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पति से दुखी महिला को मिला उपाय

Bhaskar News | Jan 02, 2013, 01:37AM IST
 
 

भूदान  आंदोलन के प्रणोता आचार्य विनोबा भावे से एक महिला मिलने आई। वह बोली- मैं बहुत दुखी हूं, मेरा पति शराबी है। रोज शराब पीकर मुझे अपशब्द कहता है और कभी-कभी मारपीट भी करता है। मेरा जीवन उसने नर्क बना दिया है।
 
विनोबाजी ने उससे पूछा- जब वह शराब पीता है, तब तुम क्या करती हो? वह बोली- तब मुझे उस पर बहुत गुस्सा आता है। पहले तो मैं उसे खूब खरी-खोटी सुनाती थी, किंतु उस पर जब इसका कोई असर नहीं होते देखा, तो अब मैंने उपवास करना शुरू कर दिया। विनोबा ने प्रश्न किया कि उपवास में खाना-पीना सब छोड़ देती हो? महिला बोली - नहीं फल खाती हूं।
 
तब विनोबा ने कहा -तब तो तुम्हारा पति और नाराज होता होगा, क्योंकि तुम्हारे फल खाने से घर का खर्च बढ़ जाता होगा। यह सुनकर महिला रोने लगी। तब विनोबा बोले - गुस्से से या भोजन छोड़ देने से किसी को गलत मार्ग से नहीं हटाया जा सकता। प्रेम वही असरकारी होता है, जो भीतर से उठकर आता है। दिल में दुर्भावना हो और दिखावे के लिए प्रेम के वचन कहो तो प्रभाव उल्टा होता है। महिला ने कहा - मैं क्या करूं? उन्हें शराब के नशे में देखकर मेरा मन बेकाबू हो जाता है।
 
विनोबा ने समझाया - यही तो गलत है। तुम अपने पति को बुराई से तभी रोक सकोगी, जब स्वयं अपनी बुराई को जीत लोगी। उसका प्रयास पहले करो। महिला को अपनी भूल समझ में आ गई कि क्रोध को क्रोध से नहीं जीता जा सकता। उस पर प्रेम से ही विजय पाई जा सकती है। सही राह पाने की खुशी उसके चेहरे पर झलकने लगी। सार यह है कि बुरे व्यक्ति से घृणा करने या रोष जाहिर करने के स्थान पर बुराई को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। और यह कार्य दृढ़ इच्छशक्ति से ही संभव है।

 

 

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