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सेठ का छोटा बेटा बना सच्चा आत्मज्ञानी

भास्कर न्यूज | Dec 29, 2012, 00:25AM IST
 
 

किसी नगर में एक सेठ रहता था। उसके तीन लड़के थे। सेठ ने एक दिन विचार किया कि ज्ञानार्जन के लिए उन्हें नगर के बाहर किसी योग्य शिक्षास्थली पर भेजा जाए। उसने अनुभवी लोगों से विचार-विमर्श कर तीनों को एक अच्छे शिक्षक के पास भेज दिया। कई सालों बाद जब तीनों अध्ययन कर लौटे, तो सेठ ने उनकी परीक्षा लेने का विचार किया। वह देखना चाहता था कि उसके पुत्र क्या सीखकर आए हैं? 
 
उसने सर्वप्रथम बड़े पुत्र को बुलाकर पूछा - ‘बेटा! तुम क्या पढ़कर आए हो?’ उसने उत्तर दिया - ‘आत्म-विद्या।’ सेठ ने प्रश्न किया - ‘आत्म-विद्या का रहस्य क्या है?’ लड़के ने वेद और उपनिषदों के मंत्र सुनाकर आत्म-विद्या का रहस्य समझाने की कोशिश की। अब सेठ ने मंझले लड़के से यही प्रश्न किया। उसने जवाब में संत-महात्माओं की शिक्षा व अनुभव बताते हुए अंत में कहा - ‘उनका सारा जीवन ही आत्म-विद्या से भरा है।’ छोटे बेटे की बारी आने पर वह चुप रहा। सेठ ने कहा - ‘बोलते क्यों नहीं? आखिर इतने वर्षो में कुछ न कुछ तो सीखा होगा?’ तब वह धीरे से बोला - ‘पिताजी! मैंने जो आत्म-ज्ञान पाया है, उसका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता। सच्च आत्म-ज्ञान तो जीवन में, व्यवहार में जिया जाता है और वहां शब्द काम नहीं आते।’ सेठ ने उसे गले लगाते हुए अन्य दोनों पुत्रों को उसे गुरु बनाने की सलाह दी। वस्तुत: आत्म-ज्ञान अनुभूति का विषय है, अभिव्यक्ति का नहीं। सच्च आत्म-ज्ञानी अपने ज्ञान को वाणी से नहीं, अच्छे आचरण से व्यक्त करता है।
 

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