करनी की सजा
dainik bhaskar news
| Aug 31, 2012, 01:43AM IST
बहरहाल, 26/11 के मामले में अभी पूरा इंसाफ नहीं हुआ है, क्योंकि कसाब के सरपरस्त अभी भी पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे हैं। उस हमले की साजिश की परतें एक के बाद एक उघड़ती चली गई हैं, लेकिन इसके कर्ताधर्ताओं को उनके किए की सजा दिलाने में पाकिस्तानी सत्ता-तंत्र की अनिच्छा एवं अक्षमता जारी है। पाकिस्तान के शासकों को यह भय हो सकता है कि पूरी साजिश का पर्दाफाश होने पर भारत के इन बयानों की पुष्टि हो सकती है कि मुंबई पर हमला सिर्फ गैर-सरकारी जेहादी संगठनों का काम नहीं था, बल्कि उसमें पाकिस्तानी सत्ता-तंत्र के कुछ हिस्सों की भी भागीदारी थी।
लेकिन यह सच अब दुनिया वैसे भी जान चुकी है। यह सिर्फ संयोग नहीं है कि जिस दिन भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने कसाब की सजा-ए-मौत की पुष्टि की, उसी रोज पाकिस्तान के दक्षिणी वजीरिस्तान में फौज एवं तालिबान की लड़ाई में दर्जनों लोग मारे गए और सिंध प्रांत में एक ट्रेन आतंकवादी विस्फोट का निशाना बनी। पाकिस्तान में ऐसी घटनाएं रोजमर्रा की बात बन चुकी हैं। लेकिन यह भी कसाब की तरह उस देश के अपने किए-धरे की सजा है, जिसने धर्माधता और आतंकवाद को अपने सामरिक एवं रणनीतिक उद्देश्य प्राप्त करने का हथियार बनाया। कसाब के पास अब अपने गुनाह के नतीजों से बचने का कोई रास्ता नहीं है। लेकिन पाकिस्तान चाहे तो कसाब के सरपरस्तों को सजा दिलवाकर एक नई शुरुआत कर सकता है।






