परीक्षा चाहे जिंदगी की हो या पढ़ाई की, तैयारी जरूरी है
पं. विजयशंकर मेहता
| Apr 18, 2012, 00:21AM IST
पाठ्यक्रम का हर अध्याय अपने भीतर ठीक से उतारना पड़ता है, तब जाकर परीक्षार्थी उत्तीर्ण हो पाता है। जैसे यह शिक्षा का सच है, उसी तरह जिंदगी का एक अलग सच होता है। जीवन में भी परीक्षा चलती है। फर्क इतना है कि विद्यार्थी की परीक्षा समय पर होती है और जिंदगी की परीक्षा सदैव चलती रहती है। शिक्षा जगत में उसका टाइम टेबल होता है, पर जिंदगी में 24 घंटे ही परीक्षा के रहते हैं।
यहां की कामयाबी कागजों पर मायने नहीं रखती, क्योंकि प्रतिपल चल रही परीक्षा की मार्कशीट नहीं बनाते। हां, उत्तीर्ण होने के परिणाम जरूर आते हैं। विद्यार्थी रहते हुए तो याद रहता है कि अब परीक्षा होने वाली है और ऐसे पढ़ना है, लेकिन जिंदगी में ऐसा नहीं हो पाता। यहां नकल नहीं चलती, यहां का तयशुदा पाठच्यक्रम नहीं होता, यहां परीक्षक कौन है, पता ही नहीं चलता। मजेदार बात यह है कि कभी तो खुद ही की आंसरशीट जांचनी पड़ जाती है, लेकिन एक नियम दोनों जगह लागू होता है और वह है आपकी तैयारी जरूर होनी चाहिए। बिना तैयारी के जीवन का एक भी क्षण न बिताएं, क्योंकि एक जीवन में परीक्षा समय पर होती है और दूसरे जीवन में सदैव चलती है।







