उपकार के बदले प्रत्युपकार की भावना दिखाई सिंह ने
Source: bhaskar news | Last Updated 00:45(28/01/12)
जीवन दर्शन.. यह कथा अफ्रीका की है। चूंकि अफ्रीका में बहुत घने वन हैं और उन वनों में जंगली जानवर बहुतायत में होते हैं, इसलिए कई लोग सिंह का चमड़ा पाने के लिए उसे गड्ढा बनाकर उसमें कैद कर मार देते थे। एक बार सिंह पकड़ने वालों ने अफ्रीका के एक जंगल में सिंह को मारने के लिए ऐसा ही एक गड्ढा बनाया और उसे ढंक दिया। रात में एक सिंह उसमें गिर पड़ा।
तभी एक शिकारी उधर से निकला। उसने देखा कि सिंह गड्ढे से बाहर निकलने के लिए बार-बार उछलता है किंतु गड्ढे के चारों ओर गड़ी नोंक वाली लकड़ियों से उसे चोट लगने से वह पुन: गिर जाता है। शिकारी को सिंह पर दया आ गई। उसने एक रस्सी में दो लकड़ियों को बांधा और पेड़ पर चढ़ गया।
पेड़ पर से रस्सी खींचकर उसने लकड़ियां उखाड़ दीं। बीच से लकड़ियां इसलिए नहीं उखाड़ीं कि कहीं गड्ढे से निकलने पर सिंह उसे मार न डाले। शिकारी की मदद से सिंह बाहर आ गया। थोड़े दिनों बाद शिकारी वन में थककर लेटा था कि तभी एक चीते ने उस पर हमला कर दिया। चीता उसे मारने ही वाला था कि एक सिंह ने चीते पर आक्रमण कर उसे मार दिया।
शिकारी समझ गया कि चीते को मारकर सिंह अब उसे मारेगा, किंतु सिंह शिकारी के सामने बैठकर पूंछ हिलाने लगा। शिकारी पहचान गया कि यह वही सिंह है जिसे उसने गड्ढे में से निकाला था। शिकारी ने स्नेह से सिंह के सिर पर हाथ फेरा और फिर अपने रास्ते चला गया। सार यह है कि उपकार के बदले प्रत्युपकार की भावना होने पर ही सही अर्थो में सौमनस्य उपजता है, जिससे समाज की नैतिक सबलता बढ़ती है।