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सब्सिडी पर जटिल सवाल

Bhaskar News | Sep 27, 2012, 23:59PM IST
 
 

आर्थिक सुधारों की बहस में सब्सिडी एक जटिल मुद्दा है। जरूरतमंद तबकों को नकद सहायता देने (कैश ट्रांसफर) का विचार लंबे समय से विचाराधीन है, जिस पर केंद्र सरकार अब जल्द से जल्द अमल करना चाहती है। बारहवीं पंचवर्षीय योजना के अंतिम प्रारूप को मंजूरी देने के लिए इस महीने के मध्य में हुई योजना आयोग की पूर्ण बैठक में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि बारहवीं योजना अवधि के अंत तक खाद्य, उर्वरक और पेट्रोलियम सब्सिडी की जगह नकद सहायता देने की प्रथा पूरी तरह लागू हो सकती है।


दिल्ली के इलाके में इस बारे में दिल्ली सरकार और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की मदद से सेल्फ एंप्लॉयड वुमंस एसोसिएशन (सेवा) ने एक पायलट प्रोजेक्ट भी चलाया है। लेकिन इस अध्ययन के निष्कर्ष सरकार के मंसूबों के मुताबिक नहीं हैं। 450 बीपीएल परिवारों को लेकर सालभर तक चले इस अध्ययन के बाद तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि गरीबों के बीच सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के पक्ष में मजबूत राय है। दरअसल पीडीएस के लिए इस्तेमाल होने वाले बीपीएल कार्ड का उन परिवारों के लिए अन्य सरकारी लाभ प्राप्त करने समेत दूसरे उपयोग भी हैं।


रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकांश गरीब पीडीएस का इस्तेमाल करने के आदी हो चुके हैं और इसके खत्म होने की चर्चा उनमें असुरक्षा की भावना भर देती है। जाहिर है, सब्सिडी के मोर्चे पर सरकार के सामने कठिन चुनौतियां हैं। नकद सहायता की योजना लागू करने के पहले उसे गरीबों का भरोसा जीतना होगा। ब्राजील जैसे देश का उदाहरण अक्सर इस मामले में दिया जाता है, जहां कुछ शर्तो के साथ नकद सहायता देने की योजना सफल रही है। अगर भारत में भी उन शर्तो के मुताबिक सार्वजनिक सुविधाएं दुरुस्त की जाएं, तो शायद यहां भी यह योजना कामयाब हो सकती है।
 
 
 

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