मलय संघ बनने के बाद शुरू हुआ अशांति का एक दौर
Source: Bhaskar News | Last Updated 00:17(12/12/11)
मलयन इमरजेंसी वर्ष 1948 में मलाया संघ (मलयेशिया का पूर्ववर्ती) के गठन के बाद शुरू हुआ अशांति का दौर था, जो बारह साल तक चला। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सबाह और सारावाक जैसे ब्रिटिशों के कब्जे में रहे कुछ इलाकों को मिलाकर मलाया संघ का गठन हुआ था। इस संदर्भ में दोनों पक्षों की बीच हुई बातचीत में मलयों के अधिकार संरक्षित रखना और एक औपनिवेशिक सरकार स्थापित करना तय किया गया। इससे मलाया कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े लोग आक्रोशित हो गए।
इस संगठन में ज्यादातर चीनी थे, जो एक स्वतंत्र, साम्यवादी मलाया के पक्षधर थे। अपने इस लक्ष्य को लेकर उन्होंने छापामार जंग छेड़ दी, जिसे देखते हुए सरकार ने 18 जून 1948 को आपातकाल घोषित कर दिया। अंग्रजों ने इस क्रांति को दबाने के लिए ग्रामीण चीनियों को सख्त नियंत्रण वाले ‘नए गांवों’ में ठूंसना शुरू कर दिया, जिसका तीव्र विरोध हुआ।
पचास के दशक की शुरुआत में उसने लोगों का गुस्सा कम करने के लिए स्थानीय चुनाव करवाने व ग्रामीण परिषदों का गठन करने जैसे कई कदम उठाए। इसके अलावा कई चीनियों को नागरिकता भी दी गई। उनके इन कदमों से क्रांतिकारियों को समर्थन मिलना काफी कम हो गया। दशक के मध्य तक क्रांतिकारियों की ताकत घटने लगी और 1960 में आपातकाल हटा लिया गया।