आर्थिक सुधारों का उत्साह
Bhaskar News | Oct 06, 2012, 02:01AM IST
सरकार ने अब बीमा एवं पेंशन कोष में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने का इरादा जताया है। हालांकि यहां अमल तभी संभव होगा, जब इनसे संबंधित विधेयक संसद में पास हो सकेंगे। मौजूदा संसदीय समीकरण के बीच भी यह नामुमकिन नहीं है, क्योंकि मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी इन क्षेत्रों में एफडीआई की अनुमति के खिलाफ नहीं है, जैसाकि वह खुदरा कारोबार के मामले में है। इसके बावजूद अभी भाजपा ने इस मामले में अपना इरादा साफ नहीं किया है, इसलिए जब तक विधेयक संसद में नहीं आ जाते, संभवत: संशय बना रहेगा।
बहरहाल, ताजा सरकारी घोषणाओं में भले सुर्खियां एफडीआई संबंधी फैसलों ने बटोरी हों, लेकिन उनके साथ कई अन्य निर्णय दूरगामी महत्व के हैं। मसलन, बुनियादी ढांचा विकास कोष की स्थापना की त्रिपक्षीय शर्तो को मंजूरी से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए धन जुटाना आसान होगा। कंपनी कानून में संशोधन से उम्मीद की जा रही है कि इस क्षेत्र में पारदर्शिता एवं जवाबदेही को बेहतर ढंग से सुनिश्चित किया जा सकेगा। इस तरह भारत में विदेशी निवेश को सस्ता बनाने के उपायों को भारतीय रिजर्व बैंक ने मंजूरी दे दी है।
ये वो तमाम कदम हैं, जिन पर अब सरकार और कांग्रेस पार्टी में पूरी सहमति नजर आती है। हाल में गुजरात में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के एक भाषण से यह संकेत मिला कि पार्टी आर्थिक सुधारों को मुद्दा बनाकर वहां चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में है। यानी भले ही हालिया कदमों से यूपीए का एक घटक अलग हो गया और उसके कई सहयोगी सुधारों के खिलाफ सामने आ गए, लेकिन सरकार एवं कांग्रेस नेतृत्व ने लंबे ऊहापोह के बाद अपनी स्पष्ट दिशा चुन ली है। इससे अर्थजगत में आशाजनक स्थिति बनी है। फिर हकीकत यही है कि इन कदमों से भारतीय अर्थव्यवस्था को असल में कितना लाभ होगा, यह अगले चुनावों के रुझान से तय होगा।






