 
 

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

क्रिकेट

बिज़नेस

जोक्स

पसंदीदा खबरें

Email Print Comment
Email Print Comment