केंद्र की उचित पहल
Bhaskar News
| Jul 16, 2012, 00:02AM IST
उस घटना की न्यायिक जांच का आदेश दिया गया है और अभी उसकी रिपोर्ट नहीं आई है, मगर अब तक मौजूद जानकारी से ये साफ है कि उस घटना में कुछ निहत्थे लोग भी मारे गए। संभवत: आम आदिवासियों को ढाल बनाकर माओवादियों ने सीआरपीएफ की टुकड़ी पर फायरिंग की। जब जवानों ने उसका जवाब दिया, तो माओवादियों के साथ-साथ ढाल बने कई आदिवासी भी शिकार हुए। इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा की। आंतरिक अशांति जैसे मामलों से निपटने की कार्रवाई में यह बेहद अहम माना जाता है कि वह जनता के किसी हिस्से में असंतोष भड़कने का कारण न बने और उसकी साख बनी रहे।
इसलिए यह बिल्कुल सही रणनीति होगी कि जहां निहत्थे लोगों की जान जाने का अंदेशा हो, वहां सुरक्षा बल अपने हाथ समेट लें। इससे माओवादियों द्वारा भारतीय राज्य के खिलाफ प्रचार युद्ध छेड़ने की कोशिश को नाकाम किया जा सकेगा। दरअसल, हर स्तर पर यह मान लिए जाने की जरूरत है कि माओवादियों से लड़ाई लंबी है, जिसमें सुरक्षा बलों की कार्रवाई के साथ-साथ उन इलाकों के लोगों का दिल जीतना भी जरूरी है, जिनकी पीड़ा को इन वाम चरमपंथियों ने अपने राजनीतिक मकसद को पाने का हथकंडा बनाया हुआ है।
इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा सारे देश के लिए माओवादियों से समर्पण कराने की समरूप नीति अपनाना भी एक ठोस कदम है। नए उपाय गुमराह युवकों के आम जिंदगी में लौटने का रास्ता खोलेंगे, ये उम्मीद की जानी चाहिए। साथ ही यह उचित होगा अगर सरकार प्रभावित इलाकों के विकास की अपनी घोषित योजनाओं पर अमल में तेजी लाए। अनेक विद्रोहों से सफलता से निपटने के बाद भारतीय राज्य यह समस्या भी हल करने में सक्षम हैं, यह संपूर्णता में जाहिर करने का वक्त आ गया है।








