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बेस्ट स्पीच: कमियों पर बात करें, खूबियों से सबक मिलेंगे

डायना लाफेनबर्ग | Oct 18, 2012, 00:06AM IST
 
 


स्पीकर- डायना लाफेनबर्ग

प्रोफाइल : डायना फिलेडेल्फिया की साइंस लीडरशिप अकेडमी में प्रोफेसर हैं। वे शिक्षा प्रणाली में बदलाव की पक्षधर हैं। 
TED पर इसे अब तक 5,12,880 लोग सुन चुके हैं।

मैं काफी समय से पढ़ा रही हूं। ऐसा करते हुए अनुभव का एक विशाल भंडार इकट्ठा कर चुकी हूं। मेरी दादी, मेरे पिता और मेरे पढऩे के दिनों से अब तक शिक्षा में काफी बदलाव आया है। इस दौर में हमने इंटरनेट का आगमन देखा। कंसास और एरिजोना में पढ़ाने के बाद मुझे पता चला कि हम जिस तरीके से पढ़ा रहे हैं, वह आज के जमाने में सही नहीं है।

इंटरनेट के दौर में महज बस एक क्लिक दूर होती हैं सारी जानकारियां। तब मुझे अहसास हुआ कि हम उन्हें ज्ञान कैसे दें? उनसे कैसे कहें कि वे गलती नहीं करें? यह बेहद गलत है कि हम बच्चों से कभी भी गलती न करने को कहें। बच्चों के साथ समय बिताते हुए मैंने जाना कि उन्हें हमेशा सही उत्तर देने के लिए प्रोत्साहित करने से उन्हें सीखने का मौका नहीं मिलता है। इसके बाद हमने एक योजना बनाई, जो असफलता से जुड़ी थी।

मैंने बच्चों को गंभीर विषयों पर अपने विचार व्यक्त करने को कहा। मैंने उनसे कहा कि वे जो भी समझ में आए, उसे फोटो और शब्दों के सहारे व्यक्त करें। अंत में हम फैसला करेंगे कि किसका प्रोजेक्ट सबसे अच्छा है? और जब मैंने कुछ दिनों बाद उनसे पूछा, 'वह निर्णय करें? ' तो सबने कहा, 'यह वाला। 'क्यों' से जुड़े प्रश्नों पर सबने अलग-अलग कारण बताए। उनमें से ज्यादातर सही थे। अच्छा नहीं करने वाले बच्चों ने स्वीकार किया कि उनसे कहां चूक हो गई। हमने घंटों इसपर बात की। इस बातचीत के अनुभव से उन्हें सीखने को मिला। एक ऐसी सीख जो हारने के बाद भी बगैर किसी पश्चाताप या हीन-भावना के मिली।

वास्तव में हमें इस दकियानूसी विचार को छोडऩा होगा कि बच्चों को सीखने के लिए स्कूल आने की जरूरत है। इसके बजाय हम उनसे ही पूछें कि उन्हें क्या करना है? उनसे रोचक प्रश्न पूछें। वे आपको निराश नहीं करेंगे। उनसे अलग-अलग जगहों पर जाने के लिए कहिए। चीजों को खुद समझने के लिए कहिए। खुद अनुभव करने के लिए कहिए। खेलने के लिए, जिज्ञासु होने के लिए कहिए। यह भी तो सीखना ही है, क्योंकि हम उन्हें असल जगहों पर जाने के लिए कह रहे हैं।

यदि हम शिक्षा का मतलब सिर्फ स्कूल आना और जानकारी प्राप्त करना समझते रहे, तो बजाय अनुभव देने वाली शिक्षा के हम बहुत पीछे छूट जाएंगे। हम जानते हैं कि इससे बेहतर कैसे हो सकता है। अब समय आ गया है बेहतर शिक्षक बनने का।

 

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