ईसा मसीह से मिली अनूठी सीख
Bhaskar News
| Dec 25, 2012, 00:07AM IST
ईसा मसीह का व्यक्तित्व उच्च कोटि के मानवीय गुणों से भरा था। प्रेम, करुणा, सेवा, सादगी, विनम्रता, क्षमा की वे साक्षात मूरत थे।
एक प्रमुख विशेषता उनके स्वभाव में यह थी कि उनकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं था। वे जो कहते, उस पर अटल रहते थे। अपने पास आने वाले सभी लोगों से वे यही कहते - ‘मैं जो कुछ कहता हूं, उसे मात्र सुनो मत, उसे जीवन में भी उतारो। तभी तुम सच्चे इंसान बनोगे।’
जब एक दिन वे यही बात लोगों के समक्ष दोहरा रहे थे, तो किसी ने उनसे इसे दृष्टांत के माध्यम से समझाने का आग्रह किया। तब ईसा मसीह बोले - ‘एक आदमी था। उसने अपना घर चट्टान के ऊपर बनवाया। एक दिन बड़े जोर की आंधी चली और मूसलधार बारिश होने लगी। उसके घर से आंधी-तूफान टकराए, किंतु घर का बाल भी बांका नहीं हुआ। एक दूसरा आदमी था, जिसने अपना घर बालू पर बनवाया।
आंधी-तूफान में उसका घर ढह गया। इसी प्रकार जो व्यक्ति मेरी बातों को सुनकर उन्हें आचरण का हिस्सा बनाता है, वह चट्टान की तरह दृढ़ हो जाता है और तमाम दुनिया की तकलीफें उसे तोड़ नहीं पातीं। जबकि मेरी बातों को मात्र सुनने वाला तनिक कष्ट आने पर भी धर्य न रखते हुए बिखर जाता है।’
सार यह है कि कहे हुए पर अटल रहना चारित्रिक दृढ़ता को इंगित करता है, जो संबंधित के प्रति समाज का विश्वास अर्जित करता है। इसके विपरीत विचलित स्वभाव कमजोर चरित्र की निशानी है, जो अनेक प्रकार की हानियों का कारण बनता है।






