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चीन के भारी निवेश पर आईएमएफ की चेतावनी

केविन रैफर्टी | Dec 11, 2012, 23:45PM IST
चीन के भारी निवेश पर आईएमएफ की चेतावनी
अनेक देशों को चीन के अत्यधिक निवेश से ईष्र्या रही है, केवल भारत को ही नहीं, जहां खराब सड़कों का मतलब है बाजार के रास्ते में ही 40 प्रतिशत फसलों का बर्बाद हो जाना। और जापान, जहां 30 प्रतिशत सुरंगें अपना जीवनकाल पूरा कर रही हैं, लेकिन मांग के अनुरूप उनका रखरखाव नहीं हो पा रहा है।
 
चीन में शहर दर शहर गगनचुंंबी इमारतें जगमगा रही हैं और शॉपिंग मॉल्स विलासिता के सामान से अटे पड़े हैं। विशाल राजमार्ग और तीव्रगति रेललाइनें यात्रा को तब तक आसान बना रहे हैं, जब तक आप शहर के ट्रैफिक जाम में न फंस जाएं।
 
अनहुई प्रांत के एक इलाके को आधिकारिक रूप से ‘गरीब काउंटी’ निर्दिष्ट किया गया है। यहां सरकारी ऑफिस ब्लॉक बिल्कुल व्हाइट हाउस जैसा प्रतीत होता है, केवल नया और श्वेत। कुछ स्थानों पर जाहिर तौर पर कुछ ज्यादा ही विलासिता है। इनर मंगोलिया के ऑडरेस में दस लाख लोगों के लिए स्टेट-ऑफ-द-आर्ट बहुमंजिला इमारतें हैं, लेकिन वहां केवल 30,000 लोग ही रहते हैं, इसलिए यह विश्व का सबसे बड़ा ‘भूतों का शहर’ कहलाता है। 
 
जरा से निवेश के लिए भी एक कीमत चुकानी पड़ती है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के अर्थशास्त्रियों ने भी अब अन्य आलोचकों के साथ यह चेतावनी देने के लिए सुर मिला लिए हैं कि चीन अत्यधिक निवेश का दर्दनाक खामियाजा भुगत सकता है। इसके सामाजिक और आर्थिक दोनों रूप से गंभीर परिणाम हो सकते हैं। लेखकों का अनुमान है कि विगत कुछ वर्षो का अधिक निवेश सकल घरेलू उत्पाद का 20 प्रतिशत हो सकता है, हालांकि वे इसे सुरक्षित तौर पर 10 फीसदी के आंकड़े तक रखते हैं। कीमतों का भारी असर परिवारों पर पड़ा है, हालांकि कुछ बड़ा हिस्सा लघु और मझौले उपक्रमों ने भी चुकाया है।
 
‘क्या चीन ज्यादा निवेश कर रहा है और क्या इसके कोई मायने हैं’ शीर्षक वाले वर्किग पेपर में कैविएट भी है कि पेपर में दिए गए विचार ‘जरूरी नहीं कि आईएमएफ के विचारों को दर्शाते हों।’ लेखकों में से दो इल होंग ली और मुर्तजा सईद आईएमएफ के चीन कार्यालय में क्रमश: वरिष्ठ और  डेप्युटी रेजिडेंट रिप्रजेंटेटिव हैं, इसलिए आईएमएफ के विचारों की उनसे ज्यादा प्रामाणिक जानकारी कहीं और से मिलना कठिन है। अन्य लेखक लिऊ श्वेयान चीन के राष्ट्रीय विकास एवं सुधार आयोग (एनडीआरसी) के आर्थिक शोध संस्थान में सीनियर फैलो हैं। इनका कैविएट है कि पेपर एनडीआरसी के विचार नहीं हैं।
 
आईएमएफ का वर्किग पेपर चीन पर उन देशों के संदर्भ में नजर डालता है, जिन्होंने अधिक निवेश से अपनी अर्थव्यवस्था को तेजी से बढ़ते देखा है। अन्य एशियाई देश निवेश, अच्छी बचत दर और निर्यात के सहारे अधिक विकास में अग्रणी हुए।  लेकिन जैसा कि पेपर इशारा करता है, अन्य एशियाई अनुभव और उससे पहले 1980 के दशक में लैटिन अमेरिका  में अधिक निवेश बहुत महंगा भी साबित हुआ है। विदेशी धन से उच्च निवेश अनुपात देशों को तेजी से विकास तो उपलब्ध कराता है, लेकिन बैंकिंग और विदेशी मुद्रा के संकट की ओर भी ले जाता है। 
 
