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जीवन ईश्वर का दिया उपहार है

पं. विजयशंकर मेहता | Oct 20, 2012, 01:59AM IST
 
 


कपट दिमाग से निकलकर जिन-जिन चीजों में समाता है, उनमें से एक है उपहार। इसमें प्रेम, सौजन्य, सौदा और कपट एक साथ समाए जा सकते हैं। जिन्हें छल-कपट पसंद है, वे उपहार को भी हथियार बना लेते हैं। लोगों को छलते-छलते ये लोग एक दिन फिर स्वयं को तथा आगे जाकर परमात्मा को भी छलने लगते हैं।

ऊपर वाली ताकत और हमारे बीच एक रिश्ता उपहार का भी है। जिंदगी उसके द्वारा दिया गया खूबसूरत उपहार है। उसने तो देने में कोई छल-कपट नहीं किया, पर हमने लेने में कर दिया। कुछ लोग परमात्मा के दिए इस उपहार का सही उपयोग करने में इसलिए चूक जाते हैं क्योंकि वे इसे ढंग से खोल नहीं पाते।

जीवन के उपहार को सही ढंग से खोलने के लिए पांच बातें जरूरी हैं- परिश्रम, सुमिरन, सेवा, सरलता और स्वास्थ्य। भोग, विलास, स्वार्थ परमात्मा के साथ किया गया छल है। इन पांचों बातों के साथ परमात्मा का दिया उपहार रोज खोलें। परिश्रम के बिना जीवन धरती पर बोझ है। आज के दौर में तो आलस्य अपराध ही है। सुमिरन का अर्थ है स्मरण में शुद्धि। गंदे विचार कब प्रवेश कर जाते हैं, पता ही नहीं चलता। सेवाभाव परमात्मा और प्रकृति को खूब पसंद है।

दिनभर में कुछ समय ऐसे काम के साथ बिताया जाए, जिसमें किए हुए के एवज में कुछ पाने की अपेक्षा न हो। नि:स्वार्थ सेवा आनंद और मस्ती को बढ़ाती है। सरलता अपनी हर उम्र में बचाकर रखें। शांति और सरलता दो बहनों के समान हैं और जब हम स्वयं को स्वस्थ रखते हैं, तब भगवान कहता है कि इसने ठीक ढंग से खोला मेरा उपहार और उपयोग भी किया।   

 

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