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यूक्लिड ने विद्यार्थी को समझाए शिक्षा के सही मायने

 
Source: bhaskar news   |   Last Updated 00:14(03/02/12)
 
 
 
 
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जीवन दर्शन.. महान गणितज्ञ यूक्लिड के जीवन का एक प्रसंग है। यूक्लिड गणित के परम ज्ञाता थे। अपने इस ज्ञान को वे दूसरों को भी सहर्ष देने के लिए तैयार रहते थे। यूक्लिड के पास जो भी गणित सीखने आता, वे उसे अत्यंत लगन से पढ़ाते और उसकी गणित संबंधी सभी जिज्ञासाओं को शांत करते।

यूक्लिड के गणित ज्ञान और सहृदयता से प्रभावित होकर उनके पास दूर-दूर से विद्यार्थी गणित सीखने आते और यूक्लिड उन्हें कभी निराश नहीं करते। एक दिन यूक्लिड के पास एक लड़का आया और उसने उनसे ज्यामिति पढ़ाने का आग्रह किया। यूक्लिड ने स्वीकार कर लिया। उसी दिन से यूक्लिड उसे ज्यामिति पढ़ाने लगे। लड़का कुशाग्र बुद्धि था। उसने यूक्लिड के ज्ञान को तीव्रता से सीखना आरंभ कर दिया।

एक बार यूक्लिड उसे एक प्रमेय पढ़ा रहे थे। छात्र ने कहा - इस प्रमेय को पढ़ने से मुझे क्या लाभ होगा? यह सुनते ही यूक्लिड नाराज हो गए और अपने नौकर से बोले - इसे एक ओबेल (यूनानी सिक्का) दे दो, क्योंकि यह विद्या में कम, धन कमाने में अधिक रुचि रखता है और जो धन कमाने में रुचि रखता है उसके लिए शिक्षा ग्रहण करना बेकार है।

यह सुनकर शिष्य ने अपनी भूल को स्वीकार कर यूक्लिड से क्षमा मांगी। सार यह है कि शिक्षा आत्मसमृद्धि का मार्ग है। उसे कभी भौतिक लाभ की तुला में नहीं तौलना चाहिए और वह जहां से व जिस मात्रा में मिले, उसे आत्मीयता से ग्रहण करना चाहिए।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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