चीन अन्य क्षेत्रों की तरह, अलग है। इसका अत्यधिक निवेश विदेशी धन पर निर्भर नहीं है। इसलिए यह विदेशी मुद्रा के संकट से काफी हद तक सुरक्षित है। लेकिन आईएमएफ का वर्किग पेपर बताता है कि जब विदेशी धन पर निर्भरता के आधार पर मूल्यांकन के समय संकट नजर न आता हो, यह घरेलू तनाव की ओर इशारा करता है, जो निवेश के उच्च स्तर से जुड़ा है, जो निस्संदेह परिवारों द्वारा उठाया जाता प्रतीत होता है। दूसरे शब्दों में, सामाजिक और आर्थिक तनावों से सावधान।
 
आईएमएफ के लेखक इशारा करते हैं कि ‘चीन को इतनी ही मात्रा में विकास लाने के लिए और ज्यादा निवेश की जरूरत है।’ वे चेतावनी देते हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण निर्यात में वृद्धि की चाल भी धीमी होने की आशंका है, जब तक कि चीन की उत्पादकता में अप्रत्याशित वृद्धि नहीं हो जाती। विकास में निवेश के योगदान को 60 से 70 प्रतिशत तक पहुंचना होगा, ताकि इतनी ही मात्रा में विकास हो सके।’ इन स्तरों पर वे जोड़ते हैं, ‘निवेश के इस ऊंचे किए गए स्तर के लिए फायनेंसिंग की लागत समग्र आर्थिक स्थिरता को कमजोर कर सकती है।’ चीन ‘समय के साथ’ विकास और व्यापक आर्थिक स्थिरता से समझौता किए बिना अपने निवेश को जीडीपी के 10 प्रतिशत प्वाइंट तक घटा सकता है। वे ऐसे सुधारों की वकालत करते हैं ‘जो उत्पादकता और कार्यकुशलता बढ़ा सकें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि चीन के उल्लेखनीय आर्थिक विकास का फल समान रूप से विभिन्न आर्थिक एजेंटों, खासकर आम चीनी घरों तक पहुंचे।’ 
 
चीन के कानून के तहत, सामूहिक स्वामित्व वाले खेत निजी डेवलपर्स को सौंपे जाने से पहले सरकारी स्वामित्व में जाएंगे, स्थानीय सरकारें ग्रामीणों से जमीन छीनकर भारी मुनाफा कमाती हैं। एक बुजुर्ग बतख पालक लुओ बाओगेन ने 6,00,000 युआन में बनाए अपने घर के लिए 2,20,000 युआन का मुआवजा लेने से इनकार कर झेजियांग प्रांत के वेनलिंग शहर की खरीद नीतियों की ओर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है। जब तक वह बढ़ा हुआ मुआवजा स्वीकार करता और मकान ध्वस्त किया जाता, कुछ समय के लिए लुओ का मकान रेलवे स्टेशन जाने वाली सड़क के बीचों-बीच बेतुके ढंग से ‘नेल हाउस’ की तरह खड़ा रहा। सिएटल स्थित लाभ निरपेक्ष संगठन लैंडेसा दावा करता है कि चीन में स्थानीय सरकारें प्रति एकड़ औसतन 7,40,000 डॉलर या विस्थापित किसानों को दिए औसत मुआवजे का 40 प्रतिशत कमाती हैं। कोई आश्चर्य नहीं चीन में हर साल जमीन संबंधी 1,20,000 विवाद होते हैं।
 
आईएमएफ की रिपोर्ट फिर से चीन का ध्यान अर्थव्यवस्था के संतुलन में तेजी लाने की ओर आकर्षित करती है, लेकिन इसका मतलब निवेश के प्रमोटर्स, सरकारी उपक्रमों और राजनेताओं तथा नौकरशाहों के सभी स्तरों पर ताकतवर संपर्को को काटना होगा। यह एक बहुत बड़ा खतरा है।
 
केविन रैफर्टी
 
विश्वबैंक के पूर्व मैनेजिंग एडिटर व प्लेनवर्डस मीडिया के एडिटर इन चीफ    
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