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संकट में मिली सहायता ही प्रभु दर्शन

bhaskar news | Sep 21, 2013, 07:42AM IST

परमात्मा से मिलने का मार्ग दिखाया संत सादिक ने एक बहुत बड़े सूफी संत थे सादिक। एक दिन एक आदमी आकर कहने लगा, 'मैंने सुना है कि आप अल्लाहताला से एकाकार हो चुके हैं। मुझे भी उनसे मिलवा दीजिए।Ó यह सुनकर सादिक मुस्कुराए और बोले, ' क्या तुम्हें मालूम नहीं कि मूसा से कहा गया था कि तू मुझे नहीं देख सकता? यह ईश्वरीय वचन था जो सभी समझदार जानते हैं।Ó इस पर उस आदमी ने कहा, 'यह बात तो मैं जानता हूं, किंतु एक शख्स यह भी तो कहता है कि मेरे दिल ने परवरदिगार को देखा। कोई यह भी कहता है, 'मैं उस भगवान की आराधना करूंगा, जिसके मैं दर्शन कर सकूं।Ó  यह सुनकर सादिक ने कहा, 'इसके हाथ-पैर बांधकर नदी में डाल दो।


 ऐसा ही किया गया। वह पानी में डूबने-उतराने लगा। उसने चिल्ला-चिल्लाकर सहायता मांगी, किंतु कोई आगे नहीं आया। अंत में निराश होकर उसने कहा, 'या अल्लाह!Ó उसके इतना कहते ही संत सादिक ने उसे बाहर निकलवा लिया। फिर उससे प्रश्न किया, 'क्या तूने अल्लाह को देखा?Ó वह बोला, 'जब तक मैं दूसरों को पुकारता रहा, तब तक मैं परदे में रहा, किंतु जब अल्लाह से फरियाद की तो मेरे दिल में एक सुराख खुला।Ó तब संत ने उसे समझाया, 'जब तक तू दूसरों को पुकारता रहा, झूठा था।


जब मूल अर्थात परमात्मा को पुकारा तो जान बच गई। अब तू इसी सुराख की हिफाजत कर जिससे तुझे ईश्वर का दर्शन होगा। वस्तुत: संकट में मिली सहायता ही प्रभु दर्शन है। यदि ऐसा मानकर हर अच्छे-बुरे क्षण में परमात्मा का स्मरण किया जाए तो अंतर्मन में पैदा हुआ विश्वास आत्म साक्षात्कार की स्थिति लाकर क्रअहं ब्रह्मास्मिञ्ज का परम बोध करा देता है।

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