हर एक की उपयोगिता है उसे जानें, पहचानें और मानें
विजय शंकर मेहता
| May 13, 2012, 00:40AM IST
परिश्रम और अपडेट रहना इसमें बड़ा काम आता है। दूसरा पक्ष है किसी के भीतर छिपी उपयोगिता को ढूंढ़ लेना। हो सकता है कुछ लोग अपनी उपयोगिता का प्रदर्शन न कर पाएं। ऐसे समय बुद्धिमानी यह होगी कि हम सामने वाले की उपयोगिता को उसके भीतर से उजागर कर दें।
शास्त्रों में लिखा है- अहो खलस्यापि महोपयोग: स्नेहद्रुहो यत्परिशीलनेन। आकर्णमापूरितपात्रमेता: क्षीरं क्षरन्त्यक्षतमेव गाव:।। कैसा आश्चर्य है कि तेल-रहित खली का भी बड़ा उपयोग होता है, क्योंकि उससे पूरित पात्र को देखते ही गायें बिना किसी आघात के बर्तन भर-भर कर दूध देती हैं।
खली में से तेल निकाल लिया गया, तो सामान्य स्थिति यह है कि खली किसी काम की नहीं रही, लेकिन गायें उसको खा लें, तो भरपूर दूध देती हैं। ऐसे ही व्यावसायिक संस्थानों में लंबे समय सेवा करने के बाद कुछ वरिष्ठ लोग उम्र के कारण, हाशिए पर पटक दिए जाते हैं। सालों उन्होंने काम किया, व्यवस्था ने जमकर उनका तेल निकाला और अब वे खली की तरह किसी काम के नहीं रहे। लेकिन चतुर मैनेजमेंट उस खली की उपयोगिता को देख लेता है, जो अभी भी गाय के दूध के लिए काम आती है।
बुजुर्ग, अनुभवी व्यक्ति कहीं भी हों, बेकार नहीं होंगे। हमें उनके भीतर की उपयोगिता निकालने की कला आना चाहिए। तैराकी सिखाने वाला एक बूढ़ा उस्ताद था। जब भी कोई तैराक समंदर की तमाम दूरियों को पार करके किनारे पर आता, उस्ताद चिल्लाकर कहता-सावधान! एक तैराक ने पूछा- जब पूरा दरिया पार कर गए, तब कुछ नहीं कहा और अब किनारे पर सावधान कर रहे हो, ऐसा क्यों? उस्ताद बोला- मेरा अनुभव है लोग किनारे पर ही डूब जाते हैं। बीच दरिया में लहरों और गहराई की चुनौती थी।
जब संघर्ष होता है, समय होता है, तब आदमी सावधान रहता है, लेकिन सफलता के किनारे पर आकर बड़े-बड़े असावधान हो जाते हैं। इसलिए हर एक की उपयोगिता है। कब, कौन, कैसे काम में लिया जाए, यही समझदारी है। -प्रसिद्ध जीवन प्रबंधन गुरु





