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उदास व्यक्ति ने जाना जीने का राज

Bhaskar News | Jan 03, 2013, 00:39AM IST
 
 

एक व्यक्ति अपने जीवन से बहुत निराश हो गया था। उसे ऐसा लगता था कि वह इतनी बड़ी इस दुनिया में बिल्कुल अकेला है।
 
उसे कोई नहीं चाहता, वह किसी से प्यार पाने के काबिल नहीं है। ऐसा सोच-सोचकर वह सदैव दुखी रहता था। जब वसंत का मौसम आया और चारों ओर फूल खिल गए। तरह-तरह के फूलों के खिलने से वातावरण सुंदर और सुगंधित हो गया।
 
हर ओर आनंद बिखर गया, किंतु वह व्यक्ति अपने घर में ही बंद रहा। एक दिन पड़ोस में रहने वाली एक लड़की अचानक उसके घर के द्वार खोलकर अंदर आई। उस व्यक्ति को गुमसुम देखकर उसने पूछा- Rआप इतने उदास क्यों हैं?ञ्ज वह व्यक्ति बोला- 'मुझे कोई प्यार नहीं करता, मैं बिल्कुल अकेला हूं।ञ्ज लड़की ने कहा- Rयह तो बहुत बुरी बात है कि आपको कोई प्यार नहीं करता, किंतु यह तो बताइए कि आप किस-किसको प्यार करते हैं?ञ्ज व्यक्ति के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था।
 
तब लड़की बोली- 'आप बाहर आइए और देखिए कि आपके द्वार पर ही कितना प्यार बिखरा पड़ा है।
 
यह कहते हुए उसने व्यक्ति का हाथ पकड़ा और बाहर लाकर खिले हुए फूलों के बीच खड़ा कर दिया। फिर कहा- 'आप जितना प्यार चाहते हैं, इन फूलों से लीजिए। ये खुशी-खुशी आपको अटूट स्नेह देंगे।ञ्ज लड़की की बात सुनकर फूलों के बीच खड़े उस व्यक्ति के मन की गांठें खुल गईं और उसका जीवन आनंदमय हो गया। कथा प्रतीकात्मक है। सार यह है कि अधिकाधिक मेलजोल और संवाद प्रसन्नता को बढ़ाते हैं, जबकि इनका अभाव एकाकीपन और निराशा को जन्म देता है।
 

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