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गांधीजी ने दूर की लड़कियों की दुविधा

Bhaskar News | Jan 26, 2013, 00:08AM IST
एक  बार गुजरात विद्यापीठ की छात्राओं ने एक बैठक की, जिसमें प्रमुख रूप से इस बात पर विचार किया गया कि जो लड़के उन्हें छेड़ते हैं, उनके सुधार के लिए क्या किया जाए? इस कारण उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती थी।
 
तय हुआ कि श्री किशोरीलाल मशरूवाला (जो महात्मा गांधी के अनुयायी थे) से मिलकर समस्या का हल खोजा जाए। लड़कियों ने समस्या उनके समक्ष रखी। मशरूवाला बोले- ‘अपनी चरण पादुकाओं से उन लड़कों की अच्छी खबर लो।’ यह सुनकर छात्राएं हैरान रह गईं, क्योंकि मशरूवाला गांधीजी के अनुयायी थे। फिर उन्होंने यह रास्ता क्यों बताया? छात्राओं ने कहा- ‘यह तो हिंसा है।
 
और कोई मार्ग सुझाइए?’ मशरूवाला बोले- ‘यदि तुम लोगों को यह ठीक नहीं लगता, तो बापू से जाकर पूछो।’ छात्राएं गांधीजी के पास गईं और बोलीं- ‘बापू! अहिंसा के साधकहिंसा का सहारा कैसे ले सकते हैं?’ गांधीजी ने उनकी बात सुनकर कहा- ‘किशोरीलाल ने तुम्हें सही मार्ग बताया है। ऐसी विकट परिस्थिति में ऐसा करने को मैं अहिंसा ही कहूंगा।’
 
उल्लेखनीय है कि गांधीजी ने अनेकअवसरों पर यह कहा था कि यदि हिंसा व कायरता में से एक को चुनना पड़े, तो वे हिंसा को चुनने की सलाह देंगे। छात्राओं को गांधीजी से बात कर आत्मरक्षार्थ यह उचित राह मिल गई कि पाशविक वृत्ति की संतुष्टि के लिए हिंसा करना गलत है, किंतु अपने मान की रक्षा के लिए हिंसा का सहारा लेना गलत नहीं है। वस्तुत: यह आपद्धर्म है, जो विपत्ति में सामान्य रूप से धर्म विरुद्ध माने जाने वाले मार्ग का समर्थन करता है और आज के युग में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के मद्देनजर इसे अमल में लाना ही चाहिए।
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