नैतिकता का सवाल
Bhaskar News
| Jul 20, 2012, 00:03AM IST
बहरहाल, ये आरोपी इसलिए पहचाने जा सके, क्योंकि जब घटना हो रही थी, उस समय वहां से एक स्थानीय टीवी चैनल का पत्रकार गुजर रहा था। उसने पूरी घटना को अपने कैमरे में कैद कर लिया। मगर अब वही पत्रकार कठघरे में है। न सिर्फ उसे, बल्कि उस चैनल के संपादक को भी अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है। सामने आए ब्योरे के मुताबिक उस पत्रकार ने जब घटना को देखा तो उसने अपने दफ्तर फोन कर वहां से कैमरा टीम भेजने को कहा। लेकिन उसने पुलिस को फोन नहीं किया।
इससे ये सवाल उठा है कि पत्रकार आखिर सिर्फ पेशेवर होते हैं या बतौर नागरिक भी उनकी कोई जिम्मेदारी है? उस पत्रकार की उस समय क्या प्राथमिकता होनी चाहिए थी - अपने लिए एक खबर जुटाना या मुसीबत में फंसी एक लड़की को बचाना? इस प्रश्न से पत्रकारिता और इंसान की नैतिकता के प्रश्न जुड़े हैं। इन पर मीडिया एवं सार्वजनिक दायरे में गंभीर बहस छिड़ी है। ये मुमकिन है कि पत्रकार युवती को बचाने में लग जाता और वो सबूत दर्ज नहीं कर पाता, जिसके आधार पर आरोपियों को सजा होने की उम्मीद की जा रही है। क्या तब वह अपने पेशेवर दायित्व की अनदेखी नहीं करता? जाहिर है, जवाब आसान नहीं हैं।
दरअसल, यह इस तरह की पहली घटना नहीं है। ऐसी बहसें दुनिया के अनेक हिस्सों में खड़ी हुई हैं, लेकिन आज तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचीं। फिलहाल यह जरूर कहा जा सकता है कि मानवीय नैतिकता के प्रश्न सिर्फ पत्रकार के लिए नहीं होने चाहिए। अन्याय या जोर-जबर्दस्ती की घटनाओं के समय आम लोगों के तमाशबीन बने रहने या आंख फेरकर चल देने की शिकायतें भी आम हैं। आखिर कसौटी सबके लिए समान क्यों नहीं होनी चाहिए?







