बर्नार्ड शॉ ने राजा को दिखाया आईना
bhaskar news | Oct 03, 2012, 05:04AM IST
एक बार राजा ने जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, जो सुविख्यात साहित्यकार थे, को अपने दरबार में निमंत्रित किया। जब शॉ आए, तो राजा ने उनका यथोचित सत्कार करने के पश्चात अपनी कुछ कविताएं उन्हें दिखाकर उनसे राय मांगी। शॉ बहुत स्पष्टवादी थे, किंतु वे यह भी जानते थे कि राजा की कविताओं को बुरा कहने से वे उनके कोपभाजन बन जाएंगे।
इसलिए शॉ बहुत देर तक उन कविताओं को पढ़ते रहे और फिर प्रशंसा के शब्दों में सत्य को कुछ यूं राजा के सामने रखा - ‘मैं यही कहूंगा कि आपके लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं है। यदि आप एक बुरी-सी कविता लिखना चाहते हैं, तो उसमें भी सफल हो जाते हैं।’ शॉ की बात राजा की समझ में भी आ गई और अप्रिय भी नहीं लगी। सार यह है कि अनेक प्रतिकूल अवसरों पर स्वयं की रक्षार्थ सत्य को सीधे न कहते हुए आवरण में प्रस्तुत करना पड़ता है, जिसे शास्त्र ‘आपद्धर्म’ कहते हैं और इसे नीति-सम्मत ही मानते हैं।






