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बुद्ध ने समझाया शांति का महत्व

Bhaskar News | Jan 07, 2013, 00:06AM IST
 
 

गौतम बुद्ध अपने भ्रमण के दौरान किसी गांव में ठहरे थे। एक आदमी बहुत दिनों से उनसे मिलना चाह रहा था। एक दिन उसे बुद्ध से मिलने का मौका मिल गया। वह उन्हें प्रणाम कर बोला- 'भंते! आप तीस साल से लोगों को शांति, सत्य और मोक्ष की बात समझा रहे हैं, किंतु यह बताइए कि ऐसे कितने लोग हैं, जिन्हें मोक्ष प्राप्त हो गया? बुद्ध ने उससे कहा- 'तुम इस गांव का एक चक्कर लगाकर लोगों से लिखवा लाना कि कितने लोग शांति चाहते हैं, कितने सत्य और कितने मोक्ष।
 
वह आदमी बोला- 'भंते! इन चीजों को तो सभी पाना चाहेंगेञ्ज बुद्ध ने कहा- 'फिर भी मेरे कहने पर एक बार स्वयं जाकर पता लगाओ कि कौन व्यक्ति किस चीज की इच्छा रखता है? वह आदमी पूरा दिन गांव में घूमता रहा, लेकिन शांति, सत्य और मोक्ष चाहने वाला एक भी व्यक्ति नहीं मिला।
 
किसी ने कहा कि मुझे धन चाहिए, किसी ने यश चाहा, कोई रोग से मुक्ति चाहता था, तो किसी को नौकरी की दरकार थी, कोई संतान की इच्छा रखता था, तो कोई लंबी उम्र की कामना करता था। हैरान-परेशान आदमी शाम को बुद्ध के पास लौटा और बोला- 'यह बड़ा अजीब गांव है। कोई कुछ चाहता है, तो कोई कुछ। शांति, सत्य व मोक्ष का आकांक्षी कोई नहीं है।
 
तब बुद्ध ने उसे समझाया- 'इसमें अजीब कुछ नहीं है। हममें से अधिकांश लोग सुख चाहते हैं, शांति नहीं। सुख पाने के लिए वे शांति के विपरीत मार्ग पर चलते हैं। सुख का मार्ग, शांति का मार्ग नहीं है। सार यह है कि सुख भौतिक अनुभूति है, जबकि शांति आत्मिक अनुभूति है और भौतिकता से अधिक आत्मिकता सुकून देती है।
 
 

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