जब नौकरानी ने की रानी की बराबरी
Bhaskar News
| Dec 11, 2012, 23:36PM IST
एक राजा और रानी की एक ही पुत्री थी। उसके बड़े होने पर रानी को उसके विवाह की चिंता हुई। राजा और रानी ने अनेक राजकुमार देखे, किंतु अपनी बेटी के अनुकूल किसी को नहीं पाया। एक दिन रानी उदास बैठी हुई थी। तभी महल में सफाई का काम करने वाली एक नौकरानी वहां आई। उसने रानी से उदासी का कारण पूछा, तो वह बोली- ‘बेटी बड़ी हो गई है।
उसके विवाह की चिंता मुझे परेशान कर रही है। अब तक कोई योग्य लड़का हमें नहीं मिला।’ यह सुनते ही वह बोली - ‘रानीजी! आप नाहक ही परेशान हो रही हैं। मेरा लड़का है तो सही।’ उसकी बात पर रानी को बहुत गुस्सा आया। वह बोली - ‘खबरदार! जो अब कभी ऐसी बात कही, तो ठीक न होगा।’ अगले दिन उस नौकरानी ने आते ही रानी से पूछा - ‘रानीजी! कोई लड़का मिला।’ रानी की ‘ना’ सुनते ही उसने फिर अपने लड़के का प्रस्ताव रखा।
इस बार रानी आपे से बाहर हो गई और उसे महल से निकलवाकर राजा को उसकी शिकायत की। राजा ने कहा - ‘यह ये नौकरानी नहीं, कोई और बोल रहा है।’ अगले दिन राजा ने उस स्थान को खुदवाया, जहां खड़े होकर उस नौकरानी ने ये बातें कही थीं।
खुदाई करने पर वहां से अशर्फियों से भरे कई कलश निकले। राजा ने उन्हें खजाने में जमा कर रानी से पुन: नौकरानी से वही बात करने को कहा। दूसरे दिन जब रानी ने राजकुमारी के लिए नौकरानी के लड़के के बारे में बात की, तो उसने गिड़गिड़ाकर कहा - ‘रानीजी! कहां आप और कहां हम। आपकी कृपा से दो रोटी मिलती हैं। हम उसी में खुश हैं।’ संकेत यह है कि धन से शक्ति आती है, जो अहंकार का कारण बनती है। अत: कोशिश की जानी चाहिए कि धन के साथ मद न आए और स्वभाव में नम्रता बनी रहे।






