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जीवन-जल पाकर भी लालची राजा का हुआ अंत

Bhaskar News | Jul 17, 2012, 00:32AM IST
 
 

राजा सूर्यदेव अत्यधिक लालची थे। वे अपना खजाना भरने के लिए प्रजा पर नए-नए कर लगाते रहते थे। एक बार राजा गंभीर रूप से बीमार हो गए। उन्हें लेने यमदूत पहुंचे। यमदूतों को देख राजा ने घबराकर उनसे प्रार्थना की - ‘हे यमदूतो! मुझे कुछ दिन और जी लेने दो। मैंने प्रजा की भलाई के लिए अनेक योजनाएं बनाई हैं।

उन्हें साकार करने के लिए मेरा कुछ दिन और जीवित रहना जरूरी है।’ यह सुनकर यमदूतों ने कहा - ‘राजन्! प्रत्येक मनुष्य अमर होना चाहता है, किंतु यह संभव नहीं है।’ यमदूतों के समझाने के बावजूद राजा का आग्रह जारी रहा। तब यमदूतों ने उन्हें एक कलश देते हुए कहा - ‘यह कलश जीवन-जल से भरा हुआ है। तुम प्रतिदिन इस कलश से थोड़ा-थोड़ा जल ग्रहण करना। जब तक तुम जीवन-जल को ग्रहण करते रहोगे, तब तक जीवित रहोगे।’

राजा ने पूछा - ‘किंतु यह तो जल्दी ही समाप्त हो जाएगा। उसके बाद क्या होगा?’ यमदूतों ने कहा - ‘यदि तुम थोड़ा-थोड़ा जल पियोगे, तो यह लंबे समय तक समाप्त नहीं होगा। यदि एक ही बार में पीने की कोशिश की तो तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी।’ यमदूतों के कहे अनुसार राजा थोड़ा-थोड़ा जीवन-जल ग्रहण करने लगा और अनेक वर्ष जीवित रहने के कारण वह अति आत्मविश्वासी हो गया। फिर एक दिन उसने सोचा कि क्यों न एक साथ सारा जीवन-जल पीकर अमर हो जाऊं। जैसे ही उसने कलश को खाली किया, उसकी मृत्यु हो गई। वस्तुत: लोभ का अंत कष्ट, संकट अथवा विफलता से ही होता है, इसलिए मन पर नियंत्रण रखना जरूरी है।
 
 
 

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