अवसाद से घिरे लोगों से बात कीजिए
भास्कर न्यूज
| Nov 26, 2012, 00:06AM IST
प्रोफाइल : स्टैनफोर्ड बिजनेस मैनेजमेंट स्कूल में व्याख्याता और उद्यमी हैं।
TED पर अब तक 3,82,790 लोग सुन चुके हैं।
बाहरी दिखावे के लिए जरूरी सब चीजें जॉन के पास थीं। उसने पांच साल पहले न्यूयॉर्क में खरीदे घर को काफी अच्छी कीमत पर बेचने के लिए हाल ही में कॉन्ट्रेक्ट किया था। जॉन ने जिस स्कूल से स्नातक की उपाधि ली थी, वहां उसे पढ़ाने लिए प्रस्ताव मिला था। वहां उसे वेतन और अन्य लाभ भी मिलने वाले थे। फिर भी खुद से संघर्ष करता जॉन अवसाद में घिरता जा रहा था।
मैनहट्टन पुल की दीवार पर जॉन 11 जून 2003 की रात को चढ़ गया। उसने पानी में छलांग लगा दी, लेकिन चमत्कारिक रूप से बच गया। छलांग लगाने से उसका दायां हाथ और पसलियां टूट गईं। फेफड़ों में छेद हो गया और बेहोशी में वो बहता हुआ ईस्ट रिवर तक पहुंच गया। स्टेटन आइलैंड फेरी के यात्रियों ने दर्द से कराह रहे जॉन की आवाज सुनी। यात्रियों ने इसकी सूचना फेरी के कप्तान को दी। जॉन को पानी से बाहर निकाल कर बेल्यूवे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
यहां से हमारी कहानी शुरू होती है। जब जॉन अपने जीवन को वापस पाने के लिए प्रतिबद्ध हुआ। पहले शारीरिक रूप से फिर भावनात्मक रूप से, और फिर आध्यात्मिक रूप से। तब उसने पाया कि उसकी तरह आत्महत्या की कोशिश करने वाले लोगों के लिए बहुत कम मौके उपलब्ध थे। शोध के अनुसार, आत्महत्या की कोशिश करने वाले 20 में से 19 व्यक्ति विफल होते हैं। इन विफल होने वालों के दूसरे प्रयास में सफल होने की संभावना 37 गुना अधिक होती है।
ये सच में संकट में फंसे लोग हैं। जब ये लोग फिर से जिंदगी से जुड़ने की कोशिश करते हैं तो आत्महत्या से जुड़े अलगाव के कारण हमें पता नहीं होता कि क्या कहें। इसलिए हम अक्सर चुप रहते हैं। ये चुप्पी अकेलेपन को और भी बढ़ाती है, जिसमें जॉन जैसे लोग खुद को पाते हैं।
जॉन की कहानी मैं अच्छे से जानता हूं क्योंकि मैं ही जॉन हूं। मैंने आज एक अलग तरह के एकांत से बाहर आने का फैसला किया है। ताकि आप लोगों को प्रोत्साहित कर सकूं। आपसे आग्रह कर सकूं कि यदि आप ऐसे किसी व्यक्ति को जानते हैं, जिसने आत्महत्या की कोशिश की है या जो ऐसा विचार कर रहा है तो उससे बात कीजिए। सहायता कीजिए। यह एक अमूल्य वार्तालाप है और एक बांटने योग्य विचार है।






