प्रधानमंत्री की प्राथमिकता
Bhaskar News
| Aug 17, 2012, 02:09AM IST
यह समझा जाता रहा है कि अगर देश तीव्र विकास दर के मार्ग पर रहा, तो पिछड़ेपन एवं अभाव की समस्याएं क्रमिक रूप से हल हो जाएंगी। विकास दर को गति देने के लिए निवेश को सर्व-प्रमुख माना जाता है। यूपीए सरकार ने विदेशी और देशी पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाने की कोशिश की है, लेकिन गठबंधन की विवशताओं ने ऐसा नहीं होने दिया। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा- ‘अगर विकास दर नहीं बढ़ी, नए निवेश को प्रोत्साहित नहीं किया गया, सरकार की वित्तीय स्थिति में सुधार नहीं हुआ और आम आदमी की आजीविका सुरक्षा एवं देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित नहीं किया गया, तो पूरी संभावना है कि उसका असर हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ेगा।’
कहा जा सकता है कि इस एक वाक्य में यूपीए सरकार का पूरा आर्थिक दर्शन समाहित है। साथ ही प्रधानमंत्री ने सही मौके पर इसकी स्पष्ट व्याख्या कर देश के सामने बहस एवं सोच-विचार का एक महत्वपूर्ण एजेंडा रखा है। इस संदर्भ में डॉ. सिंह की यह टिप्पणी अहम है कि अब समय आ गया है, जब हमारी विकास प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले मुद्दों को राष्ट्रीय सुरक्षा के मसलों के रूप में देखा जाए। यह सही है कि अगर समृद्धि न हो और सबकी बुनियादी आकांक्षाओं को पूरा करने की स्थिति नहीं हो, तो देश शांति या सुरक्षा की उम्मीद नहीं कर सकता। मगर एक वर्ग विभाजित समाज में समृद्धि एवं विकास की समान अवधारणाएं ढूंढ़ना एक दुरूह कार्य बना रहता है। इस पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री ने देश के सामने जो प्राथमिकता रखी है, वह निर्विवाद है। लेकिन अवधारणाओं के बीच फर्क की गुंजाइश अवश्य है। इसे दूर करने का रास्ता उपयुक्त बहस है, जो प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद जरूर शुरू हो जानी चाहिए।






