अहिंसा के लिए गुस्से पर काबू करना जरूरी
Bhaskar News
| Dec 11, 2012, 04:47AM IST
स्पीकर- सेला एल्वर्थी
प्रोफाइल : संस्थापक ऑक्सफोर्ड रिसर्च ग्रुप। यूनेस्को में कंसल्टेंट रह चुकी हैं।
TED पर अब तक 2,97,416 लोग सुन चुके हैं।
आधी शताब्दी से युद्ध को रोकने के प्रयास में एक सवाल ने मेरा पीछा नहीं छोड़ा। हम बिना बल का प्रयोग किए हिंसा का जवाब कैसे दे सकते हैं? जब आप सीरिया की सड़कों पर हो रही निर्ममता या घरेलू हिंसा में बर्बरता को देखते हैं तो उसे रोकने का प्रभावी तरीका क्या हो सकता है? उसका जवाब हिंसा से दें? अधिक शक्ति का प्रयोग करें?
ये सवाल मेरे जेहन में तब से है, जब मैं बच्ची थी। मैं महज 13 साल की थी तो मैंने एक दिन टीवी पर सोवियत टैंकों को बुडापेस्ट जाते हुए देखा। मेरी उम्र के बच्चे टैंक के आगे कूद रहे थे। ये देखने के बाद मैं सीढ़ियां चढ़कर ऊपर गई और अपना सूटकेस पैक करने लगी। मेरी मां ने पूछा क्या कर रही हो। मैंने कहा मुझे बुडापेस्ट जाना है। वहां बच्चे मारे जा रहे हैं। वहां कुछ भयानक हो रहा है। उन्होंने कहा कि तुम अभी उनकी मदद करने के लिए बहुत छोटी हो। तुम्हें इसके लिए प्रशिक्षण लेने की जरूरत है।
तो मैंने इसका प्रशिक्षण लिया और 20 वर्ष की आयु में अफ्रीका में काम करने गई। मगर, मैंने महसूस किया कि मुझे कुछ और जानने की जरूरत है, जो ट्रेनिंग से नहीं मिलता। मैं समझना चाहती थी कि हिंसा, गुस्सा कैसे काम करता है? मैंने पाया कि दबंग तीन तरीकों का प्रयोग करते हैं। वे धमकाने के लिए राजनीतिक हिंसा, आतंकित करने के लिए शारीरिक हिंसा और लोगों को कमजोर करने के लिए मानसिक या भावनात्मक हिंसा का प्रयोग करते हैं। बहुत कम मामलों में हिंसा का जवाब हिंसा से देने से काम चलता है।
म्यांमार में लोकतंत्र समर्थक आंगसान सू ची मेरी हीरोइन हैं। वे रंगून की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समूह का नेतृत्व कर रहीं थीं। उनके सामने मशीनगन लिए सिपाही थे। सू ची के पीछे खड़े छात्रों से ज्यादा सिपाही डरे थे, उनकी अंगुलियां कांप रहीं थीं। सू की ने छात्रों से बैठने को कहा और वे खुद निडर होकर आगे बढ़ीं। उन्होंने सिपाही की बंदूक की नली हाथ से नीचे कर दी। मैं अहिंसा पर विश्वास करती हूं और यह हर जगह काम करता है। आम लोग वह कर सकते हैं, जो सू ची, महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला ने किया।
मैंने हिंसा को अहिंसा से खत्म करने के छह से अधिक तरीकों की खोज की है, जो काम करते हैं। खुद में बदलाव लाएं। ध्यान करें, आत्मज्ञान बढ़ाएं। हम खुले दिल से गुस्से पर काबू पा सकते हैं और बिना हिंसा के विवाद खत्म कर सकते हैं।






