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12-12-12 जैसी एकता हो परिवार में

पं. विजयशंकर मेहता | Dec 11, 2012, 23:39PM IST
परिवार  में रहने का एक सुंदर तरीका है या तो किसी के हो जाओ या किसी को अपना बना लो। ‘हम सब एक हैं’ यह हर परिवार का आदर्श वाक्य होना चाहिए और एक होने के लिए खुद को मिटना होता है।
 
आज कैलेंडर की तिथियों का एक अद्भुत संयोग है कि दिन, माह और वर्ष एक जैसे अंकों में दर्ज हैं। यह समानता परिवार प्रबंधन के लिए भी प्यारा संकेत करती है। रिश्तों में भी जब आज की तारीख जैसी एकता और समानता हो जाए, उस दिन परिवार बैकुंठ हो जाएगा।
 
दरअसल न तो परिवार एक गुफा है, जिसमें पशु रहते हैं, न कोई बिल है जिसमें से चूहे या सांप निकलते हैं। इसे बागड़ भी न बनाया जाए, जिसमें भेड़ों के झुंड रहते हैं। छत और चारदीवारी होने के बाद भी एक खुला आसमान होना चाहिए। जहां सबकी अपनी उड़ान हो। ऐसी उड़ान जो अहंकार से नहीं प्रेम के पंखों से भरी जाए। इसीलिए भारतीय संस्कृति ने परिवार को कुटुंब नाम दिया है।
 
यह परमात्मा का प्रसाद है, जिसमें स्वाद भी है और मूल्य भी। इसलिए जब दो पीढ़ियां आमने-सामने हों और सबको आज के कैलेंडर की अद्भुत तारीख जैसा बनाना हो तो एक प्रयोग करें। नई पीढ़ी के लोग अपने बुजुर्गो को वृक्ष मानें। अपने पितरों को बीज समझें और यह मानकर चलें कि वृक्ष के पास देने के लिए केवल फल ही नहीं सहारा, छांव और प्रकृति की शीतलता भी है। इसी प्रकार बड़े-बूढ़े लोग नई पीढ़ी के अपने बच्चों को समझें कि हमारी संतानें हमारे ही वृक्ष का फल हैं। अब कोई वृक्ष अपने फलों से कैसे शिकायत कर सकता है। एक-दूसरे के प्रति इतनी तैयारी पूरे परिवार को एक बना देगी। फिर किसी में कोई भेद नहीं होगा। जैसे आज की तारीख।
  
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