विज्ञापन
 
 
 
 

प्रदर्शन का नहीं हार्दिक भावना का विषय है सेवा

 
Source: पं. विजयशंकर मेहता   |   Last Updated 00:44(23/01/12)
 
 
 
 
विज्ञापन
जीवन प्रेमपूर्ण हो जाना एक बड़ी उपलब्धि है। स्त्री-पुरुष ही नहीं, कुछ और रिश्ते भी हैं, जो प्रेम को समझाते हैं। मनुष्य अपनी साधना-भक्ति से प्रेम प्राप्त नहीं कर सकता। प्रेम जिस पर कृपा करता है, उसके हृदय में प्रकट हो जाता है। हमारी संस्कृति में गुरु का बहुत महत्व बताया गया है।

कर्म में सेवा का भाव गुरुचरण सेवा ही है। यदि उदार दृष्टि से विचार किया जाए तो सेवाभाव की सर्वव्यापकता स्पष्ट हो जाती है। शक्तिपात के संन्यासी शिवोमतीर्थजी कहा करते थे - व्यावहारिक स्तर पर, निम्न बातें सेवक को अपने मन में स्पष्ट समझ लेनी चाहिए - गुरुसेवा का अभिमान नहीं हो, अन्यथा वह सेवा नहीं रह जाएगी।

अन्य गुरु सेवकों से वैमनस्य पैदा न हो जाए, अन्यथा सेवा अशांति का कारण बन जाएगी। यदि कोई दूसरा आ जाए तथा सेवा करना चाहे तो सेवक को हट जाना चाहिए तथा सेवा कार्य उसे सौंप देना चाहिए। कई बार सेवा से हट जाना भी सेवा होती है। इससे परस्पर प्रेम का वातावरण बनाने में सहायता मिलती है।

सेवा प्रदर्शन का नहीं, हार्दिक भावना का विषय है। गुरुसेवा के बदले कुछ प्राप्त करने की इच्छा नहीं करनी चाहिए। सेवा साधन से अलग नहीं है। जितनी सामथ्र्य, शक्ति, समय तथा श्रद्धा हो, उतनी ही सेवा का प्रयत्न करना चाहिए। सामथ्र्य-समय से अधिक करने पर आसक्त हो जाने का भय है।

सेवा का क्षेत्र बड़ा व्यापक है। शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, आर्थिक कई प्रकार की सेवाएं हैं। यदि कोई आपके समान सेवा नहीं कर पाता, किंतु किसी अन्य क्षेत्र में सेवा करता है तो उसका आदर करना चाहिए। ऐसी गुरुसेवा जीवन में प्रेम उतारेगी।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
आपके विचार

 
 
कोड :
8 + 10

 
 
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

रोचक खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बॉलीवुड

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जीवन मंत्र

 
 
 
 
 
 
 
 
 

क्रिकेट

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बिज़नेस

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जोक्स

 
 
 
 
 
 
 
 
 

पसंदीदा खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

फोटोगैलरी

Most Viewed

Victoria’s Secret picks sexiest women
Jennifer Flaunts Her Killer Curves
Just Added

The pocket piglets
 फैशन शो के दौरान मॉडल एलिशिया रावत।
 
 
 
विज्ञापन
 
 
| Email  Print Comment
| Email  Print Comment