विज्ञापन
 
 
 
 

किताब से लेखक नदारद!

 
Source: खुशवंत सिंह   |   Last Updated 00:18(03/12/11)
 
 
 
 
मुझे यह जानकर गहरा दुख पहुंचा है कि कुछ शीर्ष पब्लिशिंग हाउस, जिनसे मैं लंबे समय से संबद्ध हूं, ने अब लेखक को दरकिनार कर ही किताबें छापनी शुरू कर दी हैं। इसे ‘वैनिटी पब्लिकेशन’ का नाम दिया जा रहा है, जबकि लेखक किताब पर अपना नाम देखना चाहता है।

वैनिटी बुक्स के प्रकाशक के रूप में जिस एक व्यक्ति का नाम अग्रगण्य है, वे हैं राइटर्स वर्कशॉप कोलकाता के दिवंगत प्रोफेसर पी. लाल। उनका ट्रेडमार्क था खूबसूरत और नफीस कैलिग्राफी। लेकिन जब मैं संपादक था, तब मैंने तय किया था कि मैं उनकी वैनिटी बुक्स के रिव्यू नहीं छापूंगा।

इसके बाद कई अन्य समीक्षकों ने भी उनकी उपेक्षा करनी शुरू कर दी। आज भी बुकस्टोर्स में उनके प्रकाशन की किताबें कम ही नजर आती हैं। जब किसी भी समीक्षक को कोई किताब मिलती है तो स्वाभाविकतया वह सबसे पहले लेखक या लेखिका का नाम देखता है। यदि वह लेखक के नाम से नावाकिफ है तो वह प्रकाशक का नाम देखता है।

भारत के शीर्ष पब्लिशिंग हाउस में से अनेक ने इस बात की भी परवाह नहीं की है कि अपने नैतिक स्तर का ख्याल रखते हुए लेखकों की किताबें छापने के लिए उनसे पैसा न लें। मैं अपने निजी अनुभव और अनेक लेखक मित्रों के तजुर्बे से बता सकता हूं कि कई शीर्ष प्रकाशन गृहों ने कभी यह तय नहीं किया है कि वे युवा और उभरते हुए लेखकों से घूस नहीं लेंगे।

अब जब वे ऐसा कर रहे हैं तो मुझे कोई संदेह नहीं कि वे जल्द ही पाठकों के बीच अपनी विश्वसनीयता खो देंगे। हो सकता है, शुरू में ऐसा करके वे खासा पैसा कमा लें, लेकिन अगर दूरगामी प्रभावों की बात करें तो यह उनके लिए नुकसान का सौदा साबित हो सकता है। मैं सोचता हूं कि देश के अग्रणी प्रकाशन संस्थानों को जल्द से जल्द अपनी नीतियों पर पुनर्विचार प्रारंभ कर देना चाहिए।

.....................

अलौकिक यात्रा :

मेरी प्रिय मनोरंजक पत्रिका ‘प्राइवेट आई’ के कॉलम ‘द फनी ओल्ड वर्ल्ड’ में यह रोचक विवरण छपा है :

‘मैं पिछले कई सालों से धरती, स्वर्ग और नर्क की यात्राएं करता रहा हूं,’ मास्टर केक एंग सेंग ने जॉर्जटाउन, पेनांग में लोगों की एक भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, ‘और अब अपने मामूली-से पारितोषिक के तौर पर मैं चाहता हूं कि अपनी इस क्षमता को अन्य लोगों के साथ साझा करूं। मलयेशिया के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि कोई व्यक्ति लोगों के समक्ष उस अलौकिक दुनिया की सैर कराने का प्रस्ताव रख रहा है, जिसकी सरहदें हमारी मृत्यु के बाद शुरू होती हैं। यह यात्रा एक घंटे पंद्रह मिनट की होगी। मैं आपको दिखाऊंगा कि कैसे आत्मा देह को त्यागकर समय की भंवरों से होते हुए एक अलौकिक संसार तक चली जाती है। इस यात्रा के लिए सभी का स्वागत है, लेकिन मैं गुजारिश करता हूं कि कृपया गर्भवती महिलाएं इस यात्रा में न आएं।’

