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चीन में इंटरनेट प्रतिबंधों के पीछे बदलती दुनिया

माइकल एंटी | Dec 05, 2012, 00:02AM IST
 
 

स्पीकर- माइकल एंटी  
 
प्रोफाइल : इंटरनेट एक्टिविस्ट हैं। नेट पर विचारों की स्वतंत्रता के पक्षधर हैं।
 
TED पर अब तक 5,09,938 लोग सुन चुके हैं।
 
 
चीन ‘सिक’ और ‘ब्रिक’ देश है। ‘सिक’ इसलिए क्योंकि यह सीरिया, ईरान, चीन और नॉर्थ कोरिया के ग्रुप में शामिल है, जहां इंटरनेट की आजादी पर प्रतिबंध लगा है। वहीं दूसरी ओर यह वैश्विक अर्थव्यवस्था को उबरने में मदद करने वाले ‘ब्रिक’ समूह यानी ब्राजील, रूस, इंडिया और चीन में भी शामिल है। 
 
सुरक्षा के लिए चीन के उत्तर में ग्रेट वॉल है, जिसने 2,000 वर्षो तक आक्रांताओं से रक्षा की। ठीक वैसे ही नेट पर प्रतिबंधों के लिए यहां ग्रेट फायरवॉल भी है। यह चीन के लोगों को बाहरी दुनिया से अलग कर उनके सिद्धांतों को बचाए रखती है। साथ ही लोगों को संगठित नहीं होने देती। इसलिए इंटरनेट दो तरह का है।
 
पहला पूरी दुनिया का इंटरनेट और दूसरा चीन का चाइनानेट। मगर, चाइनानेट कोई बेकार नहीं है। चीन में चूहे-बिल्ली का खेल चलता है। पिछले 15 सालों से चीनी सेंसरशिप, सरकारी सेंसरशिप, यानी बिल्लियों और इंटरनेट यूजर्स यानी चूहों के बीच संघर्ष चल रहा है।  
 
चीन में 50 करोड़ नेट यूजर्स हैं। यह संख्या पूरी दुनिया में सर्वाधिक है। आपके पास गूगल है, हमारे पास बेईडू है। आपके पास ट्विटर है, हमारे पास वेईबो है। चीनी सरकार हर इंटरनेशनल वेब सर्विस को बंद कर देती है और हम चीनी उस सर्विस को कॉपी कर लेते हैं। इसलिए इसे मैं स्मार्ट सेंसरशिप कहता हूं। चीनी सरकार सर्वर को बीजिंग में रखना चाहती है ताकि वह किसी भी समय हर डाटा की जानकारी पा सके। सोशल नेटवर्किग को लोग पसंद करते हैं तो चीन में इसकी व्यवस्था है पर कुछ सेंसर के साथ। 
 
सेंसरशिप के फायदे-नुकसान भी हैं। उदाहरणों से समझते हैं। मिस्र में होस्नी मुबारक ने इंटरनेट बंद कर दिया, तो लोग सड़क पर उतर आए। नतीजतन मुबारक को पद छोड़ना पड़ा। वहीं, ट्यूनीशिया में बेन अली ने नेट पर प्रतिबंध नहीं लगाया। उनकी सरकार के भ्रष्टाचार सोशल नेटवर्किग साइट्स पर आए और उन्हें भी पद छोड़ना पड़ा। 
 
चीन में नेट पर वही सूचनाएं लंबे समय तक चल पाती थीं, जो सरकार चाहती थी। मगर, पिछले कुछ सालों में माइक्रोब्लॉगर्स की बढ़ती संख्या से मानसिक-सामाजिक बदलाव हुआ है। 2011 में वेनझोऊ में हुई रेल दुर्घटना में माइक्रोब्लॉगर्स की भूमिका अहम थी। इसलिए मेरा निष्कर्ष साधारण है। किसी भी समय, किसी भी जगह से बिना डरे ट्वीट करें। इसके लिए भले ही छद्म नाम का प्रयोग करें। चीजों को दुनिया के सामने लाएं।  

 

 

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