ऑनलाइन अपराधियों पर कसनी होगी नकेल
Online criminals
| Nov 30, 2012, 00:39AM IST
प्रोफाइल : फिनलैंड के एफ सिक्योर कॉपरेरेशन में चीफ रिसर्च ऑफिसर हैं।
TED पर अब तक 7,69,810 लोग सुन चुके हैं।
इंटरनेट हमारे लिए क्या कुछ नहीं लाया है। कॉन्टेक्ट, मनोरंजन, व्यापार आदि सभी कुछ तो इससे जुड़े हैं। मुझे यकीनन लगता है कि एक दिन हमें याद किया जाएगा कि हमारी पीढ़ी ऑनलाइन रही। ये वो पीढ़ी थी, जिसने दुनिया को वास्तविक और वैश्विक बनाया। मगर, यह भी सच है कि इंटरनेट के साथ सुरक्षा और गोपनीयता की समस्याएं भी हैं। मैंने इसने लड़ने में अपना काफी समय लगाया है।
चलो मैं आपको कुछ दिखाता हूं। ये फ्लॉपी ‘ब्रेन’ वायरस से इन्फेक्टेड है। दुनिया के इस पहले वायरस का पता 1986 में चला था। इसकी जांच के दौरान मैंने इसे भेजने वाले का नाम, उसकी लोकेशन वगैरह पता की। इसे पाकिस्तान के बसित और अमजद ने भेजा था। यानी पीसी में वायरस की समस्या आज की नहीं 26 साल पुरानी है।
80 और 90 के दशक के वायरस वास्तव में उतने खतरनाक नहीं थे। सेंटीपीड वायरस, क्रैश वायरस या वॉकर वायरस से संक्रमित होने पर आपको इसका पता चल जाता था। क्योंकि ये स्क्रीन पर दिखाई देते थे। ये वायरस टीनएज लड़कों ने शौकिया बनाए थे। मगर, आज बनने वाले वायरस शौकिया टीनएज लड़के नहीं बना रहे हैं। आज कंप्यूटर वायरस की समस्या वैश्विक हो गई है।
तो ये आते कहां से हैं?
दरअसल, संगठित अपराधी गिरोह इन्हें बनाकर पैसे कमा रहे हैं। मॉस्को में चल रही एक वेबसाइट गैंग्स्टाबग्स डॉट कॉम है। ये लोगों के संक्रमित कंप्यूटर खरीदते हैं। वैसे अन्य तरीकों से भी ये फायदा ले रहे हैं। जैसे बैंकिंग ट्रोजन्स। ये ऑनलाइन बैंकिंग करने के दौरान आपके खातों से पैसे चोरी करता है। या कीलॉगर्स, जो आपके कंप्यूटर में छिपकर आपके द्वारा टाइप किए गए हर शब्द, हर पासवर्ड को रिकॉर्ड करता रहता है और फिर उन्हें दूर बैठे अपराधियों को भेज देता है।
ऑनलाइन अपराधियों को पकड़ा नहीं जाता। हमले कहां से हो रहे हैं इसका पता नहीं चलता या देर से चलता है।
तो इसका हल है, अपने डाटा का बैकअप बनाएं। साथ ही ऑनलाइन अपराधियों पर नकेल कसने के लिए इंटरनेशनल लॉ इन्फोर्समेंट होना चाहिए। यह एंटी-वायरस या फायरवॉल को यूज करने से अधिक महत्वपूर्ण है।






