अमेरिका में रहने वाला फ्रेंक हैरिस प्रतिभावान युवक था। उसे नए-नए स्थानों पर घूमने और ज्ञानार्जन का शौक था। एक दिन उसने संपूर्ण अमेरिका का भ्रमण करने की ठानी। अपनी यात्रा के लायक धन जुटाकर वह चल पड़ा। जहाज पर फ्रेंक सवार हुआ तो अनेक सहयात्रियों से बातचीत का अवसर मिला। फ्रेंक ने उन सभी से अलग-अलग संस्कृतियों का ज्ञान ग्रहण किया। उसी जहाज पर एक चिकित्सक भी थे। फ्रेंक की बातों से प्रभावित होकर उन्होंने उसे अपने केबिन में स्थान दे दिया।
उनके केबिन में विभिन्न विषयों की पुस्तकें रखी हुई थीं। फ्रेंक ने उन्हें पढ़ने की अनुमति चाही, जो चिकित्सक महोदय ने दे दी। कुछ पुस्तकें पढ़ने के बाद फ्रेंक ने कहा - सर ये पुस्तकें बहुत अच्छी हैं। कभी मैं इतने पैसे जुटा पाया तो मैं भी ऐसे मूल्यवान ग्रंथ खरीदकर पढ़ूंगा। फ्रेंक के ज्ञान की परख करने के लिए चिकित्सक ने एक पुस्तक उठाकर उसमें से कुछ प्रश्न पूछे, जिनके सही-सही जवाब उसने दिए। कुछ प्रसंगों को तो फ्रेंक ने अक्षरश: सुना दिया। यह देख चिकित्सक ने पूछा - पुस्तक के इन अंशों को तुमने कितनी बार पढ़ा, जो तुम्हें ये कंठस्थ हो गए? फ्रेंक ने उत्तर दिया - एक बार ही पढ़ा है सर, किंतु तन्मयता के साथ। फ्रेंक की स्मरण शक्ति व ज्ञान की तीव्रता से चिकित्सक व अन्य यात्रियों ने प्रभावित होकर चंदा किया और उसके लिए प्रथम श्रेणी का टिकट खरीदा। प्रतिभा अवसर मिलते ही अपना चमत्कार दिखा देती है। इसलिए प्रतिभावान व्यक्तियों को आशान्वित रहकर अवसरों की तलाश करनी चाहिए।