मास्टर केक की यात्रा में पचास से भी अधिक लोगों ने शिरकत की। घुप्प अंधेरे में हुई इस यात्रा में राहगीर राहभर प्रार्थनाएं करते रहे और अपनी-अपनी धार्मिक विधियों का पालन करते रहे। यात्रा के बाद राहगीरों की प्रतिक्रियाएं भिन्न-भिन्न थीं। चिआंग की चुआन ने सैर के समापन पर कहा कि ‘मैंने खूबसूरत आकाश में एक इंद्रधनुष टंगा देखा। एक देवता ने प्रकट होकर मुझे समझाइश दी कि मैं मांसाहार का त्याग कर दूं।’ एक अन्य महिला ने कहा कि ‘मैंने एक बाजार में अनेक लोगों को देखा, जिनमें मेरी दिवंगत मां भी शामिल थीं। अलबत्ता मैं उनमें से किसी के करीब न जा सकी और न ही उनमें से किसी से भेंट कर सकी।’

लेकिन चीन से आए दर्जनभर पत्रकारों को सैर के दौरान कुछ भी अनुभव न हुआ। वे धोखाधड़ी का इल्जाम लगाने लगे और अंतत: मास्टर केक को उनके पैसे लौटाने को बाध्य होना पड़ा। (सौजन्य : मलयेशिया स्टार)

...................

स्वर्ग या नर्क :

दो लड़कियां थीं। एक का नाम था रीता, दूसरी का नाम था बबीता। रीता बहुत भली लड़की थी, लेकिन बबीता उससे ठीक विपरीत थी। वह पिकनिक-पार्टी और मौज-मस्ती में यकीन रखती थी और उसके कई बॉयफ्रेंड्स थे।

एक दिन खबर आई कि बबीता की मौत हो गई है। कुछ माह बाद रीता की भी मौत हो गई। अपने नेक कामों के कारण रीता सीधे स्वर्ग पहुंची, लेकिन यह देखकर उसकी हैरानी का ठिकाना न रहा कि बबीता वहां पहले से ही मौजूद थी। वह सोचने लगी कि जिस लड़की ने धरती पर इतने पाप किए हों, वह भला यहां क्या कर रही है? वह सीधे स्वर्ग के सिक्योरिटी ऑफिसर के पास पहुंची और उससे तपाक से पूछा : ‘यह क्या हो रहा है? बबीता जैसी लड़कियों का भला स्वर्ग में क्या काम?’ ऑफिसर ने जवाब दिया :

‘मैडम, हम यहां किसी क्राइटेरिया के हिसाब से नहीं चलते। किस व्यक्ति को स्वर्ग भेजना है और किसे नर्क, इसका निर्धारण स्वर्ग और नर्क में उपलब्ध सीटों के आधार पर किया जाता है।’ यह सुनकर रीता ने अपना सिर पीट लिया और वह जोर-जोर से रोने लगी। ऑफिसर ने पूछा : ‘मैडम, क्या हुआ?’ रीता ने कहा : ‘काश! मुझे यह सब पहले से पता होता।’ (सौजन्य : रमेश कोटियन, उचिला, उडुपी)

..................

भरोसा :

किसी भी रिश्ते के लिए भरोसा सबसे जरूरी होता है। अगर कोई व्यक्ति अपनी प्रेमिका पर यह भरोसा न करे कि वह उसकी पत्नी को कुछ नहीं बताएगी तो उसका काम कैसे चलेगा? (सौजन्य : विपिन बख्शी, दिल्ली) - लेखक वरिष्ठ स्तंभकार हैं।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
आपके विचार

 
 
कोड :
5 + 6

 
 
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

रोचक खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बॉलीवुड

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जीवन मंत्र

 
 
 
 
 
 
 
 
 

क्रिकेट

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बिज़नेस

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जोक्स

 
 
 
 
 
 
 
 
 

पसंदीदा खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

फोटोगैलरी

Most Viewed

Victoria’s Secret picks sexiest women
Jennifer Flaunts Her Killer Curves
Just Added

dance floor
विश्व संग्रहालय दिवस के मौके पर आंचलिक विज्ञान केंद्र में कला का संगम
 
 
 
विज्ञापन
 
 
| Email  Print Comment
| Email  Print Comment