रूस-जापान युद्ध
रूस-जापान जंग बीसवीं सदी के शुरुआती दौर में दो साम्राज्यवादी ताकतों के मध्य हुआ एक जबरदस्त संग्राम था। उस दौर में रूस व जापान चीन द्वारा नियंत्रित देशों में अपनी ताकत व प्रभुत्व बढ़ाने में लगे थे। जापान ने 1894 में चीन को जंग में हराने के बाद दक्षिणी मंचूरिया में स्थित पोर्ट आर्थर (अब लु-शुन) बंदरगाह समेत समूचा लिएओदोंग प्रायद्वीप अपने कब्जे में ले लिया था। हालांकि रूस समेत अन्य कई देशों के दबाव के चलते उसे यह इलाका चीन को वापस देने पर मजबूर होना पड़ा।
1898 में रूस ने चीन से पोर्ट आर्थर व यह प्रायद्वीप लीज पर लेकर यहां अपना नौसैनिक अड्डा स्थापित किया व डाल्नी (डेरियन) में अपना वाणिज्यिक बंदरगाह भी बना लिया। रूस की इस हरकत से खफा जापान ने 8 फरवरी 1904 को पोर्ट आर्थर पर अचानक हमला बोलते हुए रूसी नौसैनिक बेड़े को तहस-नहस कर दिया। इस जंग में जापानी फौजों ने आगे कई मोर्चो पर रूसी सेना को जबरदस्त मात दी। आखिरकार अगस्त १९क्५ में अमेरिकी राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के मध्य न्यू हैंपशायर के पोर्ट्समाउथ में एक शांति संधि कायम होने के साथ इस जंग पर विराम लग गया। इस जंग के बाद जापान दुनिया में पहली आधुनिक गैर-पश्चिमी ताकत के रूप में उभरा।