विश्वास बने तो बढ़े आकर्षण
Bhaskar News
| Oct 01, 2012, 04:59AM IST
देश के नौजवानों में सेना का अफसर बनने के प्रति आकर्षण चुक रहा है, जिसका परिणाम है कि भारतीय सेना में 10500, नौसेना में 1400 और वायु सेना में 1100 अफसरों की कमी हो गई है। इससे अफसर-जवान का अनुपात बिगड़ा है, हालांकि जवानों के मोर्चे पर भी स्थिति बहुत उत्साहवर्धक नहीं है। 2011 में 10 हजार से अधिक जवानों ने समय से पहले ही रिटायरमेंट ले लिया। इस मामले में संतोष का पहलू सिर्फ यह है कि इस समस्या के प्रति सेना और भारत सरकार अब जागृत हो गई है।
सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह के मुताबिक अब कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे नौजवान सेना में नौकरी के लिए प्रेरित हों। इस दिशा में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आज संपन्न परिवारों के माता-पिता अपने बच्चों को जोखिम भरे कार्यो में जाने देने को इच्छुक नहीं होते, जिससे आदर्शवादी नौजवान भी हतोत्साहित हो जाते हैं। इसीलिए सेना ने यह संदेश देने की मुहिम छेड़ी है कि जोखिम जीवन के हर क्षेत्र में है, जबकि सेना में इसका बेहतर ढंग से प्रबंधन किया जाता है। इसके अलावा जरूरत हाल में उठाए गए कदमों को भी ठीक से प्रचारित करने की है।
मसलन, अल्प सेवा आयोग के अधिकारियों का सेवाकाल 10 से बढ़ाकर 14 साल करने, तरक्की के रास्ते बढ़ाने, अधिकारी कैडर के पुनर्गठन संबंधी सिफारिशों पर अमल एवं छठे वेतन आयोग को लागू करने के बारे में लोगों को बताया जाना चाहिए। अपनी पेशेवर कुशलता के लिए मशहूर 11 लाख कर्मियों वाली भारतीय सेना हमारी सुरक्षा की गारंटी है। यह नौजवानों में अपना आकर्षण खो दे, यह जोखिम हम नहीं उठा सकते।








